केतु गोचर 2023

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केतु गोचर 2023 तिथि, समय और भविष्यवाणियां

केतु एक काल्पनिक, लेकिन शक्तिशाली ग्रह है। जब यह अलग-अलग भावों में जाता है, तो इसका प्रभाव दूर-दूर तक महसूस किया जा सकता है। यह एक पाप ग्रह माना जाता है, क्योंकि यह पहला, दूसरा, चौथा, पांचवा, सातवां, आठवां, नौवा और दसवां सहित कई भावों में नकारात्मक परिणाम देता है। हालांकि, तीसरे, छठे और 11वें भाव के लिए यह सकारात्मक परिणाम लेकर आता है। राहु और केतु में बहुत कुछ असामान्य है। जहां एक ओर, राहु जिस भाव में बैठता है, उस भाव से संबंधित जातक के मन में भौतिक संपत्ति के प्रति लालसा उत्पन्न करता है। जबकि केतु जातक के मन से भौतिक सुखों को दूर कर आध्यात्म की ओर ले जाता है। राहु और केतु दोनों लगभग 18 महीने एक राशि में बिताते हैं, यही वजह है कि उनका गोचर एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटना है। यहां बताया गया है कि केतु गोचर से संबंधित विवरण दे रहे हैं। साथ ही विभिन्न भावों से गुजरते हुए इसका जातक के जीवन में क्या प्रभाव पड़ता है, यह भी जानेंगे।

केतु गोचर का क्या अर्थ हैं?

वैदिक ज्योतिष में केतु को संतृप्ति और एकांत का ग्रह माना जाता है। राहु के समान इसकी भौतिक इकाई नहीं है। इस ग्रह को ड्रैगन की पूंछ के रूप में जाना जाता है। इस ग्रह की विशेषताएं वास्तव में पूंछ के साथ प्रतिध्वनित होती हैं यानी यह गहरी सुरंग हैं, जिसका कोई अंतिम गंतव्य नहीं है, जैसे कि बिना सिर वाली लंबी पूंछ। केतु को आध्यात्मिकता लाने वाला ग्रह कहा गया है। केतु एक कर्म ग्रह है और यह अच्छे और बुरे दोनों कर्मों को हिसाब रखता है। आमतौर पर कहा जाता है कि कर्म चक्र का अंत केतु है जबकि शुरुआत राहु है। केतु चिंतनशील विचारों और गहन विश्लेषण का भार लाता है। यह जातक को स्थिरता और जीवन के उद्देश्य के बारे में अहसास कराता है। इसलिए यह सबसे प्रमुख स्थान है, जो आत्मज्ञान की ओर ले जाता है। कभी-कभी यह भ्रामक प्रवृत्ति या खुले तार जैसा भी होता है। केतु गोचर का हमारे जीवन पर बहुत गहरा असर पड़ता है।

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केतु गोचर 2023 (Ketu Gochar 2023 Kanya Rashi)

तिथि और दिन इस राशि से गोचर इस राशि में गोचर समय
30 अक्टूबर 2023, सोमवार कन्या राशि कन्या राशि दोपहर 01 बजकर 33 मिनट पर

प्रथम भाव में केतु गोचर का प्रभाव

जब केतु जन्म के चंद्रमा से प्रथम भाव में गोचर करता है, तो जातक को कुछ मानसिक तनाव का अनुभव होने लगता है। इसके साथ ही उसका स्वास्थ्य भी कुछ बिगड़ने लगता है। यह वह समय होता है, जब जातक का खर्च बढ़ता है और बचत घटती है। इसलिए आपको सलाह दी जाती है कि इस समयावधि में अपने खर्च को कम करें और पहले से जोड़े गए पैसों को खर्च न करें। जरूरत पड़ने के बावजूद कर्ज लेने से बचना चाहिए। कर्ज लेने से आप खुद को और अधिक वित्तीय संकट में डाल सकते हैं।

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वास्तव में यह गोचर विशेष रूप से आपके मन को प्रभावित करता है। वैवाहिक जीवन में भी अस्थिरता बनी रहेगी। पति-पत्नी के बीच गलतफहमी के साथ-साथ जीवन में कुछ उलझन भी दिखेगी। आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा को भी इस अवधि में नुकसान होगा। इसलिए आपके लिए सुझाव है कि ऐसा कोई काम न करें, जो आपकी प्रतिष्ठा या मान-सम्मान को ठेस पहुंचाए।

उपाय:

  • लाल रंग के कपडें पहनने से बचें। ज्यादातर सफेद और पीले रंग के कपड़े पहनें।
  • बंदरों को नियमित रूप से गुड़ खिलाएं।

द्वितीय भाव में केतु गोचर का प्रभाव

यदि केतु जन्म के चंद्रमा से दूसरे भाव में गोचर करता है, तो यह वित्तीय स्थिति को प्रभावित करता है। आपकी आर्थिक स्थिति कमजोर होने की संभावना है। ऐसा वित्तीय हानि की वजह से होगा। इस दौरान खर्चे भी बढ़ने की संभावना है। इन दिनों आपको चोरी से बहुत सावधान रहना चाहिए। अपने घर और सामान को सुरक्षित रखना चाहिए। केतु की स्थिति के कारण कुछ मानसिक रोग हो सकते हैं। आंखों से संबंधित किसी भी समस्या को नजरअंदाज न करें। यह आपके लिए बेहतर होगा।

अगर किसी तरह की आंखों से संबंधित बीमारी हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इस समय के दौरान, आप उन लोगों से बातचीत करने से बचें, जिनसे अक्सर आपके मतभेद रहते हैं। उनके साथ फिजूल में विवाद बढ़ सकता है। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि हमेशा बातचीत के दौरान कठोर शब्दों का प्रयाेग आपके व्यक्तित्व के लिए सही नहीं है। आपके अपशब्द या कठोर शब्द दूसरों का दिल दुखा सकते हैं। इसके अलावा, जीवनसाथी के मनमुटाव के योग नजर आ रहे हैं। आप समझदारी और सूझबूझ के साथ इस मनमुटाव को टाल सकते हैं। यह आपके मजबूत रिश्ते के लिए भी जरूरी है।

उपाय:

  • गली के कुत्तों को खाना खिलाएं, उन्हें आश्रय प्रदान करें। दरअसल, ऐसा माना जाता है कि केतु कुत्तों में निवास करता है।

तृतीय भाव में केतु गोचर का प्रभाव

जब केतु तीसरे भाव में प्रवेश करता है, जहां से जन्म का चंद्रमा स्थित होता है, तो अपेक्षाकृत आसान अवधि शुरू होती है। जो छात्र अपने करियर की शुरुआत की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें अब देर नहीं करनी चाहिए। जो लोग पहले से ही नौकरीपेशा में हैं, उनके करियर में सफलता के योग बन रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करने और अपने सपनों की नौकरी पाने के लिए भी यह एक अच्छी अवधि है। इस अवधि में जातक को अपनी मेहनत के अनुसार फल प्राप्त होगा।

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इतना ही नहीं, जातक को समाज में काफी ख्याति और प्रसिद्धि मिल सकती है। आपके लिए सलाह है कि समाज के लिए कार्य करते रहें। इस समयावधि में आपकाे कई यात्रा करने का मौका मिलेगा। जहां तक आपके निजी रिश्तों की बात हैं, तो वहां भी सब चीजें सामान्य रहेंगी। छोटी-छोटी नोंकझोंक घर में बनी रहेगी। लेकिन वह आपके रिश्तों को बेहतर मोड़ देगी। जिनका प्रेम संबंध अभी हाल ही में शुरू हुआ है, उन्हें अपने रिश्ते के साथ जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। अपने रिश्ते को धीरे-धीरे आगे बढ़ाएं। इसके अलावा, अपने स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखें। केतु गोचर अक्सर स्वास्थ्य पर भारी पड़ता है।

उपाय:

  • अपने माथे पर हल्दी का टीका लगाकर घर से बाहर निकलें।

चतुर्थ भाव में केतु गोचर का प्रभाव

जन्म के चंद्रमा से केतु के चौथे भाव में गोचर को वैदिक ज्योतिष में सकारात्मक नहीं माना जाता है। आपको अलग-अलग स्तर पर समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। सबसे पहले आप अपना पूरा ध्यान रखें, क्योंकि आपके लिए यह समय काफी खतरनाक है। वाहन चलाते समय बहुत सावधानी बरतें। साथ ही अपनी मां के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें। वह इस समयावधि में काफी कमजोर पड़ सकती हैं। वित्तीय उतार-चढ़ाव भी आपके जीवन में बने रहेंगे, परिणामस्वरूप मानसिक तनाव बना रहेगा।

मानसिक तनाव को कम करने के लिए कम से कम अपने खर्चों को कम करें, किसी को उधार न दें। इसके साथ ही अपने कार्यक्षेत्र में सबके साथ अच्छी तरह पेश आएं। वैसे संभव है कि आप ऑफिस की तरफ से किसी यात्रा पर जा सकते हैं। हालांकि, इस समयावधि में आपके द्वारा की गई कोई भी यात्रा सफल या लाभदायक नहीं रहेगी। इसलिए हो सके, तो यात्राएं टाल दें। आपको संपत्ति संबंधी किसी विवाद से बचने का भी प्रयास करना चाहिए।

उपाय:

  • केतु को मजबूत करने के लिए, आपको भगवान गणेश की पूजा करें।
  • आप श्री गणपति अथर्वशीर्ष स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं।
  • आप भगवान विष्णु के मछली अवतार मत्स्य की भी पूजा कर सकते हैं।
  • अपने बटुए में चांदी का सिक्का रखें। इससे वित्त स्थिति बेहतर होती है।

पंचम भाव में केतु गोचर का प्रभाव

यदि केतु जन्म के चन्द्रमा से पंचम भाव में प्रवेश करे, तो व्यक्ति के खर्चे में वृद्धि होती है। जातक को भी इस अवधि में बच्चों के साथ बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अगर बच्चे अपनी किशोरावस्था में हैं, तो वे आपकी बात नहीं मानेंगे। अगर आपके बच्चे युवा हैं, तो आपसे दूर-दूर रहेंगे। वे अपनी जिंदगी के कई अहम फैसले आपसे पूछे बिना कर सकते हैं। संतान के इस तरह के व्यवहार से आप काफी आहत होंगे, जो आपके मानसिक तनाव में वृद्धि कर सकता है। इसके अलावा इस समय आप निवेश करने से बचें। आपके लिए यह समय निवेश करने का या संपत्ति खरीदने का नहीं है। फिलहाल संपत्ति खरीदने से भी बचें। आपको धन के मामलों में भी अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए। अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। कुल मिलाकर यह अवधि जीवन में कई उतार-चढ़ाव लेकर आएगी।

उपाय :

  • आप जरूरतमंद लोगों को दान दें।
  • केतु से बेहतर परिणाम पाने के लिए आप तिल, केला, काला कंबल आदि का दान कर सकते हैं।

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छठे भाव में केतु गोचर का प्रभाव

जब केतु जन्म के चंद्रमा से छठे भाव में गोचर करता है, तो आपके कार्य जीवन में सुधार होने लगता है। प्रतियोगिताओं में सफलता प्राप्त करने के लिए यह एक अच्छा समय है। करियर में प्रगति होगी और विरोधियों पर विजय प्राप्त होगी। जो शत्रु आपके खिलाफ षड्यंत्र रच रहे हैं, उनकी कामना पूर्ण नहीं होगी। इस अवधि के दौरान आपकी वित्तीय स्थिति में सुधार होगा। अगर आप व्यसायिक हैं, तो इस समयावधि में कुछ प्रयोग कर सकते हैं। लेकिन कोशिश करें कि किसी के साथ साझेदारी का बिजनेस न करें। साथ ही किसी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। खासकर अपने व्यवसाय के संदर्भ में।

इस समयावधि में आप आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि लेना शुरू कर सकते हैं। कुछ धार्मिक यात्राएं भी कर सकते हैं। भले इस समयावधि में आपके साथ बहुत कुछ अनुकूल होगा। लेकिन फिर भी अपने स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न बरतें। केतु गोचर जातक के स्वास्थ्य को सबसे पहले प्रभावित करता है। इसलिए अपने पेट, मुंह और हड्डियों के दर्द से संबंधित कोई भी रोग हो या लक्षण नजर आएं, तो तुरंत अपना उचार करवाएं। अगर कोई पहले से ही किसी बीमारी से ग्रस्त है, तो उसका इलाज सही तरह से करवाएं। दवा लेने में जरा भी लापरवाही न करें। ऐसा करना आपके स्वास्थ्य को और बिगाड़ सकता है।

उपाय:

  • केतु के उपाय के रूप में आपको शुभ परिणाम प्राप्त करने के लिए केतु यंत्र का उपयोग करना चाहिए।
  • केतु मंत्र का जाप कर सकते हैं।

सातवें भाव में केतु गोचर का प्रभाव

जब केतु जन्म के चंद्रमा से सातवें भाव में प्रवेश करता है, तो जातक को कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने लगती हैं। जातक मानसिक रूप से भी व्यथित और दबाव महसूस करता है। रिश्तों के मामले में जातक का जीवन बहुत ही खराब दौर से गुजरने लगता है। पत्नी के साथ ही नहीं घर के अन्य सदस्यों के साथ भ्रम और गलतफहमियों की स्थिति जन्म लेने लगती हैं। आप कोशिश करें, घर में किसी का भी अपमान न करें। हमेशा बातचीत के दौरान सभ्य भाषा का उपयोग करें। ऐसा ही ऑफिस में भी करें। आपकी बातचीत की कौशल बेहतर करें, ताकि ऑफिस में कोई आपकी बात का गलत मतलब न निकाल लें।

अगर किसी के साथ भ्रम की स्थिति बन रही है, तो पहले ही अपनी बात को स्पष्ट कर दें। इन दिनों आपके खर्च में बढ़ोत्तरी हो सकती है। आप फिजूल की शॉपिंग कर सकते हैं। अगर आपको वित्त संकट से नहीं गुजरना है, तो वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए आपको खर्चों में कटौती करने की दिशा में काम करना होगा। अपने घर के अन्य सदस्यों के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखें। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अपने स्वास्थ्य को नजरंदाज कर दिया जाए। अगर बीमार हैं, तो बिना देरी किए डॉक्टर के पास जाएं।

उपाय:

  • जातक को चांदी की चेन पहननी चाहिए।
  • अपने आभूषण में लाल रंग के मोती या रत्न का उपयो करने से बचें।

आठवें भाव में केतु गोचर का प्रभाव

जन्म के चंद्रमा से आठवें भाव में केतु का गोचर जातक के लिए शुभ नहीं होता है। स्वास्थ्य के मामले में आपको अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। बार-बार बुखार और शरीर में दर्द की संभावना हो सकती है। जैसे ही मौसम बदले अपने स्वास्थ्य को लेकर सतर्कता जरूर बरते हैं। जरूरी होने पर उन चीजाें का सेवन बंद कर दें, जिससे आपकी तबियत बिगड़ती है। आपके लिए बाहर का खाना यानी जंक फूड, प्रीसर्व्ड फूड आदि सही नहीं है। इससे तुरंत आपकी तबियत बिगड़ सकती है। इसके अलावा केतु के आगे बढ़ने तक मन की शांति का अभाव और मानसिक कष्ट भी बना रहता है। मगर यह मौका आपको खुद को संभालना, आत्मनियंत्रण करना और खुद का मूल्यांकन करने का है। आप दूसरों की कही बातों पर न आएं। अपने लिए जो सही लगे, वही करें। लेकिन व्यवाहरिक धरातल पर ही अपने पांव जमाएं रखें। यह गोचर समाज में आपके लिए मानहानि का कारण भी बन सकता है। आप आध्यात्मिकता की ओर अधिक झुकाव महसूस करते हैं, जो इस गोचर के दौरान नकारात्मकता को कम करने के लिए अच्छा है। इस दौरान कुछ धन हानि भी संभव है।

उपाय:

  • आपको एक काले कुत्ते को खाना खिलाना चाहिए या एक काले कुत्ते को पालतू जानवर के रूप में रखना चाहिए
  • जातक को जितनी बार संभव हो भगवान शिव और भगवान भैरव के मंदिर में जाना चाहिए।

नवम भाव में केतु गोचर का प्रभाव

जब केतु जन्म के चंद्रमा से नवम भाव में प्रवेश करता है, तो जातक विदेश यात्रा कर सकता है या धार्मिक यात्रा पर जा सकता है। यह आपके लिए शुभ अवसर है। इसके साथ ही जो व्यक्ति नौकरी के लिए या अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए विदेश जाने के अवसर तलाश रहे थे, उन्हें यह मौका इस गोचर के दौरान मिल सकता है। अपने करियर क्षेत्र के प्रति ईमानदार रहें। अगर किसी पेशे में आपका मन नहीं लगता है, तो उसे छोड़कर वही करें, जो आपको पसंद हो। किसी के दबाव में आकर करियर से जुड़े निर्णय कभी न करें। इस गोचर के कारण जातक को आमतौर पर वित्तीय परेशानी से नहीं गुजरते हैं।

लेकिन केतु की मौजूदगी किसी के भी वित्त के लिए अनुकूल नहीं होती। बढ़ते खर्च को संयमित किया जा सकता है। आप दिखावे में न फंस सकते है। इस समय के दौरान आपको शारीरिक और मानसिक कष्ट बना रहता है। शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिए आपको अपने बच्चों और भाई-बहनों के साथ किसी भी बहस से बचने की कोशिश करनी चाहिए। बच्चों के साथ अच्छे संबंध स्थापित करने की कोशिश करें। इसके लिए उनके साथ क्वालिटी टाइम बिताएं और उन्हें तथा उनकी जरूरतों को समझने की कोशिश करें।

उपाय:

  • जरूरतमंद को कंबल दान करें।
  • इस गोचर के दौरान लाल वस्त्र पहनने से बचें।

दसवें भाव में केतु गोचर का प्रभाव

जन्म के चंद्रमा से केतु के दसवें भाव में गोचर किसी की धन संबंधी संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है। आपके जीवन में लंबे समय से उठापटक चल रही है, इस वजह से पहले से ही काफी परेशान हैं। केतु गोचर आपकी परेशानियों को बढ़ाएगा। इससे आपको कुछ मानसिक कष्ट भी हो सकते हैं। यदि आप गंभीर प्रयास नहीं करते हैं, तो व्यावसायिक प्रगति भी रुक सकती है। फिर भी, कार्यक्षेत्र में काम करने वालों को इस दौरान कुछ वृद्धि का अनुभव हो सकता है।

वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए भी यह एक संतोषजनक अवधि है। आपके अच्छे कार्य के लिए आपको अनुकूल फल प्राप्त हो सकता है। हालांकि, आपको अपने सामाजिक जीवन में सतर्क रहना चाहिए। आपके निजी व्यक्तित्व की बात करें, तो परेशानियों की वजह से आत्मविश्वास में कमी आ सकती है। अपना आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए ज्यादा से सकारात्मक लोगों से मिलें। ऐसे लोगों की संगत से दूर रहें, जो आपको हतोत्साहित करते हों। गृहस्थ जीवन में भी थोड़ी सी चहल पहल होगी, खासकर जीवनसाथी के साथ मनमुटाव हो सकता है। संयमित भाषा से अपने वैवाहिक जीवन के मतभेद को संभाला जा सकता है।

उपाय:

  • जब भी घर से बाहर निकलें चांदी की कोई वस्तु अपने पास रखें।

ग्यारहवें भाव में केतु गोचर का प्रभाव

जब केतु जन्म के चंद्रमा से ग्यारहवें भाव में गोचर करता है, तो यह व्यापार में लाभ प्रदान करता है। कोई भी भूमि और संपत्ति का सौदा भी इस अवधि के दौरान फलदायक सिद्ध होगा। अच्छी बात ये है कि आप अपना खुद का व्यवसाय भी शुरू कर सकते हैं। इसलिए अगर अपने किसी योजना को लंबे समय से लंबित रखा है, तो उसे अब अमल में ला सकते हैं।

गोचर के दौरान आय संतोषजनक बनी हुई है। खर्च में निंयत्रण रखेंगे, तो किसी तरह की समस्या नहीं होगी। इस अवधि में आपके बच्चों की शादी होने की संभावना है। कुल मिलाकर यह एक सकारात्मक गोचर है। इन दिनों योग करें। यह आपको अच्छा भी लगेगा और मानसिक सुकून भी प्रदान करेगा।

उपाय:

  • नियमित रूप से मंदिर जाएं।
  • भगवान गणेश की नियमित रूप से पूजा करें।

बारहवें भाव में केतु गोचर का प्रभाव

जन्म के चंद्रमा से बारहवें भाव में केतु वैवाहिक जीवन के लिए सकारात्मक स्थान नहीं है। इस दौरान जीवनसाथी के साथ आपका कुछ विवाद हो सकता है। जीवनसाथी के साथ मतभेद के कारण आपके अपने ससुराल पक्ष से भी पूरा सहयोग नहीं मिलेगा। हालांकि, यह गोचर आध्यात्मिक विकास के लिए अच्छा साबित होगा। आप अपने धार्मिक रुझान के चलते सहजता से तनाव की स्थिति से निपट सकेंगे।

हालांकि, अपमान और मानहानि की भी संभावना है। इस अवधि के दौरान आपको विदेश यात्रा करनी पड़ सकती है। लेकिन इस गोचर के दौरान आपको अधिक खर्च नहीं करना चाहिए या ऋण लेना से बचना चाहिए। साथ ही कोशिश करें कि इस समय काल में किसी को पैसे उधार भी न दें। संभवत: वह पैसे वापिस नहीं आयेंगे। करियर के लिए समय सामान्य रहेगा। आप जिस स्तर की मेहनत करेंगे, आपको वैसे ही फल प्राप्त होंगे।

उपाय:

  • केतु के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए ब्रहस्पतिवार के दिन व्रत रखें।
  • केतु को खुश करने के लिए घर में गणेश जी की पूजा करें।

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Ketu Gochar 2023: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केतु शुभ कब होता है?

अगर कुंडली में केतु तृतीय, पंचम, अष्टम, नवम एवं द्वादश भाव में हो, तो व्यक्ति को अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। जबकि वृश्चिक या धनु में केतु उच्च राशि का माना गया है और वृषभ में नीच का माना जाता है।

केतु खराब होने के क्या लक्षण है?

केतु खराब होने से जातक की कुंडली में केतु के दोष से उसे कई शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे सिर के बाल झड़ना, नसों में कमज़ोरी और पथरी संबंधी समस्‍या हो सकती है। इसके अलावा जोड़ों में दर्द और चर्म रोग की भी आशंका बनी रहती है।

केतु को कैसे ठीक करें?

केतु की शांति के लिए पीपल के वृक्ष के नीचे प्रतिदिन कुत्‍ते को मीठी रोटी खिलाएं। गणेशजी की रोजाना घर में पूजा करें। इसके अलावा कपिला गाय, लोहा, तिल, तेल, सप्तधान्य शस्त्र, नारियल, उड़द आदि का दान करने से केतु ग्रह की शांति होती है।

केतु ग्रह अच्छा है या बुरा?

केतु को अशुभ ग्रह माना गया है इसलिए यह सामान्य: नकारात्मक चीजों से जुड़ा होता है। यह अक्सर किसी के जीवन में पूर्ण वैराग्य, हानि, नासमझी, भटकने और भ्रम की भावना लेकर आता है।

केतु ग्रह से कौन -कौन सी बीमारी होती है?

गलत स्थान पर बैठे रहने के कारण जातक को असाध्य रोगों का सामना करना पड़ता है। केतु के अशुभ प्रभाव के तहत जातक को गर्भपात, पथरी, गुप्त एवं असाध्य रोग, खांसी, सर्दी, वात और पित्त विकार आदि रोगों के होने की आशंका रहती है।

केतु को बहुत मजबूत कैसे बनाएं

केतु को मजबूत बनाने के लिए केतु मंत्र प्रतिदिन 108 बार जाप करने से केतु दोष शांत हो जाते हैं और जरूरतमंदों को कंबल, गर्म कपड़े, छतरियां दान करना भी लाभकारी होता है।

केतु ग्रह के मित्र ग्रह कौन से हैं?

राहु-केतु के मित्र बुध, शनि, शुक्र, शत्रु सूर्य, चंद्र, मंगल, गुरु हैं।

केतु ग्रह की कितनी दृष्टि होती है?

गुरू व राहु-केतु की सप्तम् के अतिरिक्त पंचम व नवम दृष्टि को पूर्ण दृष्टि माना गया। कहने का अर्थ है कि गुरू व राहु-केतु जिस भी भाव में स्थित होते हैं, वहां से सप्तम, पंचम और नवम भाव पर पूर्ण दृष्टि डालते हैं।

केतु ग्रह का क्या प्रभाव होता है?

केतु भले प्रत्यक्ष रूप से ब्रह्मांड में दिखाई ना दें लेकिन इसका प्रभाव जातक के जीवन पर बहुत व्यापक होता है। यदि यह ग्रह सूर्य या चंद्रमा के साथ जातक की कुंडली में बैठे हों तो सूर्य ग्रहण दोष या चंद्र ग्रहण दोष लग सकता है। हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि इसका दोष हमेशा नकारात्मक ही हो। 

केतु ग्रह की पूजा कैसे होती है?

केतु के मूल मंत्र का रात्रि में 40 दिन में 18,000 बार जप करना चाहिए। केतु संबंधित वस्तुओं का दान करना चाहिए। साथ ही गणेश जी की नियमित पूजा करनी चाहिए।

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