गहन शोध के उपरांत पाया कि जीव मात्र प्रकृति से प्राप्त विकिरणों के अनुसार ही आचार विचार और व्यवहार करता है तथा इन्ही से उसका भविष्य निर्मित होता है।
अतः हम मनोदैहिक है।यदि हम जीवन को सचेतनता के साथ जिएं तो जीवन की कई समस्याओं से पार पा सकते हैं।करना बस यह होगा कि हमे किसी सचेतन व्यक्ति, वस्तु अथवा स्थान के सतत सम्पर्क में रहना होगा।