देवी सरस्वती ने ब्रह्मा को क्यों श्राप दिया था? जानिए इस कथा के पीछे का इतिहास

Posted On - September 11, 2021 | Posted By - Shantanoo Mishra | Read By -

 460 

सरस्वती ने ब्रह्मा को क्यों दिया श्राप

हिंदू धर्म पौराणिक कथाओं और अचम्भित कर देने वाले घटनाओं से परिपूर्ण धर्म है। हिन्दू धर्म में आज भी ऐसी कई कथाएं हैं जिनसे आप परिचित नहीं होंगे। ऐसी ही एक कथा है कि माता सरस्वती और परमात्मा ब्रह्मा के बीच की, पौराणिक कथाओं में यह उल्लेख मिलता है कि माँ सरस्वती ने भगवान ब्रह्मा को श्राप दिया था। अब प्रश्न यह उठता है कि माँ सरस्वती ने ब्रह्मा को क्यों श्राप दिया था? इसके साथ, क्या आप जानते हैं भारत में मंदिरों की संख्या लाखों या करोड़ों में होगी किन्तु अभी भी भगवान ब्रह्मा के केवल दो ही मंदिर हैं। इस बात का उत्तर भी इसी प्रश्न में छुपी हुई है।

सरस्वती का वास्तविक अर्थ

शिक्षा, ज्ञान और उत्कृष्टता की देवी, देवी सरस्वती का हिन्दू में मुख्य स्थान है। सरस्वती नाम संस्कृत शब्द ‘श्रु’ से लिया गया है, जो शुद्ध जल और ज्ञान या ज्ञान दोनों के निरंतर और आत्म-नवीनीकरण प्रवाह को दर्शाता है। देवी सरस्वती ज्ञान की प्रतीक हैं, जिसका प्रवाह नदी के समान है। शास्त्रों में माँ सरस्वती के चार भुजाओं के बारे में वर्णन किया गया है जो चार पहलुओं को दर्शाती हैं: मन, सतर्कता, बुद्धि और अहंकार। इसके अलावा, यह चार भुजाएं हिंदु धर्म ग्रंथ में मुख्य चार वेदों के भी प्रतीक हैं।

यह भी पढ़ें: पैर पर काला धागा बांधने के फायदे

अस्तित्व की उत्पत्ति

हिंदू पवित्र ग्रंथों के अनुसार, विश्व के संतुलन और निर्माण में देवी सरस्वती की अहम भूमिका है। पवित्र ग्रंथों में यह वर्णित है कि सृष्टि की रचना करने के बाद भगवान ब्रह्मा ने देखा कि उन्होंने क्या बनाया है? तब उन्होंने यह महसूस किया कि दुनिया विकृत और अभाव से भरी हुई। इसलिए, भगवान ब्रह्मा ने इस कार्य में उनकी मदद करने के लिए ज्ञान के अवतार का निर्माण किया। अत: ज्ञान की देवी सरस्वती की उत्पत्ति हुई। माँ सरस्वती की उत्पत्ति भगवान ब्रह्मा से हुई और माँ सरस्वती ने ही ब्रह्मांड, सूर्य, सितारे और चंद्रमा बनाने में ब्रह्मा जी की मदद की।

भगवान ब्रह्मा माँ सरस्वती की सुंदरता से मोहित हो गए थे और उन्हें अपना बनाने का फैसला किया। माँ सरस्वती ने गाय का भेस धारण कर कहीं छिप गई, जबकि ब्रह्मा ने बैल के रूप में उनका पीछा किया। हालाँकि, भगवान अभी भी असफल रहे और किन्तु उनके मन में अभी भी प्रेम उमड़ रही थी। इसके उपरांत परमात्मा ब्रह्मा ने भोलेनाथ की रचना की। जैसे ही भगवान शिव ने अपनी आँखें खोलीं, उन्होंने देवी सरस्वती की बेचैनी को भांप लिया और भैरव का रूप धारण कर ब्रह्मा के पांचवें सिर से विमुख हो गए। इस घटना के बाद, ब्रह्मा ने स्वयं को शुद्ध करने के लिए एक यज्ञ का आयोजन किया। हालाँकि, इस यज्ञ के लिए उन्हें एक पत्नी की आवश्यकता थी। तब, भगवान ब्रह्मा ने देवी सरस्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया और इस तरह उनका मिलन हुआ।

यह भी पढ़ें: भकूट दोष- कुंडली मिलान में प्रभाव और उपचार

माता सरस्वती का महत्व

देवी सरस्वती कभी भी अपने आप को चमकीले रंगों से नहीं सजती थीं। उनकी सफेद साड़ी पवित्रता और शांति का प्रतीक है। माँ सरस्वती ने शुद्ध और उदात्त प्रकृति मुकुट धारण किया है। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद उनकी संतान हैं। वह त्रिदेवियों- सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती का भी हिस्सा हैं। तीनों रूपों ने ब्रह्मा, विष्णु और शिव को इस दुनिया को बनाने और सुचारु रूप से चलाने में मदद की है।

यह भी पढ़ें: सूर्य को जल अर्पण करने के पीछे ज्योतिषीय महत्व एवं मूल्य

विद्रोह भाव

एक बार देवी सरस्वती अपनी पति ब्रह्मा द्वारा किए जा रहे महत्वपूर्ण यज्ञ में देरी से पहुंचीं। यह यज्ञ बिना पत्नी की अनुपस्थिति में नहीं किया जा सकता था। जब तक माता सरस्वती पहुंची, उन्हें को हुआ कि भगवान ब्रह्मा ने अनुष्ठान पूरा करने के लिए देवी गायत्री से पहले ही विवाह कर लिया है। इस बात से क्रोधित होकर माता सरस्वती ने भगवन ब्रह्मा को श्राप दे दिया।

देवी सरस्वती ने दिया ब्रह्मा को श्राप

भगवान ब्रह्मा द्वारा की गई दूसरी शादी से देवी सरस्वती काफी क्रोधित हुईं और उन्होंने भगवान ब्रह्मा को श्राप दिया। उसने कहा ‘आपने दुनिया को लालसा से भर दिया है और दुख के बीज को बो दिया है। आपने एक पवित्र आत्मा को बांधा है। आपकी शायद ही कोई मंदिर हो या कोई त्योहार मनाए।” तो, इस श्राप के कारण, भगवान ब्रह्मा के केवल दो लोकप्रिय मंदिर हैं, एक पुष्कर, राजस्थान में और दूसरा तमिलनाडु में।

अधिक के लिए, हमसे इंस्टाग्राम पर जुड़ें। अपना  साप्ताहिक राशिफल  पढ़ें।

 461 

Our Astrologers

1400+ Best Astrologers from India for Online Consultation

Copyright 2021 CodeYeti Software Solutions Pvt. Ltd. All Rights Reserved