Sawan Ekadashi 2026: सावन में कामिका और पुत्रदा एकादशी कब, जानिए तिथि, पूजा विधि, महत्व और शुभ मुहूर्त

Sawan Ekadashi 2026

एकादशी हिंदू धर्म की सबसे महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है, जो जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। इस वर्ष सावन महीने की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से हो चुकी है और यह 28 अगस्त 2026 तक चलेगी। इस दौरान कामिका एकादशी और श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत रखे जाएंगे। ये दोनों एकादशियां बहुत ही पुण्यदायी मानी जाती हैं। आइए जानते हैं कि सावन में कामिका और पुत्रदा एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा। साथ ही जानिए एकादशी कि पूजा विधि, महत्व और मुहूर्त के बारे में। 

सावन में कामिका और पुत्रदा एकादशी कब

कामिका एकादशी

श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर पड़ने वाली एकादशी को कामिका एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष 9 अगस्त 2026 को कामिका एकादशी का व्रत-पूजन किया जाएगा। एस्ट्रोटॉक के पंचांग (aaj ka panchang) के अनुसार, सावन कृष्ण पक्ष के एकादशी तिथि की शुरुआत 8 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 59 मिनट पर शुरू हो रही है और 9 अगस्त सुबह 11 बजकर 04 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार रविवार 9 अगस्त 2026 को कामिका एकादशी का व्रत रखा जाएगा। पूजा के लिए सुबह 7 बजकर 27 मिनट से दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक का समय शुभ रहेगा। वहीं पारण 10 अगस्त को सुबह 5 बजकर 47 मिनट से सुबह 8 बजे के बीच कर सकते हैं।

कामिका एकादशी का महत्व– धार्मिक मान्यता के अनुसार, कामिका एकादशी व्रत से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा मिलती है। मान्यता है कि, कामिका एकादशी व्रत के प्रभाव से पापों का क्षय होता है, मानसिक शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है।

सावन पुत्रदा एकादशी

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की एकादशी को श्रावण पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस साल 23 अगस्त 2026 को कामिका एकादशी का व्रत रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि की शुरुआत 23 अगस्त तड़के 2 बजे शुरू हो जाएगी और 24 अगस्त को सुबह 4 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। रविवार 23 अगस्त को उदयातिथि संग पूरे दिन एकादशी तिथि मिल रही है, इसलिए इसी दिन व्रत रखा जाना मान्य होगा। पूजा के लिए सुबह 7 बजकर 32 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक का समय शुभ रहेगा। वहीं व्रत का पारण 24 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 41 मिनट से शाम 4 बजकर 16 मिनट के बीच कर सकते हैं। 

पुत्रदा एकादशी का महत्व-  पुत्रदा एकादशी पौष और सावन महीने में रखी जाती है। सावन महीने में पड़ने वाली पुत्रदा एकादशी को श्रावण पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी संतान सुख और परिवार की उन्नति के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत-पूजन करने से संतान सुख की प्राप्ति होती। यह व्रत संतान के सुख, स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद देता है। साथ ही पारिवारिक जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली बढ़ती है।

सावन में पड़ने वाले एकादशी व्रत का महत्व 

वैसे तो सालभर में कुल 24 और अधिकमास होने पर 26 एकादशी पड़ती है। लेकिन सावन महीने में पड़ने वाली कामिका और पुत्रदा एकादशी का महत्व कई गुणा बढ़ जाता है। इसका कारण यह है कि सावन हिंदू कैलेंडर का पाँचवाँ और चातुर्मास का पहला महीना होता है। चातुर्मास में भगवान विष्णु  क्षीरसागर में विश्राम करते हैं और इस समय सृष्टि का कार्यभार भगवान शिव संभालते हैं। सावन भगवान शिव और एकादशी तिथि भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। यही कारण है कि सावन में पड़ने वाली एकादशियों का विशेष धार्मिक महत्व होता है।

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भगवान बह्म ने सावन में पड़ने वाली एकादशी का महत्व बताया है। पौराणिक कथा के अनुसार, बह्मा जी ने नारद जी से कहा कि, जो व्यक्ति सावन एकादशी पर व्रत रखकर भगवान विष्णु और तुलसी पूजन करता है, उन्हें नरक का कष्ट नहीं भोगना पड़ता है। ऐसे लोग जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाते हैं।  इन एकादशी में भगवान के सामने दीप जलाने से या दीपदान करने से पितर स्वर्गलोक में अमृत पान करते हैं।

कामिका और पुत्रदा एकादशी पूजा विधि

एकादशी तिथि पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहन लें। एकादशी के दिन पीले, नारंगी या गुलाबी रंगों के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। लेकिन काले, गहरे नीले या भूरे रंग के कपड़े न पहनें। स्नान के बाद पूजाघर में घी का दीपक जलाएं और भगवान के सामने हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें। अब पूजा की तैयारी करें। पूजा स्थल के पास ही एक लकड़ी के चौकी की स्थापना करें  घर के मंदिर की सफाई कर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। भगवान को पीले वस्त्र, माला, पीले फूल चढ़ाएं। पीले चंदन का तिलक लगाकर फल, मिष्ठान जैसी पूजा सामग्रियों को अर्पित करें। पूजा में तुलसी दल जरूर चढ़ाएं। भगवान विष्णु की पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है। इसके बाद धूप-दीप दिखाएं और विष्णु सहस्रनाम, या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें। अपनी शारीरिक क्षमतानुसार व्रत रखें और अगले दिन द्वादशी तिथि पर व्रत का पारण करें।

एकादशी व्रत में क्या करें और क्या नहीं 

  • व्रत के दौरान क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए।
  • एकादशी व्रत में तामसिक चीजें या अन्न खाने से बचना चाहिए। आप अपने सामर्थ्यनुसार सात्विक भोजन, निर्जला या फलाहार व्रत रख सकते हैं।
  • व्रत के दौरान दिन में सोने से बचना चाहिए। इस समय भगवान विष्णु का अधिक से अधिक ध्यान और मंत्रों का जाप करना चाहिए।
  • एकादशी पूजन में भगवान श्रीहरि को तुलसी दल का भोग जरूर अर्पित करें और द्वादशी तिथि पर ही व्रत का पारण (व्रत खोलना) करें।

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Posted On - July 31, 2026 | Posted By - Admin | Read By -

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