जन्म कुंडली – जीवन का मानचित्र

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वैदिक जन्म कुंडली एक अद्वितीय कर्म नक्शा है जो जीवन के ज्ञान को साझा करता है- अतीत, वर्तमान और भविष्य। आपका चार्ट आपको समझने की कुंजी है कि आप मानसिक, भावनात्मक, शारीरिक और आध्यात्मिक स्तर पर कौन हैं। आपका चार्ट आपके उपचार और परिवर्तन प्रक्रिया के बारे में अंतरंग रहस्य भी साझा करता है। ज्योतिष वैदिक विज्ञान है।

जन्म कुंडली क्या है?

जन्म कुंडली हमारे जीवन का मानचित्र है। यह एक सॉफ्टवेयर है, जिसमे हमारा प्रारभ्ध यानि जनम-जन्मांतर से संचित कर्मो का कोडेड किया हुआ रहस्य छिपा हुआ है। हमारे सोच विचार से लेकर, हमारी जीवन शैली, हमको किसी के शब्दों या फिर कार्यो का भला बुरा लगना – यहाँ से लेकर “Every Walk Of Life” जीवन का सम्पूर्ण घटनाचक्र कोडेड किया हुआ है, भविष्यफल के रूप में।

जन्मकुंडली के १२ भावो, ९ ग्रहो, २८ नक्षत्रो के Permutation – Combination के अनुसार चलते फिरते और जीवन को जीते वही इंसान है हम, जो ये जानना चाहते है की जन्मकुंडली क्या है? यही है हमारे जीवन का “Coded Vedic Secret”और हम सही विधि द्वारा कुछ निश्चित प्रतिशत तक जान सकते है- की हमारी जन्मकुंडली क्या है|

जन्म कुंडली किसलिए है?

वैदिक शास्त्र का छठवां अंग है – ज्योतिष। इससे सम्बंधित कोई हज़ारो-हज़ारो वर्ष पूर्व का ग्रन्थ अभी उपलब्ध नहीं है। लेकिन कई ग्रन्थ ऐसा प्रमाणित भी करते है की ज्योतिष काफी प्राचीन है। पौराणिक कथाओ के अनुसार गणेश जी के जन्म के समय, ब्रह्मा जी ने उनका वेद देख कर नामकरण किया – विघ्न विनाशक। इससे यह प्रमाण मिलते है की जन्म कुंडली निर्माण विषय बहुत प्राचीन है।

जन्म कुंडली की उपस्थिति इसलिए है, की हम कुंडली में उपस्थ्ति ग्रह योग के अनुसार जान सके की क्या होनी चाहिए हमारी साधना आराधना की पद्धति, कैसा होना चाहिए हमारा व्यवहार, क्या होना चाहिए हमारा पराक्रम, परिश्रम , खान-पान, रहन-सहन, शिक्षा, व्यापार, और इन सब के साथ हमारे जीवन को कैसे विकसित किया जाए, इन्ही सब के लिए होती है जन्म कुंडली।

जन्म कुंडली का क्या करे?

वेद अनुष्ठान करने से लेकर, किसी भी प्रकार का स्वाध्याय करना है, ध्यान करना है, उसका जो हमे पथ मिलता है वह कुंडली से ही दिखाई देता है। मुहूर्त शास्त्र से लेकर जन्म कुंडली के अंदर जो विभिन्न १२ भाव की स्थति है, उसके अनुसार हमे वह पथ दिखाई पड़ता है।

जीवन में कोई उतार चढ़ाव आ रहा हो तब, या जीवन सुखमय व्यतीत हो रहा हो तब भी कुंडली की ग्रह स्थिति के अनुसार लग्न, राशि, महादशा, तृतीय दशा, नवम-एकादश स्थान के ग्रह, योगकारक ग्रह और ग्रहो के मंत्र का उच्चारण करने से एकाग्रता आत्मबल में वृद्धि होती ही है, साथ में उन ग्रहो से शुभ फलयुक्ति की प्राप्ति होती है।

जन्म कुंडली को आधार मानकर, जब भी हम किसी एक संख्या का लगातार उच्चारण करते है, तो उस संख्या की प्रतिपूर्ती होती है और एक निश्चित वेग बनता है और हमे फल प्राप्ति होती है।

यह लेख ज्योतिषचार्य विजय रावल जी द्वारा लिखा गया है।
विजय रावल जी से आप AstroTalk App के माध्यम से संपर्क कर सकते है।
संपर्क करने के लिए क्लिक करे|

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Posted On - February 21, 2020 | Posted By - Navneet Suryavanshi | Read By -

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