Anant Chaturdashi 2026: हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी पर्व का विशेष धार्मिक महत्व होता है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा का विधान है। इसलिए इसे अनंत चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। साथ ही अनंत चतुर्दशी पर भी दस दिवसीय गणेशोत्सव का भी समापन होता है और गणपति का विसर्जन किया जाता है। आइए जानते हैं कि इस वर्ष अनंत चतुर्दशी कब पड़ रही है और पूजा के लिए कौन-से मुहूर्त शुभ रहेंगे।
पंचांग की गणना के अनुसार, अनंत चतुर्दशी हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। 24 सितंबर को रात 11 बजकर 18 मिनट से चतुर्दशी तिथि लग जाएगी, जिसका समापन 25 सितंबर रात 11 बजकर 6 मिनट पर होगा। 25 सितंबर को सूर्योदय के समय चतुर्दशी तिथि रहेगी। ऐसे में उदयातिथि के मुताबिक शुक्रवार 25 सितंबर 2026 को ही अनंत चतुर्दशी का व्रत-पूजन किया जाना शास्त्रसम्मत होगा।
अनंत कच्चे सूत से तैयार किया जाता है और इसमें 14 गांठें लगाई जाती हैं। लेकिन सवाल यह है कि आखिर इसमें 14 गांठें ही क्यों लगाते हैं और इसका क्या रहस्य है? अनंत सूत्र की 14 गांठों को 14 लोकों से जोड़ा जाता है। पुराणों में भी इन 14 लोकों का वर्णन मिलता है। इनमें 7 ऊर्ध्व लोक और 7 अधोलोक होते हैं। 7 ऊर्ध्व लोकों में भू-लोक, भुवर लोक, स्वर्ग लोक, महर लोक, जम लोक, तप लोक और सत्य लोक हैं। वहीं 7 अधोलोक में अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल लोक हैं। धार्मिक ग्रंथों में ऐसा वर्णन मिलता है कि, 7 ऊर्ध्व लोक धरती के ऊपर के माने गए हैं और सात अधोलोक धरती के नीचे के लोक होते हैं। अनंत सूत्र की 14 गांठें इन्हीं 14 लोकों का प्रतीक मानी जाती हैं।
जिसका न आदि है और न अंत, उसे ‘अनंत’ कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में भगवान विष्णु को अनंत स्वरूपों से जोड़ा जाता है। साथ ही शेषनाग को भी अनंत कहा जाता है। अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु की पूजा होती है और 14 गाठों वाला अनंत सूत्र बांधा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर पूजा-पाठ करने से जातक को दुख और कष्टों से मुक्ति मिलती है। पौराणिक कथाओं में ऐसा वर्णन मिलता है कि, पांडवों ने भी कष्टों से मुक्ति के लिए भाद्रपद में अनंत चतुर्दशी का व्रत रखा था।
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