Narak Chaturdashi 2026: हिंदू धर्म में नरक चतुर्दशी पर्व का विशेष महत्व होता है। इसे दीपावली से ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है। नरक चतुर्दशी को छोटी दीवाली, रूप चौदस और काली चौदस जैसे नामों से भी जाना जाता है। नरक चतुर्दशी पर यमराज की पूजा, यम दीप जलाना और श्रीकृष्ण की पूजा के साथ ही कई नियम होते हैं, जिनमें अभ्यंग स्नान भी एक है। आइए जानते हैं आखिर नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान का इतना अधिक महत्व क्यों हैं, स्नान की विधि क्या है और स्नान का मुहूर्त क्या रहेगा।
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि और धनतेरस के एक दिन बाद नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि सुबह 10:47 से शुरू होगी और 8 नवंबर को सुबह 11:27 पर समाप्त होगी। इस वर्ष नरक चतुर्दशी शनिवार 7 नवंबर को पड़ रही है। प्रदोष काल में नरक चतुर्दशी तिथि रहने के कारण यम दीपदान किया जाएगा, हनुमान पूजा होगी और काली चौदस की पूजा की जाएगी। लेकिन उदयातिथि 8 नवंबर को मान्य होने के कारण अभ्यंग स्नान इसी दिन किया जाएगा।
अभ्यंग स्नान का मुहूर्त- 8 नवंबर को सुबह 5:41 से सुबह 6:38 तक (सूर्योदय से पूर्व)
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नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान की प्राचीन परंपरा का अत्यधिक धार्मिक और आयुर्वेदिक महत्व है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था। इसका वर्णन श्रीमद्भागवत पुराण और विष्णु पुराण में भी मिलता है। युद्ध समाप्त होने के बाद श्रीकृष्ण ने शरीर पर लगे रक्त को साफ करने के लिए तेल और उबटन लगाकर चतुर्दशी के दिन प्रात:काल स्नान किया था। इसलिए इस दिन तेल-उबटन लगाकर सूर्योदय से पूर्व स्नान करने का महत्व है। एक मान्यता यह भी है कि, नरक चतुर्दशी पर सूर्योदय से पूर्व स्नान करने से नरक की यातनाओं से मुक्ति मिलती है और अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता।
आयुर्वेद के अनुसार नरक चतुर्दशी या रूप चौदस पर तिल के तेल से मालिश और उबटन लगाकर स्नान करने से त्वचा में निखार आता है। इसलिए इसे रूप चौदस कहा जाता है। साथ ही इस स्नान से रोग-दोष भी दूर होते हैं।
नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान का उद्देश्य केवल शरीर की सफाई नहीं, बल्कि इससे कहीं अधिक है। यह स्नान मन को शांत और तरोताजा रखता है।
अभ्यंग स्नान से बीमारियां दूर होती हैं। इसके अलावा अभ्यंग स्नान ‘ऋतुचर्या’ के संदर्भ में शरीर में वात, पित्त और कफ दोनों को संतुलित रखने में मदद करता है।
तेल मालिश- नरक चतुर्दशी पर सूर्योदय से पहले उठना चाहिए और पूरे शरीर पर तिल का तेल लगाकर अच्छे से मालिश करनी चाहिए।
उबटन-तेल से मालिश करने के बाद बेसन, हल्दी, चंदन या आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का उबटन लगाना चाहिए।
अपामार्ग का प्रयोग- परंपरा के अनुसार इस दिन अपामार्ग (चिरचिरा) के पौधे को या उसकी पत्तियों को सिर के चारों तरफ या पानी में डालकर स्नान करना चाहिए।
स्नान- उबटन और तेल को शरीर पर कुछ समय तक रखने के बाद ताजे और गुनगुने पानी से स्नान करना चाहिए।
यम तर्पण- स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यमराज के निमित्त तर्पण करना चाहिए।
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