Hindu Panchang (हिंदू पंचांग)

New Delhi, Delhi, Indiaशुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

आज का पंचांग तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण

आज की तिथिपंचमी
वारशुक्रवार
नक्षत्रमृगशीर्ष तक 03:35
ज्योतिष योगशिवा
आज का करणकौलव
पक्षकृष्ण

मास, संवत और ऋतू

ऋतुशरद
शक संवत1948 विश्वावसु
विक्रम संवत2083 विश्वावसु
अयनदक्षिणायन
अमांतआश्विन
पूर्णिमांतकार्तिक
☀️

सूर्योदय

01:01 am
🌅

सूर्यास्त

12:07 pm
🌕

चंद्रोदय

03:50 pm
🌑

चंद्रास्त

05:30 am

चंद्र और सूर्य राशि

चंद्र राशिमिथुनतक 18:00
सूर्य राशितुला

अशुभ समय (अशुभ मुहूर्त)

कंटक / मृत्युसे30-10-26 12:04:35 PMतक30-10-26 01:27:51 PM
राहु कालसे30-10-26 10:41:19 AMतक30-10-26 12:04:35 PM
कालवेला / अर्धयामसे30-10-26 01:27:51 PMतक30-10-26 02:51:07 PM
यमघंटासे30-10-26 02:51:07 PMतक30-10-26 04:14:24 PM
यमगंडसे30-10-26 04:14:24 PMतक30-10-26 05:37:40 PM
Gulika Kaalसे30-10-26 07:54:46 AMतक30-10-26 09:18:02 AM

आज और आगामी त्योहार

आने वाले त्योहारों और व्रतों की तैयारी पहले से करें — तिथि, पक्ष और तारीख के साथ।

इसमें ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति देखकर तिथि, वार, योग, करण और शुभ-अशुभ समय की गणना की जाती है। यही कारण है कि शादी-विवाह, गृह प्रवेश, पूजा-पाठ और त्योहारों के लिए पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। वैदिक मान्यताओं के अनुसार हिन्दू पंचांग को “विक्रम संवत” से भी जोड़ा जाता है, जिसकी शुरुआत राजा विक्रमादित्य के समय मानी जाती है। आज भी उत्तर और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में विक्रम संवत का उपयोग किया जाता है।

हिन्दू कैलेंडर और सामान्य कैलेंडर में क्या अंतर है?

आज हम जिस अंग्रेजी कैलेंडर का इस्तेमाल करते हैं, वह सूर्य की गति पर आधारित है और उसमें 365 दिन होते हैं। वहीं हिन्दू कैलेंडर मुख्य रूप से चंद्रमा की गति के अनुसार बनाया गया है। इसी कारण हिन्दू पंचांग का एक वर्ष लगभग 354 दिनों का माना जाता है। चूंकि दोनों कैलेंडर के दिनों में अंतर होता है, इसलिए हर तीन साल में हिन्दू पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे 'अधिक मास' कहा जाता है। इसके अलावा इसे 'पुरुषोत्तम मास' के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह महीना पूजा-पाठ, दान और भक्ति के लिए बेहद शुभ माना जाता है। हालांकि इस दौरान शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।

हिन्दू पंचांग में कैसे बदलता है चंद्रमा?

इस महीने का पंचांग कैलेंडर देखने पर आप पाएंगे कि हिन्दू महीने दो भागों में बंटे होते हैं- शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। शुक्ल पक्ष वह समय होता है जब चंद्रमा धीरे-धीरे बढ़ता है और पूर्णिमा की ओर जाता है। वहीं कृष्ण पक्ष में चंद्रमा घटता हुआ अमावस्या की ओर बढ़ता है।

शुक्ल पक्ष के 15वें दिन को पूर्णिमा कहा जाता है, जबकि कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन को अमावस्या माना जाता है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं में इन दोनों तिथियों का विशेष महत्व बताया गया है। आज भी लाखों लोग त्योहार, व्रत, शुभ मुहूर्त और पूजा-पाठ की सही जानकारी के लिए हिंदी पंचांग और हिन्दू कैलेंडर का सहारा लेते हैं।

हिन्दू पंचांग या हिन्दू कैलेंडर भारत की सबसे प्राचीन समय गणना प्रणालियों में से एक माना जाता है। इसका उपयोग सदियों से त्योहारों, व्रतों, शुभ मुहूर्त और धार्मिक कार्यों की तिथियां तय करने के लिए किया जाता रहा है। यही वजह है कि आज भी लोग रोज़ हिंदी पंचांग या हिंदू कैलेंडर देखकर दिन की शुरुआत करना पसंद करते हैं। हिंदू पंचांग सूर्य और चंद्रमा की चाल पर आधारित होता है। 

FAQs

प्रश्न1. हिन्दू पंचांग क्या होता है?

हिन्दू पंचांग एक प्राचीन वैदिक कैलेंडर है, जो सूर्य और चंद्रमा की गति के आधार पर तिथि, वार, नक्षत्र और शुभ मुहूर्त की जानकारी देता है।

प्रश्न2. हिंदी पंचांग और सामान्य कैलेंडर में क्या अंतर है?

सामान्य कैलेंडर सूर्य की गति पर आधारित होता है, जबकि हिंदी पंचांग चंद्रमा और ग्रहों की स्थिति के अनुसार बनाया जाता है।

प्रश्न3. हिन्दू कैलेंडर में कितने महीने होते हैं?

हिन्दू पंचांग में कुल 12 महीने होते हैं। 

प्रश्न4. अधिक मास क्या होता है?

हर लगभग तीन साल में हिन्दू पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जुड़ता है, जिसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।

प्रश्न5. शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष क्या होते हैं?

शुक्ल पक्ष में चंद्रमा बढ़ता हुआ दिखाई देता है, जबकि कृष्ण पक्ष में चंद्रमा धीरे-धीरे घटता है।