
जब हम किसी नए कार्य की शुरुआत करते हैं या कुछ नया करने की सोचते हैं तो सबसे पहले आज का शुभ मुहूर्त (aaj ka shubh muhurat) क्या है इस बारे में विचार करते है। हिंदू धर्म में शुभ मुहूर्त और अभिजीत मुहूर्त आज का बहुत अधिक महत्व है। यह एक ऐसा समय होता है, जिसमें किसी भी धार्मिक, सामाजिक या सांस्कृतिक कार्य की शुरुआत करना अच्छा माना जाता है।
ऐसी मान्यता है कि शुभ मुहूर्त या अभिजीत मुहूर्त में किया गया काम व्यक्ति को सकारात्मक परिणाम देता है। यही वजह है कि लोग हर रोज आज का शुभ मुहूर्त और अभिजीत मुहूर्त आज के बारे में जानकारी हासिल करना चाहते हैं। आइए आगे बढ़ते हैं और सबसे पहले जानते हैं शुभ मुहूर्त है क्या?
वैदिक ज्योतिष में शुभ मुहूर्त का अर्थ है शुभ समय। यह एक शक्तिशाली समय होता है, जिसमें सभी ग्रह, नक्षत्र, तिथि, वार, योग और करण जैसी पंचांग की स्थितियां अनुकूल होती है। ऐसे में, इस दौरान किया गया कार्य सकारात्मक और सफलता प्रदान करता है। यही कारण है कि लोग विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, अन्नप्राशन, मुंडन, व्यवसाय आरंभ, वाहन खरीदना और धार्मिक अनुष्ठान जैसे कार्यों से पहले शुभ मुहूर्त (aaj ka shubh muhurat) देखना जरूरी मानते हैं।
वहीं बात अगर अभिजीत मुहूर्त की करें तो यह भी एक शुभ समय है। यह प्रतिदिन दोपहर के समय सूर्य की स्थिति पर निर्भर करता है (लगभग मध्याह्न 12 बजे)। यह हर दिन लगभग 48 मिनट की अवधि का होता है। यदि किसी कारणवश किसी कार्य के लिए अलग से शुभ मुहूर्त नहीं मिल रहा हो, तो अभिजीत मुहूर्त आज के दौरान वह कार्य करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस समय भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और कार्य में सफलता मिलने की संभावना बहुत अधिक होती है।
किसी भी दिन का शुभ मुहूर्त निकालने के लिए पंचांग का विशेष ध्यान दिया जाता है। पंचांग के पांच मुख्य अंग होते है तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण इन पांचों तत्वों का विश्लेषण करके यह तय किया जाता है कि कौन-सा समय किसी विशेष कार्य के लिए शुभ रहेगा। इसके अलावा राहुकाल, यमगण्ड काल, भद्रा और अन्य अशुभ समयों को भी विशेष रूप से ध्यान दिया जाता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहों और नक्षत्रों की चाल का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है। यदि कोई भी ग्रह जब अनुकूल स्थिति में होते हैं, तो यह व्यक्ति को सकारात्मक और अच्छे परिणाम प्रदान करते हैं। वहीं अशुभ या कमज़ोर स्थिति में होते हैं तो प्रतिकूल परिणाम देते हैं। इसलिए शुभ मुहूर्त का चयन किया जाता है क्योंकि इस अवधि में सभी ग्रह मजबूत स्थिति में रहते हैं। इसके अलावा, शुभ समय व्यक्ति के मन में आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच भी पैदा करता है। जब कोई व्यक्ति शुभ समय में कार्य शुरू करता है, तो वह अधिक उत्साह और विश्वास के साथ आगे बढ़ता है, जिसका सकारात्मक असर उसके कार्यों पर भी दिखाई देता है।
यदि आप वर्ष 2026 में विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, अन्नप्राशन, या अन्य मांगलिक कार्यों की योजना बना रहे हैं, तो आगे इस लेख में आपको सभी प्रमुख शुभ मुहूर्तों और तिथियों की विस्तृत जानकारी मिलेगी।
जब भी कोई बड़ा या शुभ काम शुरू किया जाता है तो सबसे पहले शुभ मुहूर्त देखा जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर यह शुभ मुहूर्त निकाला कैसे जाता है? दरअसल, वैदिक ज्योतिष में शुभ मुहूर्त का निर्धारण पंचांग और ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर किया जाता है। ज्योतिषाचार्य कई महत्वपूर्ण पहलुओं का अध्ययन करने के बाद यह तय करते हैं कि कौन-सा समय किसी विशेष कार्य के लिए सबसे अधिक लाभकारी रहेगा।
सबसे पहले पंचांग के पांच प्रमुख अंगों तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का विश्लेषण किया जाता है। इन पांचों तत्वों का सही मेल किसी भी समय को शुभ या अशुभ बनाता है। यदि इनकी स्थिति अनुकूल हो, तो उस समय को शुभ मुहूर्त माना जाता है।
इसके अलावा सूर्य, चंद्रमा, गुरु और शुक्र जैसे शुभ ग्रहों की स्थिति और उनकी चाल पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। ग्रहों की अनुकूल स्थिति कार्य में सफलता, उन्नति और सकारात्मक परिणाम देने वाली मानी जाती है।
शुभ मुहूर्त तय करते समय लग्न कुंडली का भी अहम योगदान होता है। जिस समय कार्य शुरू किया जाना है, उस समय बनने वाली लग्न कुंडली को देखकर यह समझा जाता है कि कौन-सी राशि उदित हो रही है और ग्रह उस लग्न में किस प्रकार का प्रभाव दे रहे हैं।
साथ ही राहुकाल, यमगण्ड काल और भद्रा जैसे अशुभ समयों से बचना भी जरूरी माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन कालखंडों में नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए।
हिंदू पंचांग के अनुसार एक दिन और रात को मिलाकर कुल 30 मुहूर्त होते हैं। प्रत्येक मुहूर्त लगभग 48 मिनट का माना जाता है। इनमें कुछ मुहूर्त अत्यंत शुभ होते हैं, जबकि कुछ समय विशेष कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं होते हैं। यही कारण है कि किसी भी मांगलिक या महत्वपूर्ण कार्य से पहले शुभ मुहूर्त की जानकारी लेना लाभदायक माना जाता है।
ब्रह्म
अति शुभ
मित्र
वसु
वाराह
विश्वेदेवा
सतमुखी
वरुण
अहिर-बुध्न्य
पुष्य
अश्विनी
अग्नि
विधातृ
कण्ड
अदिति
विष्णु
द्युमद्गद्युति
समुद्रम
विधि: शुभ (केवल सोमवार और शुक्रवार को छोड़कर)
अर्यमा: शुभ (केवल रविवार को छोड़कर)
रूद्र
आहि
पितृ
पुरुहूत
वाहिनी
नक्तनकरा
भग
गिरीश
अजपाद
यम
शुभ मुहूर्त तय करते समय योग का बहुत अधिक ध्यान दिया जाता है। सूर्य और चंद्र की स्थिति के आधार पर 27 योगों का जिक्र किया गया है, जिनमें से 9 योग अशुभ और 18 योग शुभ होते हैं जिनके नाम इस प्रकार हैं।
शुभ योग: हर्षण, सिद्धि, वरीयान, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्म, ऐन्द्र, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, सुकर्मा, धृति, वृद्धि, ध्रुव।
अशुभ योग: शूल, गण्ड, व्याघात, विष्कुम्भ, अतिगण्ड, परिघ, वैधृति, वज्र, व्यतिपात
हिन्दू पंचांग के अनुसार, कोई भी विशिष्ट कार्य करने के लिए 'सर्वार्थ सिद्धि योग', 'अमृत सिद्धि योग', और 'अभिजीत मुहूर्त' सबसे उत्तम और शुभ माने जाते हैं।
यह एक शक्तिशाली समय होता है, जिसमें सभी ग्रह, नक्षत्र, तिथि, वार योग और करण जैसी पंचांग की स्थितियां अनुकूल होती है।
मंगलवार , जिसे मंगलवार, चौवाई या चौवाझचा के नाम से भी जाना जाता है, कुछ हिंदू समुदायों, विशेषकर दक्षिण भारत (केरल) में अशुभ माना जाता है।
अभिजीत मुहूर्त और शुभ मुहूर्त दोनों ही हिंदू ज्योतिष में शुभ समय को दर्शाते हैं।
शुभ मुहूर्त का समय हर दिन, तिथि, और स्थान के अनुसार अलग-अलग होता है।
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