| # | नाम | प्रकार | शुरू | समाप्त |
|---|---|---|---|---|
| 1 | रोग | अमंगल | 06:29:26 AM | 07:53:16 AM |
| 2 | उद्वेग | अशुभ | 07:53:16 AM | 09:17:07 AM |
| 3 | चर | सामान्य | 09:17:07 AM | 10:40:57 AM |
| 4 | लाभ | शुभ | 10:40:57 AM | 12:04:48 PM |
| 5 | अमृत | शुभ | 12:04:48 PM | 01:28:39 PM |
| 6 | काल | अमंगल | 01:28:39 PM | 02:52:29 PM |
| 7 | शुभ | शुभ | 02:52:29 PM | 04:16:20 PM |
| 8 | रोगअभी | अमंगल | 04:16:20 PM | 05:40:11 PM |
| # | नाम | प्रकार | शुरू | समाप्त |
|---|---|---|---|---|
| 1 | काल | अमंगल | 05:40:11 PM | 07:16:25 PM |
| 2 | लाभ | शुभ | 07:16:25 PM | 08:52:40 PM |
| 3 | उद्वेग | अशुभ | 08:52:40 PM | 10:28:54 PM |
| 4 | शुभ | शुभ | 10:28:54 PM | 12:05:09 AM |
| 5 | अमृत | शुभ | 12:05:09 AM | 01:41:23 AM |
| 6 | चर | सामान्य | 01:41:23 AM | 03:17:38 AM |
| 7 | रोग | अमंगल | 03:17:38 AM | 04:53:52 AM |
| 8 | काल | अमंगल | 04:53:52 AM | 06:30:06 AM |
आने वाले त्योहारों और व्रतों की तैयारी पहले से करें — तिथि, पक्ष और तारीख के साथ।
चौघड़िया सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर तय किया जाने वाला शुभ-अशुभ समय-विभाजन है, जिसकी मदद से आप अपने किसी भी मांगलिक कार्य की शुरुआत शुभ समय में कर सकते हैं। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को दिन का चौघड़िया कहा जाता है, जबकि सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय तक का समय रात का चौघड़िया कहलाता है। इसी वजह से इसे दिन रात का चौघड़िया भी कहा जाता है, क्योंकि पूरे दिन-रात को अलग-अलग भागों में बांटकर शुभ और अशुभ समय निकाला जाता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दिन और रात को 8-8 भागों में बांटा जाता है। हर भाग का अपना अलग प्रभाव व महत्व माना जाता है। इनमें अमृत, शुभ और लाभ चौघड़िया को अच्छा माना जाता है, जबकि रोग, काल और उद्वेग चौघड़िया में बड़े काम करने से बचने की सलाह दी जाती है।
मान्यता है कि आज का चौघड़िया देखकर यात्रा शुरू करना, नए काम की शुरुआत करना, घर पर पूजा-पाठ करना, व्यापार लेन-देन या कोई भी महत्वपूर्ण फैसले लेना अधिक शुभ माना जाता है। यही कारण है कि पंचांग में चौघड़िया को विशेष महत्व दिया गया है और लोग रोज़ का शुभ मुहूर्त जानने के लिए इसे देखते हैं।
वैदिक ज्योतिष में दिन और रात चौघड़िया को सात अलग-अलग मुहूर्तों में बांटा गया है। हर चौघड़िया मुहूर्त का अपना अलग प्रभाव और महत्व माना जाता है। कुछ मुहूर्त शुभ कामों के लिए अच्छे माने जाते हैं, तो कुछ मुहूर्तों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
7 चौघड़िया मुहूर्त कुछ इस प्रकार है :
उद्वेग चौघड़िया का संबंध सूर्य ग्रह से माना जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इस समय में सरकारी काम, प्रशासनिक कार्य या बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए। माना जाता है कि इस दौरान किए गए कामों में तनाव, देरी या मानसिक परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए यदि जरूरी न हो तो इस समय शुभ काम करने की मनाही होती है।
लाभ चौघड़िया बुध ग्रह से जुड़ा माना जाता है। यह समय व्यापार, लेन-देन, पढ़ाई और नई योजनाएँ बनाने के लिए अच्छा माना गया है। अगर किसी जरूरी काम में लाभ या सफलता चाहते हैं, तो इस चौघड़िया में काम की शुरुआत करना शुभ माना जाता है। कई लोग निवेश और बिजनेस मीटिंग के लिए भी इसी समय को बेहतर मानते हैं।
चर चौघड़िया के स्वामी शुक्र ग्रह माने जाते हैं। यह समय यात्रा शुरू करने, घूमने-फिरने, फैशन, सजावट और प्रेम से जुड़े कामों के लिए अच्छा माना जाता है। मान्यता है कि इस समय शुरू की गई यात्रा में बाधाएं कम आती हैं और काम आसानी से पूरे होते हैं।
रोग चौघड़िया मंगल ग्रह से प्रभावित माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस समय में लंबी यात्रा, बड़े फैसले या महत्वपूर्ण काम शुरू करने से बचना चाहिए। माना जाता है कि इस दौरान जल्दबाजी या लापरवाही नुकसान दे सकती है। इसलिए लोग इस चौघड़िया में शुभ कार्य टालने की कोशिश करते हैं।
शुभ चौघड़िया का संबंध गुरु ग्रह यानी बृहस्पति से माना गया है। यह समय विवाह, पूजा-पाठ, हवन, धार्मिक आयोजन और नए शुभ काम शुरू करने के लिए बेहद अच्छा माना जाता है। इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता और सकारात्मक परिणाम मिलने की मान्यता है।
काल चौघड़िया पर शनि ग्रह का प्रभाव माना जाता है। ज्योतिष में इस समय को शुभ कार्यों के लिए अच्छा नहीं माना गया है। खासकर यात्रा, निवेश, नया व्यापार शुरू करने या कोई बड़ा फैसला लेने से बचने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि इस समय शुरू किए गए कामों में रुकावटें आ सकती हैं।
अमृत चौघड़िया को सबसे अच्छा और शुभ समय माना जाता है। इस पर चंद्रमा का प्रभाव माना गया है। पूजा-पाठ, नई शुरुआत, दवा खरीदना, विशेष भोजन बनाना, धार्मिक पाठ शुरू करना या कोई महत्वपूर्ण काम करना इस समय शुभ माना जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार अमृत चौघड़िया में किए गए कामों में सफलता मिलने की संभावना बहुत अधिक होती है।
दैनिक चौघड़िया की गणना केवल समय के आधार पर नहीं होती, बल्कि इसमें वार और ग्रहों का भी विशेष प्रभाव माना जाता है। दिन का पहला चौघड़िया उस दिन के स्वामी ग्रह के अनुसार तय किया जाता है। उदाहरण के लिए, रविवार को सूर्य का, सोमवार को चंद्रमा का और मंगलवार को मंगल ग्रह का प्रभाव माना जाता है। यही कारण है कि हर दिन का चौघड़िया अलग होता है।
मान्यता है कि शुभ, लाभ और अमृत चौघड़ियों में किए गए कार्य अधिक अच्छे परिणाम देते हैं। वहीं काल, रोग और उद्वेग चौघड़िया में बड़े फैसले लेने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि जरूरी परिस्थितियों में सही चौघड़िया देखकर काम शुरू करना सामान्य मुहूर्त से भी लाभकारी माना गया है। आज के समय में भी कई लोग चौघड़िया देखकर अपने दिन की योजना बनाते हैं। यही वजह है कि पंचांग और ज्योतिष में चौघड़िया का महत्व आज भी बना हुआ है।
आज के दिन की अन्य जानकारी जैसे आज की तिथि, आज का वार, नक्षत्र , आज का होरा और आज के करण जानने के लिए आज का पंचांग देखे।
राहुकाल और चौघड़िया दोनों ही हिंदू पंचांग का हिस्सा हैं, लेकिन दोनों के उद्देश्य अलग हैं। राहुकाल को अशुभ समय माना जाता है। इसलिए ज्योतिष इस दौरान शुभ या मांगलिक कार्य न करने की सलाह देते हैं। वहीं, चौघड़िया दिन और रात के अलग-अलग समय को दर्शाता है। इसमें कुछ समय शुभ और कुछ समय अशुभ होता है। इसलिए किसी कार्य की शुरुआत करने से पहले चौघड़िया देखकर उपयुक्त समय चुना जाता है।
A: चौघड़िया हिंदू वैदिक पंचांग का एक प्रमुख हिस्सा है, जिसका उपयोग किसी भी नए कार्य को शुरू करने या यात्रा के लिए शुभ मुहूर्त देखने के लिए किया जाता है।
A: एक दिन और एक रात मिलाकर कुल 16 चौघड़िया होते हैं, जिनमें दिन के 8 और रात के 8 चौघड़िया शामिल होते हैं। 7 में से कोई एक मुहूर्त 2 बार आता है।
A: हिंदू पंचांग में अमृत, शुभ, लाभ और चर चौघड़िया को सबसे अधिक शुभ माना जाता है।
A: हिंदू पंचांग में ब्रह्म मुहूर्त को सभी दैनिक कार्यों, पूजा-पाठ और योग के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।