कितने प्रकार के होते हैं करण?
ज्योतिष शास्त्र में कुल 11 करण बताए गए हैं। इनमें बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि, शकुनि, चतुष्पाद, नाग और किंस्तुघ्न शामिल हैं। इनमें से 7 करण बार-बार आते हैं और इन्हें चर करण कहा जाता है। वहीं 4 करण विशेष माने जाते हैं, जिन्हें स्थिर करण कहा गया है। विष्टि करण को भद्रा भी कहा जाता है। मान्यता है कि भद्रा काल में शादी-विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों से बचना चाहिए। यही वजह है कि लोग पंचांग में आज का करण (Aaj Ke Karan) के साथ भद्रा का समय भी देखते हैं।
अलग-अलग करण का क्या प्रभाव माना जाता है?
- बव करण में जन्मे लोग धार्मिक और ईमानदार माने जाते हैं।
- बालव करण वाले जातक शिक्षा और धार्मिक कार्यों में रुचि रखते हैं।
- कौलव करण के लोग मिलनसार और सामाजिक स्वभाव के होते हैं।
- तैतिल करण में जन्मे लोग भाग्यशाली और रिश्तों को निभाने वाले माने जाते हैं।
- गर करण वाले मेहनती और अपने काम के प्रति समर्पित होते हैं।
- वणिज करण के जातक बुद्धिमान और व्यापार में कुशल माने जाते हैं।
- विष्टि यानी भद्रा करण को थोड़ा कठोर माना गया है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस करण में जन्मे लोग जिद्दी और जोखिम लेने वाले हो सकते हैं।
- शकुनि करण के लोग बुद्धिमान और समस्या सुलझाने में तेज माने जाते हैं।
- चतुष्पाद करण वाले जातक धार्मिक और पशु प्रेमी होते हैं।
- नाग करण को थोड़ा संघर्ष वाला माना गया है, जहां सफलता मेहनत से मिलती है।
- किंस्तुघ्न करण के लोग समाज सेवा और अच्छे कार्यों में आगे रहते हैं।
आज का करण क्यों देखे जाते हैं?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार करण व्यक्ति के निर्णय, काम और दिन की स्थिति को प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि लोग पूजा, यात्रा, निवेश या नए काम से पहले आज का करण जरूर देखते हैं। करण पंचांग का ऐसा हिस्सा है, जो व्यक्ति को सही समय और सही दिशा चुनने में मदद करता है।