आज का करण (Aaj Ke Karan)

New Delhi, Delhi, IndiaMonday, 8 June 2026
🌗
करण
बाव
तिथि: सप्तमी
☀️
सूर्योदय
11:52 pm
🌅
सूर्यास्त
01:47 pm
🌕
चंद्रोदय
07:17 pm
🌑
चंद्रास्त
06:38 am
तिथिसप्तमी
नक्षत्रशताभिशा तक 19:32
योगविष्कुंभा
करणबाव
पक्षकृष्ण
वारसोमवार
शक संवत1948 विश्वावसु
विक्रम संवत1948 विश्वावसु

कितने प्रकार के होते हैं करण?

ज्योतिष शास्त्र में कुल 11 करण बताए गए हैं। इनमें बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि, शकुनि, चतुष्पाद, नाग और किंस्तुघ्न शामिल हैं। इनमें से 7 करण बार-बार आते हैं और इन्हें चर करण कहा जाता है। वहीं 4 करण विशेष माने जाते हैं, जिन्हें स्थिर करण कहा गया है। विष्टि करण को भद्रा भी कहा जाता है। मान्यता है कि भद्रा काल में शादी-विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों से बचना चाहिए। यही वजह है कि लोग पंचांग में आज का करण Aaj Ke Karan के साथ भद्रा का समय भी देखते हैं।

अलग-अलग करण का क्या प्रभाव माना जाता है?

बव करण में जन्मे लोग धार्मिक और ईमानदार माने जाते हैं। 

बालव करण वाले जातक शिक्षा और धार्मिक कार्यों में रुचि रखते हैं। 

कौलव करण के लोग मिलनसार और सामाजिक स्वभाव के होते हैं। 

तैतिल करण में जन्मे लोग भाग्यशाली और रिश्तों को निभाने वाले माने जाते हैं। 

गर करण वाले मेहनती और अपने काम के प्रति समर्पित होते हैं। 

वणिज करण के जातक बुद्धिमान और व्यापार में कुशल माने जाते हैं।

विष्टि यानी भद्रा करण को थोड़ा कठोर माना गया है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस करण में जन्मे लोग जिद्दी और जोखिम लेने वाले हो सकते हैं। 

शकुनि करण के लोग बुद्धिमान और समस्या सुलझाने में तेज माने जाते हैं। 

चतुष्पाद करण वाले जातक धार्मिक और पशु प्रेमी होते हैं।

नाग करण को थोड़ा संघर्ष वाला माना गया है, जहां सफलता मेहनत से मिलती है। 

किंस्तुघ्न करण के लोग समाज सेवा और अच्छे कार्यों में आगे रहते हैं।

आज का करण Aaj Ke Karan क्यों देखे जाते हैं?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार करण व्यक्ति के निर्णय, काम और दिन की स्थिति को प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि लोग पूजा, यात्रा, निवेश या नए काम से पहले आज का करण Aaj Ke Karan जरूर देखते हैं। करण पंचांग का ऐसा हिस्सा है, जो व्यक्ति को सही समय और सही दिशा चुनने में मदद करता है।

वैदिक पंचांग में 'करण' को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। आसान भाषा में कहे तो एक तिथि के आधे हिस्से को करण कहा जाता है। जब चंद्रमा लगभग 6 अंश की दूरी पूरी करता है, तब एक करण समाप्त होता है। एक तिथि में कुल दो करण होते हैं, एक पहले भाग में और दूसरा बाद के भाग में। जो लोग रोज़ पंचांग देखते हैं, वे अक्सर आज का करण Aaj Ke Karan भी देखते हैं क्योंकि ज्योतिष में करण का संबंध व्यक्ति के काम, स्वभाव और दिन की ऊर्जा से माना गया है। कई लोग शुभ कार्य शुरू करने से पहले यह जरूर जानना चाहते हैं कि करण क्या है karan kya hai और कौन सा करण चल रहा है।

 

 

FAQs

प्रश्न1. करण क्या होता है?

पंचांग में एक तिथि के आधे भाग को करण कहा जाता है। एक तिथि में कुल दो करण होते हैं।

प्रश्न2. आज का करण क्यों देखे जाते हैं?

लोग शुभ समय जानने, पूजा, यात्रा, निवेश और नए कार्य शुरू करने से पहले आज का करण Aaj Ke Karan देखते हैं।

प्रश्न3. कुल कितने प्रकार के करण होते हैं?

ज्योतिष शास्त्र में कुल 11 करण बताए गए हैं।

प्रश्न4. भद्रा किस करण को कहा जाता है?

विष्टि करण को भद्रा कहा जाता है और इसमें शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है।

प्रश्न5. स्थिर और चर करण में क्या अंतर है?

जो करण बार-बार बदलते रहते हैं उन्हें चर करण कहा जाता है, जबकि विशेष और स्थायी प्रभाव वाले करण स्थिर करण कहलाते हैं।