असभ्य वाणी या गाली से ग्रह लाते हैं जीवन में दुष्प्रभाव, जानिए कैसे

Posted On - June 12, 2020 | Posted By - ShradhaTiwari

असभ्य वाणी या गाली से ग्रह लाते हैं जीवन में दुष्प्रभाव, जानिए कैसे

एक व्यक्ति को भले ही लोग भूल जाएं, पर उनकी कथित वाणी को लोग नहीं भूलते हैं। इसलिए, यह ध्यान रखना चाहिए कि जितना हो सके, कटु वाणी बोलने या असभ्य भाषा बोलने से बचना चाहिए। मधुर वाणी बोलने के पथ पर चलें। चाणक्य नीति कहती है-

तावन्मौनेन नीयन्ते कोकिलश्चैव वासराः । यावत्सर्वं जनानन्ददायिनी वाङ्न प्रवर्तते॥

अर्थात, कोयल तब तक मौन रहकर अपने दिनों को व्यतीत करती है, जब तक उसकी मीठी बोली फूट नहीं पड़ती है। उसकी मीठी वाणी से सभी आनंदमय हो जाते हैं। इसलिए जब भी बोलें, मीठा बोलें या फिर चुप रहें।

इन सबके बावजूद कभी ऐसी परिस्थितियां आती हैं, जब कटु वचन बोलने पड़ते हैं। लेकिन, कुछ लोग तब असभ्य भाषा का प्रयोग करते हैं। आजकल, कुछ लोगों को आम भाषा में भी गाली देने की गलत आदत है।

क्या आप जानते हैं कि इनका लेना-देना आपके ग्रहों से हैं?

कुंडली के दूसरे, तीसरे व आठवें खानों का संबंध भाव और बोलने से होता है। इन खानों में राहु और मंगल ग्रह का वास होना, आपके भाषा को असभ्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ता है। अगर हम गाली के आदत की बात करें, तो इसका पीछे शनि का प्रभाव पड़ना ही एकमात्र कारण होता है। अगर उन खानों में बुध ग्रह का असर हो, तो भी आपके मुख से कुछ गलत निकल सकता है। हालांकि, इस मामले में अभद्र भाषा के प्रयोग की संभावना कम होती है।

असभ्य बात या बुरे शब्द बोलने का नतीजा

  • यदि आप असभ्य भाषा बोलते हैं, तो आपको पैसे की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आपके पैसे जल्दी खर्च हो सकते हैं और आपको पैसों की कमी होने का भी डर होता है। यह स्थिति ऊपर-नीचे होते रहती है। कभी पैसा आता है, तो कभी पैसा जाता है।
  • जिस अंग का प्रयोग कर आप वातावरण को दूषित कर रहे हैं, उसी अंग में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इसका अर्थ यह है कि मुख और कंठ यानी गले से निकले अपशब्द से, वहां पर बीमारी पैदा होने का डर भी होता है। आप गले या मुंह के बीमारी के रोगी बन सकते हैं।
  • यदि आप गाली देने या कुछ भी असभ्य बोलते हैं, तो आपका बुध ग्रह अपनी ताकत खोने लगता है। इससे वह कमज़ोर हो जाता है। उसके कमज़ोर होने का अर्थ है, कि आपकी बुद्धि भी कमज़ोर हो रही है। यादाश्त पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए बुद्धि से जुड़े हुए दिक्कतों का भी सामना करना पड़ सकता है।
  • असभ्य चीज़ मात्र असभ्यता को ही आमंत्रित करती है। इसका अर्थ है कि यदि आप अपशब्द बोलते हैं, तो आप सभी परेशानियों को अपने जीवन में आमंत्रित कर रहे हैं। आपका जीवन पतन की ओर बढ़ने लगता है।

गाली देने की आदत को कैसे सुधारें?

  • प्रातः काल सूर्य को अर्घ्य दें और उंगलियों या रुद्राक्ष की माला से गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करें। सुबह – सुबह मन को शांति मिल जाती है। इससे संयम मिलता है और इंसान असभ्यता से दूर रहने लगता है। अन्यथा मन अशांत रहता है और हर चीज़ में आपको गुस्सा आने का भी डर रहता है।
  • पेट में जा रहे खाने और मन में उत्पन्न हो रहे विचारों का गहरा संबंध होता है। यदि आप शुद्ध खाना खाते हैं, तो आपके विचार भी वैसे ही उत्पन्न होते हैं। इससे आपके मुख पर निकलने वाली वाणी भी खाने के प्रकार शुद्ध होती है। इसके लिए या तो आप साध्विक भोजन का अनुसरण कर लीजिए, या फिर सुबह ब्रश करने के बाद तुलसी के दो पत्तों को खाने की आदत डाल लें। इससे आपका मन पवित्र रहता है और विचार भी पवित्र ही आते हैं।

आप गलत शब्दों का उपयोग कब करते हैं?

  • आप गलत शब्दों का उपयोग कब करते हैं? जब आपको अपने ऊपर या अपने मन से निकले विचारों के उपर काबू पाना नहीं आता है। इसलिए यदि आप, इन पर काबू पाने लगें, तो आपकी यह बुरी आदत जा सकती है। मन पर काबू पाने के तरीके को चन्द्र ग्रह नियंत्रित करता है। अगर आप दूध से बने पदार्थों जैसे पनीर, दही, क्रीम को खाने लगें, तो चद्रमा का प्रकोप बढ़ता है। इसका अर्थ होता है कि अब आपके मन की डोर आपके हाथों में हैं और आप अपशब्द बोलने से खुद को रोक सकते हैं।
  • अगर अपशब्द बोलने की आदत काफी बुरी है, तो सलाह लेकर लेब्राडोराइट का रत्न पहनने से लाभ मिलता है।
  • इसके साथ ही, आदत ज़्यादा बुरी होने पर, आप हरे रंग का कपड़ा ज़्यादा पहनें या फिर हरे रुमाल का ज़्यादा उपयोग करें। किसी भी तरह से हरे रंग के कपड़े को अपने से जोड़कर रखें, इससे आदत जल्दी समाप्त होने के आसार होते हैं।

यह भी पढ़ें- आपके स्वभाव की ये कमियां आपको आगे बढ़ने से रोकती हैं

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असभ्य वाणी या गाली से ग्रह लाते हैं जीवन में दुष्प्रभाव, जानिए कैसे

Posted On - June 12, 2020 | Posted By - ShradhaTiwari

असभ्य वाणी या गाली से ग्रह लाते हैं जीवन में दुष्प्रभाव, जानिए कैसे

एक व्यक्ति को भले ही लोग भूल जाएं, पर उनकी कथित वाणी को लोग नहीं भूलते हैं। इसलिए, यह ध्यान रखना चाहिए कि जितना हो सके, कटु वाणी बोलने या असभ्य भाषा बोलने से बचना चाहिए। मधुर वाणी बोलने के पथ पर चलें। चाणक्य नीति कहती है-

तावन्मौनेन नीयन्ते कोकिलश्चैव वासराः । यावत्सर्वं जनानन्ददायिनी वाङ्न प्रवर्तते॥

अर्थात, कोयल तब तक मौन रहकर अपने दिनों को व्यतीत करती है, जब तक उसकी मीठी बोली फूट नहीं पड़ती है। उसकी मीठी वाणी से सभी आनंदमय हो जाते हैं। इसलिए जब भी बोलें, मीठा बोलें या फिर चुप रहें।

इन सबके बावजूद कभी ऐसी परिस्थितियां आती हैं, जब कटु वचन बोलने पड़ते हैं। लेकिन, कुछ लोग तब असभ्य भाषा का प्रयोग करते हैं। आजकल, कुछ लोगों को आम भाषा में भी गाली देने की गलत आदत है।

क्या आप जानते हैं कि इनका लेना-देना आपके ग्रहों से हैं?

कुंडली के दूसरे, तीसरे व आठवें खानों का संबंध भाव और बोलने से होता है। इन खानों में राहु और मंगल ग्रह का वास होना, आपके भाषा को असभ्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ता है। अगर हम गाली के आदत की बात करें, तो इसका पीछे शनि का प्रभाव पड़ना ही एकमात्र कारण होता है। अगर उन खानों में बुध ग्रह का असर हो, तो भी आपके मुख से कुछ गलत निकल सकता है। हालांकि, इस मामले में अभद्र भाषा के प्रयोग की संभावना कम होती है।

असभ्य बात या बुरे शब्द बोलने का नतीजा

  • यदि आप असभ्य भाषा बोलते हैं, तो आपको पैसे की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आपके पैसे जल्दी खर्च हो सकते हैं और आपको पैसों की कमी होने का भी डर होता है। यह स्थिति ऊपर-नीचे होते रहती है। कभी पैसा आता है, तो कभी पैसा जाता है।
  • जिस अंग का प्रयोग कर आप वातावरण को दूषित कर रहे हैं, उसी अंग में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इसका अर्थ यह है कि मुख और कंठ यानी गले से निकले अपशब्द से, वहां पर बीमारी पैदा होने का डर भी होता है। आप गले या मुंह के बीमारी के रोगी बन सकते हैं।
  • यदि आप गाली देने या कुछ भी असभ्य बोलते हैं, तो आपका बुध ग्रह अपनी ताकत खोने लगता है। इससे वह कमज़ोर हो जाता है। उसके कमज़ोर होने का अर्थ है, कि आपकी बुद्धि भी कमज़ोर हो रही है। यादाश्त पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए बुद्धि से जुड़े हुए दिक्कतों का भी सामना करना पड़ सकता है।
  • असभ्य चीज़ मात्र असभ्यता को ही आमंत्रित करती है। इसका अर्थ है कि यदि आप अपशब्द बोलते हैं, तो आप सभी परेशानियों को अपने जीवन में आमंत्रित कर रहे हैं। आपका जीवन पतन की ओर बढ़ने लगता है।

गाली देने की आदत को कैसे सुधारें?

  • प्रातः काल सूर्य को अर्घ्य दें और उंगलियों या रुद्राक्ष की माला से गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करें। सुबह – सुबह मन को शांति मिल जाती है। इससे संयम मिलता है और इंसान असभ्यता से दूर रहने लगता है। अन्यथा मन अशांत रहता है और हर चीज़ में आपको गुस्सा आने का भी डर रहता है।
  • पेट में जा रहे खाने और मन में उत्पन्न हो रहे विचारों का गहरा संबंध होता है। यदि आप शुद्ध खाना खाते हैं, तो आपके विचार भी वैसे ही उत्पन्न होते हैं। इससे आपके मुख पर निकलने वाली वाणी भी खाने के प्रकार शुद्ध होती है। इसके लिए या तो आप साध्विक भोजन का अनुसरण कर लीजिए, या फिर सुबह ब्रश करने के बाद तुलसी के दो पत्तों को खाने की आदत डाल लें। इससे आपका मन पवित्र रहता है और विचार भी पवित्र ही आते हैं।

आप गलत शब्दों का उपयोग कब करते हैं?

  • आप गलत शब्दों का उपयोग कब करते हैं? जब आपको अपने ऊपर या अपने मन से निकले विचारों के उपर काबू पाना नहीं आता है। इसलिए यदि आप, इन पर काबू पाने लगें, तो आपकी यह बुरी आदत जा सकती है। मन पर काबू पाने के तरीके को चन्द्र ग्रह नियंत्रित करता है। अगर आप दूध से बने पदार्थों जैसे पनीर, दही, क्रीम को खाने लगें, तो चद्रमा का प्रकोप बढ़ता है। इसका अर्थ होता है कि अब आपके मन की डोर आपके हाथों में हैं और आप अपशब्द बोलने से खुद को रोक सकते हैं।
  • अगर अपशब्द बोलने की आदत काफी बुरी है, तो सलाह लेकर लेब्राडोराइट का रत्न पहनने से लाभ मिलता है।
  • इसके साथ ही, आदत ज़्यादा बुरी होने पर, आप हरे रंग का कपड़ा ज़्यादा पहनें या फिर हरे रुमाल का ज़्यादा उपयोग करें। किसी भी तरह से हरे रंग के कपड़े को अपने से जोड़कर रखें, इससे आदत जल्दी समाप्त होने के आसार होते हैं।

यह भी पढ़ें- आपके स्वभाव की ये कमियां आपको आगे बढ़ने से रोकती हैं

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