Vish yog: जाने क्या होता है विष योग, इसके नुकसान और फायदे

Posted On - December 30, 2021 | Posted By - Jyoti | Read By -

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विष योग

Vish yog – ज्योतिष शास्त्र में आपकी कुंडली का बहुत अधिक महत्व होता है। क्योंकि आपकी कुंडली के आधार पर ही बनने वाले योग के बारे में भविष्यवाणी की जाती है। आपको बता दें कि आपकी कुंडली के माध्यम से ही विवाह आदि योग की गणना की जाती है। इसीलिए ज्योतिष शास्त्र में आपकी कुंडली में बनने वाले योग काफी महत्वपूर्ण होते हैं। साथ ही कुछ ऐसे भी योग होते हैं, जिनके बनने से आप अपने जीवन में काफी तरक्की करते हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी योग होते हैं, जिनके बनने से आप पर परेशानियों का पहाड़ टूट सकता है। उनमें से एक योग है विष योग।

आज हम आपको बताएंगे कि अगर आपकी कुंडली में विष योग बनता है, तो आपको किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही हम आपको यह भी बताएंगे कि विष योग के क्या फायदे होते हैं। और यह योग आपके जीवन को किस तरीके से प्रभावित कर सकता है। इसके लिए आपको हमारा यह लेख पूरा पढ़ना होगा, जिसमें आपको इस योग से जुड़ी सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी। साथ ही आपको अधिक जानकारी के लिए किसी अनुभवी ज्योतिषी से सलाह लेनी चाहिए।

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विष योग क्या होता है?

विष योग एक अशुभ योग होता है, जो जातक के जीवन में कई तरह की परेशानियां लेकर आता है। साथ ही यह योग चंद्रमा और शनि की युति के कारण बनता है। यह योग जिस भी जातक की कुंडली में बनता है, उस जातक को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

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 विष योग कब बनता है?

  • जब किसी जातक की कुंडली में चंद्रमा और शनि एक साथ आ जाते हैं, तब विष योग बनता है।
  • जब शनि और चंद्रमा आपस में अंतर्दशा से चल रहे होते हैं, तब इस योग का दुष्प्रभाव अधिक बढ़ जाता है।
  • इस योग के कारण जातक अपने जीवन में कई परेशानियों का सामना करते है।
  • यह योग जातक की जिस भी भाव में होता है, उसे उसी भाव में अशुभ फल प्राप्त होने लगते हैं।

इस योग का प्रभाव 

  • यह योग लग्न स्थान पर बनता है, तो व्यक्ति को दांपत्य जीवन में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • शनि और चंद्रमा किसी जातक के दूसरे भाव पर युति करते हैं, तो उस जातक को जीवन भर आर्थिक स्थिति से जूझते रहना पड़ता है।
  • यह योग तीसरे भाव में बनता है, तो यह भाई बहन के रिश्ते में कड़वाहट लेकर आता है।
  • चौथे भाव में योग बनने से व्यक्ति के जीवन में खुशहाली नहीं रहती।
  • अगर यह योग पांचवे भाव में बनता है, तो व्यक्ति को संतान सुख प्राप्त नहीं होता है।
  • छठे भाव में यह योग बनने से व्यक्ति कर्जदार हो सकता है। साथ ही जातक के कई शत्रु भी उत्पन्न हो सकते हैं।
  • चंद्रमा और शनि की युति अगर सातवें भाव पर होती है, तो पति पत्नी के रिश्ते में कड़वाहट आ सकती है। और बात तलाक तक भी पहुंच सकती है।
  •  यह योग आठवें भाव में बनता है, तो दुर्घटनाएं अधिक होने की संभावना होती है।
  • अगर किसी व्यक्ति के नोवें भाव में यह योग बनता है, तो व्यक्ति नास्तिक बन जाता है।
  • दसवें भाव में इस योग के बनने से व्यक्ति के मान प्रतिष्ठा में कमी आ सकती है। साथ ही जातक का पिता के साथ तनाव हो सकता है।
  • ग्यारहवें भाव में चंद्रमा और शनि की युति होने से जातक के जीवन में दुर्घटनाएं अधिक होती हैं। साथ ही आय में भी कमी आती है।
  • बारहवें भाव में यह योग बनने से जातक धन अधिक खर्च करने लगता है।

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इस योग के नुकसान

  • विष योग का असर जातक के मन और मस्तिष्क पर पड़ता है।
  • इस योग के कारण जातक को तनाव, बेचैनी, चिंता आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
  • वहीं इस योग के कारण व्यक्ति को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का भी सामना करना होता है।
  • शिक्षा और कैरियर के क्षेत्र में काफी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है।
  • इस योग के कारण जातक के आत्मविश्वास में कमी आती है। वह अपने जीवन में आगे बढ़ने के बारे में सोचना बंद कर देता है।
  • अगर आपकी कुंडली में यह योग बनता है, तो आप अपने व्यवहारिक रिश्ते में भी परेशानियों का सामना करते है। 
  • यह आपके प्रेम संबंध तथा बच्चों के साथ और भाई बहनों के साथ संबंध को प्रभावित कर सकता है।
  • इतना ही नहीं यह योग आपके माता के स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव डालता है।

इस योग के फायदे

  • जहां एक तरफ इस योग के कई नुकसान हैं, वहीं दूसरी तरफ इसके कुछ फायदे भी होते हैं।
  • इस योग के आपकी कुंडली में बनने के बाद आप ध्यान लगाकर अपना सारा कार्य करते हैं।
  • वहीं इस योग के कारण जातक बाकी लोगों के प्रति दयालु भाव रखता है।
  • इस योग के कुंडली में बनने के बाद जातक अकेले रहना ज्यादा पसंद करते हैं।
  • वहीं वह अकेले काफी खुश भी रहते हैं।
  • साथ ही जातक के पास जो भी मौजूद होता है, वह उस में खुश रहना सीख जाते हैं।

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उपाय 

  • अगर आप भी इसी योग से गुजर रहे हैं, तो आपको प्रतिदिन शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए।
  • साथ ही आपको हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।
  • इस योग के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए सोमवार और शनिवार शनिदेव की पूजा करें।
  • आप इस योग के निवारण के लिए पूजा भी करवा सकते हैं, जो आपके और आपके परिवार के रिश्तो को मजबूत बनाएगी।
  • इस योग के निवारण के लिए आपको महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करना चाहिए।

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