कजरी तीज 2020- तिथि और शुभ मुहूर्त

कजरी तीज 2020- तिथि और शुभ मुहूर्त

कजरी तीज 2020- तिथि और शुभ मुहूर्त

कजरी तीज को कजली तीज के नाम से भी जाना जाता है जो कि सावन के तीसरे दिन कृष्ण पक्ष में आती है। यह पूरे उत्तर भारत में बहुत खुशी के साथ मनाया जाता है। हिंदू विवाहित महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी उम्र के लिए उपवास रखती हैं। यह त्यौहार जुलाई या अगस्त के महीने में मनाया जाता है। आम तौर पर,यह त्यौहार रक्षा बंधन के 3 दिन बाद होता है। आइये कजरी तीज 2020 की तारीख और मुहूर्त पर एक नजर डालते हैं।

भाद्रपद का महीना वह समय होता है जब महिलाएं इस दिन इकट्ठा होती हैं और कजरी तीज मानती हैं। इस दिन विवाहित महिलाओं द्वारा देवी पार्वती की पूजा नीम के साथ की जाती है। इस दिन भगवान कृष्ण को भी पूजा जाता है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजघराने की महिलाओं के बीच इसकी काफी प्रासंगिकता है।

कजली तीज का महत्व

कजली तीज के अन्य नाम बूंदी तीज और सातुड़ी तीज हैं। मूल रूप से, यह हरियाली तीज के बाद होता है, जो कि छोटी तीज है और यह कजरी तीज को बड़ी तीज कहा जाता है। सुखी वैवाहिक जीवन के लिए महिलाएँ इस शुभ दिन का व्रत रखती हैं। यह पूजा उन्हें पति के लंबे जीवन के का आशीर्वाद प्राप्त करवाती है। यह त्यौहार दो प्रेमियों की एकता को भी दर्शाता है। इसके अलावा, यह मानसून के आगमन और कठोर गर्मी के लिए विदाई की घोषणा भी करता है।

कजरी तीज पूजा और उत्सव

हर क्षेत्र में इस दिन को मानाने का अपना तरीका है। लोग विभिन्न प्रकार के पूजा-अनुष्ठान करते है। लेकिन कुछ सामान्य अनुष्ठान किए जाते हैं जो की इस प्रकार हैं-

  • विवाहित महिलाएं समृद्ध वैवाहिक जीवन के लिए उपवास रखती हैं। हालाँकि, कुछ मामलों में, अविवाहित लड़कियाँ भी अच्छा पति पाने के लिए व्रत रखती हैं।
  • इसके अलावा, सत्तू से व्यंजन बनाए जाते हैं जिसमें गेहूं चना चावल और जौ शामिल होते हैं।
  • भक्त भगवान शिव और पार्वती की बहुत समर्पण के साथ पूजा करते हैं।
  • देवी नीमड़ी की पूजा करने के बाद, चंद्रमा को जल अर्पित करके भी यह त्यौहार मनाया जाता है।
  • महिलाएं अपने घरों को सजाती हैं और नृत्य करती हैं और क्षेत्रीय लोक संगीत की धुनों पर गाती हैं।

देश भर में उत्सव

राजस्थान, बूंदी में, कजरी तीज सबसे प्रसिद्ध है। इस दिन यहाँ एक जुलूस निकलता है जहाँ तीज देवी को सजाया जाता है और ले जाया जाता है। परेड में ऊंट, हाथी और लोक नर्तक होते हैं। यह सब एक विशेष कार्यक्रम होता है जिसमें दुनिया के विभिन्न हिस्सों से लोग आते हैं।

जबकि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में झूला झूलते हैं और ताजे खेतों में नृत्य करते हैं। मध्य भारत में, लोग बहुत धूमधाम से दिन मनाते हैं।

कजरी तीज 2020 पर स्वादिष्ट प्रसाद

हालांकि इस दिन महिलाएं उपवास रखती हैं, फिर भी स्वादिष्ट भोजन परिवार और देवी तीज के लिए तैयार किया जाता है।

  • मिठाई- खीर, काजू कतली, बादाम का हलवा, घेवर और सत्तू आदि।
  • स्नैक्स- पुरी, कचौरी और मूंग दाल समोसा।
  • ड्रिंक्स- सत्तू ड्रिंक और छाछ।

कजरी तीज की कथा

भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार, कजरी मध्य भारत में एक घना जंगल था जो कि दादुरई के अधीन था। राजा को वह जंगल अत्यंत पसंद था और वह इसकी सराहना में गीत गया करता था। राजा की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी सती हो गयी, इस खबर से शिष्य परेशान हो गए। अपने पति के प्रति पत्नी के सच्चे समर्पण के कारण कजरी तीज का आरम्भ हुआ।

इसके अलावा, भगवान शिव के लिए देवी पार्वती के 108 साल के उपवास की एक और कहानी है। देवी पार्वती ने भगवान शिव के साथ वैवाहिक आनंद के लिए उपवास किया था। हालाँकि, भगवान शिव को संदेह हो गया था, लेकिन अपनी पत्नी के कठोर कृत्य के बाद वह गुफा में चले गए ताकि वह समान हो सके। उनका पवित्र मिलन भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष को हुआ था। इसलिए इस दिन को अब कजरी तीज के रूप में पहचाना जाता है।

कजरी तीज 2020 तिथि और मुहूर्त

हमारे ज्योतिषियों के अनुसार कजरी तीज 2020 का आदर्श दिन और समय हैं:

  • 5 अगस्त, 2020 को 22:52:22 पर तृतीया तिथि शुरू होती है
  • तृतीया तिथि 7 अगस्त, 2020 को 00:16:54 को समाप्त हुई

कजरी तीज के अगले चार वर्षों की तारीखें:

दिन दिनांक वर्ष
बुधवार 5 अगस्त 2020
बुधवार 25 अगस्त 2021
रविवार 14 अगस्त 2022
शनिवार 2 सितंबर 2023
गुरुवार 22 अगस्त 2024

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