वास्तु शास्त्र में ईशान कोण का महत्व

वास्तु शास्त्र में ईशान कोण का महत्व

ईशान

आपके घर का उत्तर – पूर्व कोण ज्योतिष भाषा में ईशान कोण के नाम से जाना जाता हैं। यह वह कोण होता हैं, जहाँ ईश्वर का वास होता हैं। तथा यह ईशान कोण आपके घर और ऑफिस के किस कोण में हो यह जानना बहुत जरुरी होता हैं, क्योंकि:-

  • सही कोने में ईशान कोण होने से घर की सुख – समृद्धि बनी रहती हैं।
  • वास्तु पुरुष का सिर ईशान कोण की तरफ होता हैं। जो कि संपूर्ण घर को वास्तु सम्मत करता हैं।
  • ईशान कोण सही जगह पर हो उससे घर के मुखिया एवं परिवार की सोच को सही दिशा मिलती हैं।

ईशान कोण- इन उपायों से मिलेगा शुभ फल

  • बच्चे इस दिशा की और देख कर पढ़ाई करें, इस से उन्हें लाभ होगा।
  •  नव वर-वधू को इस स्थान पर बने कमरे में कभी भी नहीं सोना चाहिए क्यों कि इस से वैवाहिक जीवन में बाधा पड़ती है तथा तलाक़ होने के खतरे बढ़ जाते हैं।  
  •  गृहणियों को यहाँ पर गैस के नीचे पीले रंग का संगमरमर का पत्थर रखना चाहिए।  
  • इस स्थान पर हमेशा छोटा सा मंदिर बनाएं। 
  • यहाँ कभी भी सीढ़ी, स्टोर या शौचालय न बनायें। इस से मस्तिष्क से सम्बंधित बीमारी होने की सम्भावना हो सकती है जैसे कि पैरालिसिस।
  • इस दिशा जोन  में लाल, गुलाबी  और बैंगनी रंगो का दीवारों पर इस्तेमाल न करें। इस रंग की वस्तुएं भी यहाँ से हटा कर दक्षिण पूर्व दिशा जोन में रख दें।  यहाँ पर ज़्यादा करके बिजली के उपकरण  भी न रखें।  इस दिशा जोन में हलके क्रीम कलर या नीले रंग का इस्तेमाल करें।  

वास्तु शास्त्र से पूजा घर का निर्माण 

ईशान कोण में देवस्थान का निर्माण कराना शुभ माना जाता है। हर घर में पूजा का घर होता हैं लेकिन क्या आपको पता है कि पूजा घर किस स्थान पर होना शुभ माना जाता है वास्तुशास्त्र के अनुसार ईशान कोण में देवस्थान का होना अति शुभ होता है जाने इसके क्या – क्या लाभ आप को मिल सकते है। जो वास्तु के अनुसार बने घर में हमें सुख, समृद्धि एवं मनचाहे धन की प्राप्ति होती है। इसीलिए आजकल लोग वास्तु शास्त्र के अनुसार घर बनवाना ज्यादा पसंद करते हैं।

– वास्तु के अनुसार निर्माण

  • पूजा घर में रखी मूर्तियों का मुख उत्तर या दक्षिण दिशा में नहीं होना चाहिए।
  • घर के पूर्व या पश्चिम दिशा में देवताओं की मूर्तियां होनी चाहिए।
  • पूजा घर ऐसा बनाए की कभी भी  देवताओं की दृष्टि एक – दूसरे पर नहीं पड़नी चाहिए।
  • पूजा घर के खिड़की व दरवाजे पश्चिम दिशा में न होकर उत्तर या पूर्व दिशा में होने चाहिए। जिससे सूर्य की किरण मंदिर में आते रहने चाहिए।
  • ईशान कोण कि अनुशार  पूजा घर के दरवाजे के सामने देवता की मूर्ति रखनी चाहिए।
  • पूजा घर में बनाया गया दरवाजा लकड़ी का नहीं होना चाहिए।
  • ईशान कोण के अनुसार जिस जगह भगवान का वास रहता है, उस दिशा में कभी भी  शौचालय, स्टोर इत्यादि नहीं बनाए जाने चाहिए। पूजा घर के ऊपर या नीचे  कभी भी शौचालय नहीं बनाना चाहिए।
  • ईशान कोण  के अनुसार बेडरूम में पूजा घर नहीं बनाना चाहिए।
  • पूजा घर के लिए प्राय: हल्के पीले रंग को शुभ माना जाता है, अतः दीवारों पर हल्का पीला रंग किया जाना वास्तु के अनुशार शुभ होता है>
  • ईशान कोण के अनुशार फर्श हल्के पीले या सफेद रंग के पत्थर का होना चाहिए। इन कुछ छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर पूजा घर बनाया जाना चाहिए। जो हमें सुख-समृ‍द्धि के साथ-साथ हमारे जीवन को खुशहाल और हमें हर तरह से संपन्न बनाते है।

ईशान कोण में न रखने वाले सामान

  • कोई नुकीली चीज तथा झाडू ईशान कोण में भी नहीं रखना चाहिए वरना धन हानि होती है।
  • घर या ऑफिस के इस हिस्से में बैठक व्यवस्था नहीं होनी चाहिए।
  • इस स्थान पर कूड़ा-कचरा नहीं होना चाहिए। ऐसा होने पर नौकरी-पेशे में रूकावट आती है।
  • ईशान कोण में स्टोररुम और टॉयलेट नहीं होना चाहिए। इससे कार्यों में रूकावट आती है।
  • किचन और बेडरुम इस दिशा में होने से वास्तुदोष बनता है।
  • लोहे का कोई भारी भी इस दिशा में नहीं होना चाहिए। सिंक या वॉशबेसिन भी इस दिशा में नहीं होनी चाहिए।

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