Diwali 2026: शाम में ही क्यों होती है दिवाली की पूजा, जानिए लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त

laxmi puja

Diwali 2026: दिवाली भारत के प्रमुख बड़े त्योहारों में से एक है। प्रकाश का पर्व दिवाली को अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के तौर पर मनाया जाता है। दिवाली के त्योहार में देश की संस्कृति, सामाजिकता और सौहार्द नजर आता है। दिवाली मनाने के पीछे कई तरह की मान्यताएं हैं, जिनमें सबसे प्रमुख है भगवान श्रीराम का 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या आगमन। मान्यता हैं कि, जब भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे तब अयोध्या वासियों ने सजावट की थी और पूरे अयोध्या को दीपों से रौशन किया था, तब से इसे उत्सव की तरह मनाने की परंपरा की शुरुआत हुई।

हालांकि दीपावली मनाने के पीछे अन्य कई मान्यताएं भी हैं, दक्षिण भारत में इसे भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर का वध करने की खुशी में मनाया जाता है। जैन धर्म में इस दिन को महावीर स्वामी के निर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है। साथ ही इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा करने की भी विशेष परंपरा है। इसके पीछे प्रमुख धार्मिक व पौराणिक मान्यता यह है कि कार्तिक अमावस्या के दिन समुद्र मंथन से देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिवाली पर लक्ष्मी पूजन शाम को प्रदोष काल में ही क्यों किया जाता है? आइए जानते हैं इसके पीछे क्या रहस्य है।

दिवाली 2026 में कब है?

पंचांग के अनुसार दिवाली का त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर मनाया जाता है। इस साल दिवाली का उत्सव रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। 

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त- प्रदोष काल में मां लक्ष्मी की पूजा के लिए शाम 05:31 बजे से रात 08:09 बजे तक रहेगा।

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दिवाली की पूजा आखिर शाम में क्यों होती है?

दिवाली पर हर हिंदू परिवार में लक्ष्मी मां की पूजा की जाती है। कारोबारी भी इस दिन अपनी दुकान या ऑफिस में मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। लेकिन यह पूजा आमतौर पर प्रदोष काल और वृषभ लग्न में की जाती है। दिवाली की पूजा शाम या रात के समय करने के पीछे कुछ मान्यताएं हैं, जो इस प्रकार हैं-   

समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी का प्रकट होना

पौराणिक कथाओं में ऐसा वर्णन मिलता है कि, अमृत के लिए देवताओं और असुरों द्वारा समुद्र मंथन की गई थी, जिसमें 14 बहुमूल्य रत्न प्राप्त हुए थे। मां लक्ष्मी भी कार्तिक अमावस्या पर रात के समय समुद्र मंथन के दौरान क्षीर सागर से प्रकट हुई थीं। रात के समय मां लक्ष्मी के आगमन के कारण पूजा के लिए इस समय को सबसे शुभ माना जाता है।

मां लक्ष्मी का भ्रमण काल

धार्मिक मान्यता है कि मां लक्ष्मी रात के समय पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जिन घरों में स्वच्छता, शुद्धता और रौशनी होती हैं, वहां वास करती हैं। इसलिए दिवाली में घर की साफ-सफाई की जाती है, रंगोली बनाई जाती है, द्वार पर तोरण लगाए जाते हैं, फूल-मालाओं से सजावट की जाती है और दीप जलाए जाते हैं।

अंधकार पर प्रकाश का प्रतीक

कार्तिक अमावस्या की रात काली रात होती है, जिसमें चारों ओर घना अंधेरा छाया होता है। ऐसे में अमावस की रात जब दीप जलाए जाते हैं और मां लक्ष्मी की पूजा कर उनका स्वागत किया जाता है, तो इससे जीवन से अज्ञान का अंधेरा और दरिद्रता दूर होती है।

प्रदोष काल का महत्व

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सूर्यास्त के बाद के समय को प्रदोष काल कहा जाता है। यह ऐसा समय होता है जब नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। इसलिए प्रदोष काल और स्थिर लग्न (वृषभ काल) में मां लक्ष्मी की पूजा करना अक्षय फलदायी माना जाता है।

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Posted On - November 4, 2026 | Posted By - Astrotalk Team | Read By -

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