महीने की शुरुआत होते ही हर किसी के मन में यह सवाल जरूर उठता होगा कि अमावस्या कब है amavas kab ki hai या अमावस कितनी तारीख की है। हिंदू पंचांग में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। यह केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि इस दिन पूजा-पाठ, दान पुण्य व पितरो का तर्पण करने का विशेष दिन है। इस दिन श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा-पाठ करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या पर किए गए शुभ कार्यों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि आती है। इस तिथि पर चंद्रमा आकाश में दिखाई नहीं देता, इसलिए इसे अंधकार की रात भी कहा जाता है। हालांकि आध्यात्मिक दृष्टि से यह नई शुरुआत और आत्मशुद्धि का प्रतीक मानी जाती है।
हिन्दू कैलेंडर में जिस तिथि पर चंद्रमा अदृश्य होता है यानी दिखना बंद हो जाता है, उस दिन को अमावस्या कहा जाता है। कई जगहों पर इसे अमावस या मावस भी कहा जाता है। अमावस्या कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि होती है। इस दिन रात्रि में आकाश में चांद दिखाई नहीं देता। यही कारण है कि अमावस्या की रात को सबसे अंधेरी रात माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इस तिथि का संबंध विशेष रूप से पितरों, साधना और दान-पुण्य से जोड़ा गया है। आइए अब जानते हैं 2026 में अमावस कितनी तारीख की है mavas kab ki hai।
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तिथि |
दिन |
अमावस्या का नाम |
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18 जनवरी 2026 |
रविवार |
माघ अमावस्या (मौनी अमावस्या) |
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17 फरवरी 2026 |
मंगलवार |
फाल्गुन अमावस्या |
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18 मार्च 2026 |
बुधवार |
चैत्र अमावस्या |
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16 अप्रैल 2026 |
शुक्रवार |
वैशाख अमावस्या |
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16 मई 2026 |
शनिवार |
ज्येष्ठ अमावस्या (वट सावित्री/ निर्जला अमावस्या) |
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14 जून 2026 |
रविवार |
ज्येष्ठ अमावस्या (अधिक दर्श अमावस्या) |
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14 जुलाई 2026 |
मंगलवार |
आषाढ़ अमावस्या |
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12 अगस्त 2026 |
बुधवार |
श्रावण अमावस्या |
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10 सितंबर 2026 |
गुरुवार |
भाद्रपद अमावस्या |
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10 अक्टूबर 2026 |
शनिवार |
अश्विनी अमावस्या |
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09 नवंबर 2026 |
सोमवार |
कार्तिक अमावस्या |
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08 दिसंबर 2026 |
मंगलवार |
मार्गशीर्ष अमावस्या |
हिन्दू पंचांग के अनुसार, एक महीने को दो पक्षों में बांटा जाता है- शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। शुक्ल पक्ष में चंद्रमा धीरे-धीरे बढ़ता है और पूर्णिमा के दिन अपने पूर्ण स्वरूप में चमकता हुआ दिखाई देता है। इसके बाद कृष्ण पक्ष की शुरुआत होती है, जिसमें चंद्रमा हर रोज़ आकार में छोटा होता चला जाता है। अंत में एक ऐसी स्थिति आती है जब चंद्रमा पूरी तरह गायब यानी अदृश्य हो जाता है। यही दिन अमावस्या कहलाती है। इस तरह से अमावस्या चंद्र चक्र का अंतिम चरण मानी जाती है, जिसके बाद फिर से शुक्ल पक्ष शुरू होता है।
चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर लगातार परिक्रमा करता है। इसी कारण उसकी कलाओं में परिवर्तन होता रहता है। लगभग 29.5 दिनों के चक्र में एक बार पूर्णिमा और एक बार अमावस्या आती है। यही कारण है कि हर महीने एक अमावस्या तिथि आती और एक पूर्णिमा तिथि आती है। हालांकि प्रत्येक महीने की अमावस्या का महत्व अलग-अलग माना गया है। कुछ अमावस्या को बेहद शुभ माना जाता है। जैसे- मौनी अमावस्या, सोमवती अमावस्या, शनि अमावस्या और महालय अमावस्या आदि।
हिंदू पंचांग में माघ मास में आने वाली अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है यह बेहद शुभ होती है। इस दिन कई लोग मौन व्रत धारण करते हैं और पूजा व ध्यान में मन लगाते हैं। मान्यता है कि इस दिन मौन रहने से मन की शांति मिलती है, ऊर्जा का संरक्षण होता है और आत्म-शुद्धि होती है।
जो अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। सनातन धर्म में इस दिन को अखंड सौभाग्य, संतान सुख और पितरों की शांति के लिए बहुत पुण्यदायी माना गया है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, दान-पुण्य करने और विशेषरूप से पीपल के वृक्ष की पूजा करने का विशेष विधान है।
शनिवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को शनि अमावस्या कहा जाता है। इस दिन शनि देव की पूजा और दान करने का विशेष महत्व होता है। शनि दोष व महादशा से बचने के लिए लोग इस दिन विशेष विधान करते हैं। इसे शनैश्चरी अमावस्या भी कहा जाता है।
हिंदू धर्म में महालय अमावस्या का बहुत अधिक महत्व बताया गया है। इसे । सर्वपितृ अमावस्या भी कहा जाता है। यह पितृ पक्ष का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। दरअसल इस दिन पितरों को विदाई दी जाती है और पूरे विधि-विधान के साथ तर्पण या श्राद्ध किया जाता है। ऐसा करने से सुख-शांति की प्राप्ति होती है। यह अमावस्या पितरों को समर्पित सबसे महत्वपूर्ण अमावस्या होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या का संबंध पितरों से होता है। इसलिए इस दिन पितरों का तर्पण और श्राद्ध करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि अमावस्या के दिन पितरों का स्मरण करने, जल अर्पित करने और संत, ब्राह्मण व जरूरतमंदों को दान-पुण्य करने से पितर प्रसन्न होते हैं और अपना आशीर्वाद देते है। कई लोग मानते हैं कि ऐसा करने से रुके हुए काम बनने लगते हैं। पितरों के आशीर्वाद से परिवार में सुख, शांति और उन्नति बनी रहती है। यही कारण है कि बहुत से लोग इस दिन अपने पूर्वजों के नाम से भोजन, वस्त्र और अन्य वस्तुओं का दान करते हैं।
अमावस्या व्रत को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ व्रत रखने से हर मनोकामना पूरी होती है। आइए जानते हैं इस दिन व्रत करने से साधक को किन लाभों की प्राप्ति होती है।
अमावस्या पर किए गए पूजा-पाठ और मंत्र जाप से मन में सकारात्मकता आती है। इससे मानसिक तनाव कम हो सकता है और मन को शांति मिलती है।
इस दिन तर्पण और श्राद्ध करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और परिवार को अपना आशीर्वाद देते हैं। जिससे सभी कार्यों में सफलता मिलती है।
इस दिन उपवास, ध्यान और मंत्र जाप करन से मन शांत और केंद्रित रहता है। साथ ही, एकाग्रता बढ़ती है। इस दिन योग-व्यायाम करने का बहुत महत्व है। ऐसा करने से शारीरिक मजबूती मिलती है।
विशेष रूप से सोमवती अमावस्या पर किया गया व्रत वैवाहिक जीवन के लिए शुभ माना जाता है। कई महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि के लिए इस दिन व्रत रखती हैं।
अमावस्या आत्मचिंतन और साधना का दिन भी मानी जाती है। इस दिन ध्यान करने से व्यक्ति अपने भीतर झांकने और खुद को बेहतर समझने का प्रयास करता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अमावस्या एक सामान्य खगोलीय घटना है। इस दिन चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच ऐसी स्थिति में होता है कि उसका प्रकाशित भाग पृथ्वी से दिखाई नहीं देता है और अंधकार छा जाता है। वहीं धार्मिक दृष्टि से अमावस्या का महत्व कहीं अधिक व्यापक है। इसे आत्मशुद्धि, साधना, दान-पुण्य और पितृ तर्पण का दिन माना जाता है। इस प्रकार विज्ञान और धर्म दोनों अमावस्या को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखते हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अमावस्या तिथि में जन्मे लोगों का व्यक्तित्व अन्य लोगों से अलग होता है। इस तिथि में जन्में लोग आमतौर पर साहसी, मेहनती और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होते हैं। हालांकि, जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए इन जातकों को अक्सर दूसरों की तुलना में अधिक संघर्ष और मेहनत करनी पड़ सकती है, लेकिन ये चुनौतियों से घबराते नहीं है और डट कर उसका सामना करते हैं। इन्हें जीवन में थोड़ा अधिक उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है।
इन लोगों में अपने विचारों पर दृढ़ रहने की क्षमता होती है और ये मुश्किल समय में भी सोच-समझकर फैसला लेने और काम करने की क्षमता रखते हैं। कई बार ये अपनी बात खुलकर रखने वाले और स्वतंत्र सोच रखने वाले भी होते हैं। हालांकि कभी-कभी इनके मन में असंतोष या बेचैनी की भावना भी बनी रह सकती है, जिसकी वजह से इन्हें मानसिक शांति पाने के लिए अधिक प्रयास करना पड़ता है। हालांकि किसी व्यक्ति का स्वभाव केवल जन्म तिथि से तय नहीं होता। उसकी कुंडली में मौजूद ग्रहों की स्थिति, लग्न और अन्य ज्योतिषीय योग भी व्यक्तित्व और जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं।
प्रश्न1. अमावस्या क्या होती है?
हिन्दू पंचांग के अनुसार, जिस तिथि पर चंद्रमा आकाश में दिखाई नहीं देता और रात पूरी तरह से काली होती है, उसे अमावस्या कहा जाता है।
प्रश्न2. अमावस्या पर क्या करना चाहिए?
इस दिन पितरों का तर्पण, दान-पुण्य, पूजा व्र करना चाहिए।
प्रश्न3. अमावस्या पर पितरों का तर्पण क्यों किया जाता है?
मान्यता है कि अमावस्या पर तर्पण करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
प्रश्न4. क्या अमावस्या पर व्रत रखा जा सकता है?
हां, कई लोग अमावस्या पर व्रत रखते हैं और पूजा-पाठ करके दिन बिताते हैं।
प्रश्न5. अमावस्या पर किस देवी-देवता की पूजा करनी चाहिए?
अमावस्या पर मुख्य रूप से भगवान शिव, भगवान विष्णु और पितृ देवों की पूजा की जाती है।
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