हिंदू पंचांग में पांचवीं तिथि को पंचमी तिथि panchmi कहते है। इस तिथि का भी अन्य तिथि की तरह बहुत अधिक महत्व है। यह तिथि हर माह दो बार यानी शुक्ल पक्ष व कृष्ण पक्ष में पड़ती है। हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार, जब सूर्य और चंद्रमा के बीच का देशांतरीय अंतर 49 डिग्री से 60 डिग्री अंश तक होता है, तब शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि panchang tithi का निर्माण होता है। वहीं कृष्ण पक्ष में पंचमी तिथि का निर्माण सूर्य और चंद्रमा का अंतर 229 से 240 डिग्री अंश तक होता है।
पंचमी तिथि ज्ञान, सुख-समृद्धि, सौभाग्य, धर्म और शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस तिथि का संबंध विशेष रूप से नाग देवता, भगवान शिव, मां सरस्वती, माता लक्ष्मी और अन्य देवी-देवताओं की आराधना से जुड़ा है। आइए जानते हैं 2026 में पंचमी कब है panchmi kab hai।
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तिथि |
वार |
चंद्र तिथि |
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07 जनवरी 2026 |
बुधवार |
कृष्ण पक्ष पंचमी |
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23 जनवरी 2026 |
शुक्रवार |
शुक्ल पक्ष पंचमी (बसंत पंचमी) |
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06 फरवरी 2026 |
शुक्रवार |
कृष्ण पक्ष पंचमी |
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21 फरवरी 2026 |
शनिवार |
शुक्ल पक्ष पंचमी |
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07 मार्च 2026 |
शनिवार |
कृष्ण पक्ष पंचमी (रंग पंचमी) |
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22 मार्च 2026 |
रविवार |
शुक्ल पक्ष पंचमी (लक्ष्मी पंचमी) |
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06 अप्रैल 2026 |
सोमवार |
कृष्ण पक्ष पंचमी |
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21 अप्रैल 2026 |
मंगलवार |
शुक्ल पक्ष पंचमी |
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06 मई 2026 |
बुधवार |
कृष्ण पक्ष पंचमी |
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20 मई 2026 |
बुधवार |
शुक्ल पक्ष पंचमी |
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04 जून 2026 |
गुरुवार |
कृष्ण पक्ष पंचमी |
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18 जून 2026 |
गुरुवार |
शुक्ल पक्ष पंचमी |
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04 जुलाई 2026 |
शनिवार |
कृष्ण पक्ष पंचमी |
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18 जुलाई 2026 |
शनिवार |
शुक्ल पक्ष पंचमी (स्कंद पंचमी) |
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02 अगस्त 2026 |
रविवार |
कृष्ण पक्ष पंचमी |
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16 अगस्त 2026 |
रविवार |
शुक्ल पक्ष पंचमी (नाग पंचमी, गरुड़ पंचमी) |
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01 सितंबर 2026 |
मंगलवार |
कृष्ण पक्ष पंचमी (रक्षा पंचमी) |
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15 सितंबर 2026 |
मंगलवार |
शुक्ल पक्ष पंचमी |
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30 सितंबर 2026 |
बुधवार |
कृष्ण पक्ष पंचमी |
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15 अक्टूबर 2026 |
गुरुवार |
शुक्ल पक्ष पंचमी (ललिता पंचमी) |
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29 अक्टूबर 2026 |
गुरुवार |
कृष्ण पक्ष पंचमी |
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13 नवंबर 2026 |
शुक्रवार |
शुक्ल पक्ष पंचमी (लाभ पंचमी) |
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28 नवंबर 2026 |
शनिवार |
कृष्ण पक्ष पंचमी |
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13 दिसंबर 2026 |
रविवार |
शुक्ल पक्ष पंचमी (विवाह पंचमी) |
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27 दिसंबर 2026 |
रविवार |
कृष्ण पक्ष पंचमी |
शास्त्रों में पंचमी तिथि को अत्यंत शुभ तिथि मानी जाती है। इसे 'श्रीमती' और 'पूर्णा तिथि' भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ और शुभ संकल्प का विशेष फल प्राप्त होता है। पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता माने गए हैं। इसलिए इस दिन नाग देवता की पूजा करने का पुण्य फल प्राप्त होता है। इसके साथ ही, भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के संकट दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। जैसा कि यह तिथि ज्ञान, शिक्षा, धर्म और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी शुभ मानी जाती है इसलिए कई लोग इस दिन में नई शिक्षा, धार्मिक कार्य या महत्वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत करते हैं।
बसंत पंचमी: हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास की शुक्ल पक्ष की तिथि को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन मां सरस्वती व भगवान विष्णु की पूजा आराधना की जाती है। विद्यार्थियों और कला से संबंध रखने वालों के लिए यह दिन बहुत अधिक महत्व रखता है। बसंत पंचमी को श्री पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। ह पर्व विशेष रूप से भारत, बांग्लादेश, नेपाल और अन्य कई देशों में बड़े उल्लास से मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था इसलिए शिक्षा, संगीत, कला और नए कार्यों की शुरुआत के लिए इस दिन को बहुत ही शुभ माना जाता है।
नाग पंचमी: हिंदू पंचांग में, सावन यानी श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन नागों ,सांपों और नाग देवताओं की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन कई लोग नागों को दूध अर्पित करते हैं और उनकी सुरक्षा के लिए प्रार्थना करते हैं। नाग पंचमी के दिन पूजा करने से कालसर्प दोष और सर्प संबंधी भय से मुक्ति मिलती है तथा परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
ऋषि पंचमी: हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ऋषि पंचमी का पर्व मनाया जाता है। यह त्योहार गणेश चतुर्थी के ठीक अगले दिन आता है। यह दिन मुख्य रूप से सप्त ऋषियों (कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ) को समर्पित है और उनकी पूजा की जाती है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत को करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
विवाह पंचमी: हिंदू पंचांग में मार्गशीर्ष (अगहन) माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विवाह पंचमी के पर्व के रूप में मनाया जाता है। यह एक प्रमुख हिंदू त्योहार है, जो भगवान श्रीराम और माता सीता के पवित्र विवाह की वर्षगांठ का प्रतीक है। इस दिन राम-सीता की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख, प्रेम और सौहार्द बना रहता है। माना जाता है कि इस दिन बिना मुहूर्त देखें विवाह करना शुभ और फलदायी होता है इसलिए कई लोग मुहूर्त का मिलने पर इस दिन विवाह कर लेते हैं।
लक्ष्मी पंचमी: हिंदू पंचांग में, चैत्र मास की शुक्ल पक्ष पंचमी को लक्ष्मी पंचमी कहा जाता है। इसे श्री पंचमी भी कहा जाता है। धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी माँ लक्ष्मी को समर्पित एक अत्यंत शुभ हिंदू पर्व है। यह दिन माता लक्ष्मी की पूजा के लिए समर्पित होता है। इन दिस मां लक्ष्मी का व्रत लेने और विधि-विधान से पूजा पाठ करने से कभी भी धन और वैभव की कमी नहीं होती है।
सौभाग्य पंचमी: सौभाग्य पंचमी जिसे लाभ पंचमी, ज्ञान पंचमी, या लाभ पंचम भी कहा जाता है। यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाने वाला एक अत्यंत शुभ हिंदू पर्व है। यह पर्व विशेष रूप से व्यापार और आर्थिक उन्नति से जुड़ा है। बिज़नेस से जुड़े लोग इस दिन व्यापार में अच्छी बढ़ोतरी के लिए पूजा पाठ करते हैं।
रंग पंचमी: हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास की कृष्ण पक्ष पंचमी की पंचमी तिथि को रंग पंचमी मनाई जाती है। इसे होली उत्सव के समापन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन देवी-देवताओं की होली होती है। यह पर्व मुख्य रूप से छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र में धूमधाम से मनाया जाता है। लोग इस दिन तरह-तरह के पकवान बनाते हैं। इस पर्व को होली के पांचवे दिन बनाया जाता है।
प्रश्न1. पंचमी तिथि का पंचांग क्या है?
हिंदू पंचांग की पांचवीं तिथि को पंचमी कहते हैं। यह तिथि मास में दो बार आती है।
प्रश्न2. पंचमी तिथि का देवता कौन है?
हिंदू पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि के देवता नाग हैं।
प्रश्न3. पंचमी तिथि किस भगवान को समर्पित है?
पंचमी तिथि सरस्वती , नाग (नाग पंचमी) और लक्ष्मी (लक्ष्मी पंचमी) जैसी विभिन्न देवी-देवताओं से जुड़ी है।
प्रश्न4. तिथि किसे कहते हैं?
हिन्दू पंचांग या वैदिक ज्योतिष के अनुसार, तिथि चंद्रमा की गति पर आधारित एक 'चंद्र दिवस' होती है।
प्रश्न5. पंचमी तिथि का स्वामी कौन है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता हैं।
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