Dwitiya Tithi Kab Hai

हिंदू पंचांग में हर एक तिथि का विशेष महत्व है। इन्हीं में से एक द्वितीया तिथि, जो चंद्र मास की दूसरी तिथि मानी जाती है। यह तिथि भी महीने में दो बार आती है, एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। शुक्ल पक्ष में जब सूर्य और चंद्रमा के बीच 13 डिग्री और 14 डिग्री का अंतर होता है तब द्वितीया तिथि का निर्माण होता है। वहीं जब कृष्ण पक्ष में सूर्य और चंद्रमा के बीच 193 डिग्री से 204 डिग्री का अंतर होता है तब यह तिथि बनती है। इस तिथि को दूज, दौज, बीया और बीज के नाम से भी जाना जाता है। द्वितीया तिथि शुभता, सौभाग्य, प्रेम, पारिवारिक संबंधों और मंगल कार्यों का प्रतीक मानी जाती है। हिंदू धर्म में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार इस तिथि में मनाए जाते हैं, जिसका विशेष महत्व है।

द्वितीया तिथि कब है dwitiya

तिथि

वार

चंद्र पक्ष

04 जनवरी 2026

रविवार

कृष्ण पक्ष द्वितीया

20 जनवरी 2026

बुधवार

शुक्ल पक्ष द्वितीया

03 फरवरी 2026

मंगलवार

कृष्ण पक्ष द्वितीया

18 फरवरी 2026

गुरुवार

शुक्ल पक्ष द्वितीया

04 मार्च 2026

बुधवार

कृष्ण पक्ष द्वितीया

20 मार्च 2026

शुक्रवार

शुक्ल पक्ष द्वितीया (चेटी चंड)

03 अप्रैल 2026

शुक्रवार

कृष्ण पक्ष द्वितीया

18 अप्रैल 2026

शनिवार

शुक्ल पक्ष द्वितीया

03 मई 2026

रविवार

कृष्ण पक्ष द्वितीया

17 मई 2026

रविवार

शुक्ल पक्ष द्वितीया

01 जून 2026

सोमवार

कृष्ण पक्ष द्वितीया

16 जून 2026

मंगलवार

शुक्ल पक्ष द्वितीया

01 जुलाई 2026

बुधवार

कृष्ण पक्ष द्वितीया

15 जुलाई 2026

बुधवार

शुक्ल पक्ष द्वितीया

30 जुलाई 2026

गुरुवार

कृष्ण पक्ष द्वितीया

13 अगस्त 2026

गुरुवार

शुक्ल पक्ष द्वितीया

29 अगस्त 2026

शनिवार

कृष्ण पक्ष द्वितीया

12 सितंबर 2026

शनिवार

शुक्ल पक्ष द्वितीया

27 सितंबर 2026

रविवार

कृष्ण पक्ष द्वितीया

11 अक्टूबर 2026

रविवार

शुक्ल पक्ष द्वितीया

27 अक्टूबर 2026

मंगलवार

कृष्ण पक्ष द्वितीया

10 नवंबर 2026

मंगलवार

शुक्ल पक्ष द्वितीया (यम द्वितीया)

25 नवंबर 2026

बुधवार

कृष्ण पक्ष द्वितीया

10 दिसंबर 2026

गुरुवार

शुक्ल पक्ष द्वितीया

25 दिसंबर 2026

शुक्रवार

कृष्ण पक्ष द्वितीया

द्वितीया तिथि का महत्व

हिंदू पंचांग की दूसरी तिथि को द्वितीया तिथि कहा जाता है। यह तिथि चंद्रमा की दूसरी कला का प्रतिनिधित्व करती है। शास्त्रों के अनुसार, कृष्ण पक्ष में भगवान सूर्य अमृत का पान कर अपनी ऊर्जा बनाए रखते हैं और शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को वही अमृत चंद्रमा को वापस प्रदान करते हैं। इसी कारण यह तिथि जीवन में ऊर्जा, सकारात्मकता और शुभ फल देने वाली मानी जाती है।द्वितीया तिथि के स्वामी सृष्टिकर्ता भगवान ब्रह्मा हैं इसलिए इस दिन ब्रह्मा जी की विधि-विधान से पूजा करने और उनका ध्यान करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है।

द्वितीया तिथि को हिंदू धर्म में अत्यंत मंगलकारी माना गया है। यह तिथि प्रेम, भाई-बहन के स्नेह, दांपत्य सुख, समृद्धि और शुभ कार्यों की शुरुआत से जुड़ी हुई है। शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर भगवान शिव माता पार्वती के साथ निवास करते हैं। इसलिए इस दिन शिव-पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

द्वितीया तिथि और शुभ योग

यदि द्वितीया तिथि सोमवार या शुक्रवार को पड़ती है तो यह मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। इन योग अशुभ योगों में गिना जाता है। यदि किसी माह में शुक्ल और कृष्ण पक्ष दोनों की द्वितीया बुधवार को पड़े तो उसे सिद्धिदा तिथि कहा जाता है। इस दिन किए गए कार्यों में सफलता मिलने की मान्यता है। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को बेहद शुभ योग और कार्य में सफलता दिलाने वाला योग कहा गया है। भाद्रपद मास की द्वितीया को शून्य तिथि माना गया है। वहीं शुक्ल पक्ष की द्वितीया में भगवान शिव की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

द्वितीया तिथि के प्रमुख त्योहार और व्रत

भाई दूज: कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। यह भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर उसकी लंबी आयु और सुखी जीवन की कामना करती हैं। भाई दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन यमराज की पूजा का विशेष महत्व माना गया है।

जगन्नाथ रथयात्रा: आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया को ओडिशा के जगन्नाथ पुरी में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा निकाली जाती है। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलराम और देवी सुभद्रा भव्य रथों में नगर भ्रमण करते हैं।

अशून्य शयन व्रत: श्रावण कृष्ण पक्ष की द्वितीया को अशून्य शयन व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। यह व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

नारद जयंती: ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की द्वितीया को देवर्षि नारद की जयंती मनाई जाती है। इस दिन नारद जी के साथ भगवान विष्णु की पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है।

FAQ

प्रश्न1. द्वितीया तिथि क्या है?

द्वितीया तिथि हिन्दू पंचांग के अनुसार किसी भी चंद्र मास (महीने) की दूसरी तिथि होती है।

प्रश्न2.द्वितीया श्राद्ध तिथि कब है?

इस दिन उन पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है जिनका देहांत किसी भी माह की द्वितीया तिथि को हुआ हो। 

प्रश्न3. द्वितीया तिथि किसे कहते हैं?

हिंदू पंचांग के अनुसार किसी भी चंद्र मास के शुक्ल या कृष्ण पक्ष के दूसरे दिन को द्वितीया तिथि कहा जाता है।

प्रश्न4. द्वितीया का मतलब क्या होता है?

हिंदू पंचांग के चंद्र पखवाड़े (पक्ष) का दूसरा दिन (तिथि) होता है।

प्रश्न5. द्वितीया तिथि के देवता कौन थे?

हिंदू पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि के देवता ब्रह्मा जी हैं।