हिंदू पंचांग में हर एक तिथि का विशेष महत्व है। इन्हीं में से एक द्वितीया तिथि, जो चंद्र मास की दूसरी तिथि मानी जाती है। यह तिथि भी महीने में दो बार आती है, एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। शुक्ल पक्ष में जब सूर्य और चंद्रमा के बीच 13 डिग्री और 14 डिग्री का अंतर होता है तब द्वितीया तिथि का निर्माण होता है। वहीं जब कृष्ण पक्ष में सूर्य और चंद्रमा के बीच 193 डिग्री से 204 डिग्री का अंतर होता है तब यह तिथि बनती है। इस तिथि को दूज, दौज, बीया और बीज के नाम से भी जाना जाता है। द्वितीया तिथि शुभता, सौभाग्य, प्रेम, पारिवारिक संबंधों और मंगल कार्यों का प्रतीक मानी जाती है। हिंदू धर्म में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार इस तिथि में मनाए जाते हैं, जिसका विशेष महत्व है।