द्वितीया तिथि 2026 - Dwitiya Tithi Kab Ki Hai

हिंदू पंचांग में हर एक तिथि का विशेष महत्व है। इन्हीं में से एक द्वितीया तिथि, जो चंद्र मास की दूसरी तिथि मानी जाती है। यह तिथि भी महीने में दो बार आती है, एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। शुक्ल पक्ष में जब सूर्य और चंद्रमा के बीच 13 डिग्री और 14 डिग्री का अंतर होता है तब द्वितीया तिथि का निर्माण होता है। वहीं जब कृष्ण पक्ष में सूर्य और चंद्रमा के बीच 193 डिग्री से 204 डिग्री का अंतर होता है तब यह तिथि बनती है। इस तिथि को दूज, दौज, बीया और बीज के नाम से भी जाना जाता है। द्वितीया तिथि शुभता, सौभाग्य, प्रेम, पारिवारिक संबंधों और मंगल कार्यों का प्रतीक मानी जाती है। हिंदू धर्म में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार इस तिथि में मनाए जाते हैं, जिसका विशेष महत्व है।

द्वितीया तिथि कब है - Dwitiya Tithi 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. द्वितीया तिथि क्या है?

द्वितीया तिथि हिन्दू पंचांग के अनुसार किसी भी चंद्र मास (महीने) की दूसरी तिथि होती है।

2. द्वितीया श्राद्ध तिथि कब है?

इस दिन उन पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है जिनका देहांत किसी भी माह की द्वितीया तिथि को हुआ हो। 

3. द्वितीया तिथि किसे कहते हैं?

हिंदू पंचांग के अनुसार किसी भी चंद्र मास के शुक्ल या कृष्ण पक्ष के दूसरे दिन को द्वितीया तिथि कहा जाता है।

4. द्वितीया का मतलब क्या होता है?

हिंदू पंचांग के चंद्र पखवाड़े (पक्ष) का दूसरा दिन (तिथि) होता है।

5. द्वितीया तिथि के देवता कौन थे?

हिंदू पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि के देवता ब्रह्मा जी हैं।