हिंदू पंचांग में सभी तिथि के जैसे षष्ठी तिथि shashti tithi का भी विशेष महत्व है। चंद्र मास की छठी तिथि षष्ठी कहलाती है। यह तिथि माह में दो बार यानी शुक्ल पक्ष में और दूसरी बार कृष्ण पक्ष में आती है। हिंदू धर्म में कई महत्वपूर्ण पर्व षष्ठी तिथि shashti tithi को मनाए जाते हैं। यह तिथि संतान सुख, परिवार की खुशहाली, बेहतर स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। इस तिथि के दिन विशेष रूप से देवी षष्ठी (छठी मैया), भगवान कार्तिकेय और सूर्य देव की आराधना के लिए महत्वपूर्ण मानी गई है।
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तिथि |
वार |
चंद्र कला |
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08 जनवरी 2026 |
गुरुवार |
कृष्ण पक्ष षष्ठी |
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24 जनवरी 2026 |
शनिवार |
शुक्ल पक्ष षष्ठी |
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07 फरवरी 2026 |
शनिवार |
कृष्ण पक्ष षष्ठी |
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22 फरवरी 2026 |
रविवार |
शुक्ल पक्ष षष्ठी |
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08 मार्च 2026 |
रविवार |
कृष्ण पक्ष षष्ठी |
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23 मार्च 2026 |
सोमवार |
शुक्ल पक्ष षष्ठी (छठ पूजा) |
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07 अप्रैल 2026 |
मंगलवार |
कृष्ण पक्ष षष्ठी |
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22 अप्रैल 2026 |
बुधवार |
शुक्ल पक्ष षष्ठी |
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07 मई 2026 |
गुरुवार |
कृष्ण पक्ष षष्ठी |
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21 मई 2026 |
गुरुवार |
शुक्ल पक्ष षष्ठी |
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06 जून 2026 |
शनिवार |
कृष्ण पक्ष षष्ठी |
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19 जून 2026 |
शुक्रवार |
शुक्ल पक्ष षष्ठी |
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05 जुलाई 2026 |
रविवार |
कृष्ण पक्ष षष्ठी |
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19 जुलाई 2026 |
रविवार |
शुक्ल पक्ष षष्ठी |
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03 अगस्त 2026 |
सोमवार |
कृष्ण पक्ष षष्ठी |
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17 अगस्त 2026 |
सोमवार |
शुक्ल पक्ष षष्ठी |
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02 सितंबर 2026 |
बुधवार |
कृष्ण पक्ष षष्ठी (रणधन छठ) |
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16 सितंबर 2026 |
बुधवार |
शुक्ल पक्ष षष्ठी |
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01 अक्टूबर 2026 |
गुरुवार |
कृष्ण पक्ष षष्ठी |
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16 अक्टूबर 2026 |
शुक्रवार |
शुक्ल पक्ष षष्ठी |
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30 अक्टूबर 2026 |
शुक्रवार |
कृष्ण पक्ष षष्ठी |
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14 नवंबर 2026 |
शनिवार |
शुक्ल पक्ष षष्ठी (नहाए खाए) |
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29 नवंबर 2026 |
रविवार |
कृष्ण पक्ष षष्ठी |
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14 दिसंबर 2026 |
सोमवार |
शुक्ल पक्ष षष्ठी |
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28 दिसंबर 2026 |
सोमवार |
कृष्ण पक्ष षष्ठी |
षष्ठी तिथि shashti tithi का बहुत अधिक महत्व है। कई जगहों पर इस दिन महिलाएं संतान सुख और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए उपवास भी रखती हैं। मान्यता है कि इस दिन देवी की पूजा करने से बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य और दीर्घायु प्राप्त होती है। इसके अलावा षष्ठी तिथि shashti tithi साहस, आत्मविश्वास और नई शुरुआत का भी प्रतीक मानी जाती है।
मान्यता है कि इस दिन की गई विधि-विधान से पूजा करने और देवी मंत्रों का जा करने से सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। देवी षष्ठी को बच्चों और परिवार की रक्षक माना जाता है। इसलिए संतान की सुरक्षा और सुखद भविष्य की कामना से उनकी पूजा की जाती है। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के कई हिस्सों में छठ पूजा के दौरान छठी मैया की विशेष आराधना की जाती है।
षष्ठी तिथि का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, संयम और भक्ति के लिए भी महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। इस दिन उपवास, पूजा और ध्यान करने से मन को शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्ति होती है। धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि इस तिथि में श्रद्धा और नियमों के साथ की गई पूजा व्यक्ति को सफलता प्रदान करती है।
स्कंद षष्ठी: हिंदू धर्म स्कंद षष्ठी एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण व्रत है जो भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र 'स्कंद' यानी भगवान कार्तिकेय को समर्पित है। यह व्रत हर महीने शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है, जिसमें संतान प्राप्ति, पारिवारिक शांति और दुखों के नाश की कामना की जाती है। इसका महत्व विशेष रूप से तमिलनाडु में है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और भगवान कार्तिकेय की पूजा कर साहस, सफलता और सुरक्षा की कामना करते हैं।
छठ पूजा: छठ पूजा का पर्व षष्ठी तिथि से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ क्षेत्रों में बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। इस पर्व में श्रद्धालु सूर्य देव और छठी मैया की पूजा करते हैं तथा उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। यह पर्व आस्था, अनुशासन और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक माना जाता है।
रणधन छठ: षष्ठी तिथि का एक और महत्वपूर्ण पर्व है रणधन छठ, जो मुख्य रूप से गुजरात में मनाया जाता है। इस दिन अगले दिन आने वाली शीतला सप्तमी के लिए भोजन तैयार किया जाता है और शीतला सप्तमी पर बासी भोजन किया जाता है। इसे पवित्रता और पारंपरिक रीति-रिवाजों से जुड़ा पर्व माना जाता है।
प्रश्न1. षष्ठी तिथि का श्राद्ध कब है?
वर्ष 2026 में षष्ठी तिथि का श्राद्ध 2 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार) को मनाया जाएगा।
प्रश्न2. 2026 में ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष षष्ठी कब है?
वर्ष 2026 में ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 21 मई 2026, गुरुवार को थी।
प्रश्न3. शुक्ल षष्ठी तिथि क्या है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक चंद्र मास के शुक्ल पक्ष की छठी तिथि को शुक्ल षष्ठी तिथि कहा जाता है।
प्रश्न4. महिलाएं पितरों को जल दे सकती हैं?
हां, महिलाएं निश्चित रूप से अपने पितरों को जल दे सकती हैं।
प्रश्न5. षष्ठी तिथि को क्या नहीं खाना चाहिए?
षष्ठी तिथि को नीम की पत्तियां, इसके फल या इससे बनी किसी भी चीज़ का सेवन करना और दातून करना पूरी तरह वर्जित माना गया है।
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