Vaishakh Amavasya Kab Hai

हिंदी पंचांग में वर्ष का दूसरा महीना वैशाख का महीना होता है और इस माह में पड़ने वाली अमावस्या को वैशाख अमावस्या कहा जाता है। इस अमावस्या का विशेष महत्व है इसलिए हर कोई वैशाख अमावस्या कब है vaishakh amavasya kab hai यह जानना चाहता है। वैशाख मास स्वयं भगवान विष्णु को प्रिय माना गया है। इस महीने में किए गए स्नान, दान, जप और तप का विशेष फल प्राप्त होता है। ऐसे में जब वैशाख अमावस्या तिथि आती है, तो उसका महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। इस दिन लोग पितरों का तर्पण करते हैं, पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, व्रत रखते हैं और ब्राह्मणों व जरूरतमंदों को दान करते हैं।

वैशाख अमावस्या कब है vaishakh amavasya kab hai

तिथि: 17 अप्रैल 2026, दिन शुक्रवार

अमावस्या तिथि प्रारंभ: 16 अप्रैल 2026 की रात 8 बजकर 14 मिनट से

अमावस्या तिथि समाप्त: 17 अप्रैल 2026 की शाम 5 बजकर 24 मिनट तक

स्नान और दान का शुभ मुहूर्त: सुबह 06 बजे बजे से 10 बजकर 30 मिनट बजे तक।

वैशाख अमावस्या का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वैशाख के महीने में ही त्रेता युग का आरंभ हुआ था। यही कारण है कि वैशाख मास को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। जब इसी पवित्र महीने में अमावस्या तिथि आती है तो इसका महत्व अपने आप कई गुना बढ़ जाता है। अमावस्या को पितरों की तिथि कहा जाता है इसलिए इस दिन को मुख्य रूप से पितरों का तर्पण, दान-पुण्य और धार्मिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए अच्छे कर्मों का फल साधक को लंबे समय तक मिलता है इसलिए इस दिन कई लोग व्रत भी रखते हैं।

वैशाख अमावस्या पर क्या करें क्या न करें

क्या करें

  • इस दिन प्रातः काल उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो किसी नदी, सरोवर या तीर्थ स्थल पर स्नान करना शुभ माना जाता है। यदि ऐसा संभव न हो तो घर पर स्नान करने वाले पानी में गंगाजल मिला लें।
  • इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें।
  • वैशाख अमावस्या पर तिल और जल से तर्पण करने का विशेष महत्व है। इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
  • इस दिन सुबह पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाना, परिक्रमा करना और शाम को उसके नीचे घी का दीपक जलाना शुभ होता है। 
  • वैशाख मास भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है इसलिए इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए।
  • इस दिन गरीबों और जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

क्या न करें

  • भूलकर भी किसी का अपमान या गलत शब्द इस्तेमाल न करें।
  • क्रोध और वाद-विवाद से बचें।
  • तामसिक भोजन का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • बड़ों का अनादर न करें।
  • दान-पुण्य की उपेक्षा न करें।

वैशाख अमावस्या व्रत के नियम

  • कई श्रद्धालु वैशाख अमावस्या पर व्रत रखते हैं। व्रत रखने वाले लोगों को दिनभर सात्विक जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है।
  • इस दिन प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। कुछ लोग इस दिन निर्जला व्रत भी रखते हैं, जबकि कुछ लोग फलाहार ग्रहण करते हैं।
  • व्रत के दौरान मन को शांत रखें, क्रोध से बचें और भगवान का स्मरण करते रहें।
  • इस दिन फलाहार व्रत रखने वाले साधक को फल, दूध और दही, साबूदाना, मूंगफली, सूखे मेवे, आलू, शकरकंद जैसी चीजों का सेवन करना चाहिए।
  • भोजन हमेशा हल्का और घर का बना हुआ होना चाहिए।

वैशाख अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व

वैशाख अमावस्या को आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण और शुभ माना जाता है।  यह दिन पितरों को याद करने, उनके लिए तर्पण करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का विशेष अवसर होता है। माना जाता है कि इस दिन श्रद्धा से किए गए तर्पण और श्राद्ध से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इसके अलावा, रुके काम भी बनने लगते हैं।

इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का भी विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि गंगा, यमुना या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से मन और आत्मा की शुद्धि होती है तथा व्यक्ति को अच्छे फलों की प्राप्ति होती है। यदि नदी में स्नान संभव न हो तो घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी शुभ होता है। वैशाख अमावस्या को नई शुरुआत और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक भी माना जाता है। अमावस्या के बाद नए चंद्र पक्ष की शुरुआत होती है, इसलिए कई लोग इस दिन पुराने नकारात्मक विचारों को छोड़कर जीवन में नई ऊर्जा और नई सोच के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लेते हैं।

वैशाख अमावस्या कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में धर्मवर्ण नाम के एक धार्मिक और विद्वान ब्राह्मण रहते थे। वे भगवान विष्णु के परम भक्त थे और हमेशा पूजा-पाठ तथा साधना में अपना मन लगाए रखते थे। एक दिन उन्होंने किसी संत को यह कहते हुए सुना कि कलयुग में भगवान विष्णु का नाम का स्मरण करते रहने से बड़े से बड़े पापों से मुक्ति मिल जाती है।

यह बात उनके मन में इतनी गहराई से बैठ गई कि उन्होंने संसार का त्याग कर सन्यास लेने का फैसला किया। वे घर-परिवार छोड़कर तीर्थों में भटकने लगे और भगवान की भक्ति में पूरी तरह लीन हो गए। एक दिन भ्रमण करते हुए वे पितृ लोक पहुंचे। वहां उन्होंने अपने पूर्वजों को कष्ट में देखा। धर्मवर्ण ने जब इसका कारण पूछा तो पितरों ने बताया कि उनके संन्यास लेने के कारण परिवार में कोई ऐसा नहीं बचा जो पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कर सके। पितरों ने उनसे कहा कि यदि वे गृहस्थ जीवन अपनाकर वैशाख अमावस्या के दिन विधि-विधान से पिंडदान करें तो उन्हें इस कष्ट से मुक्ति मिल सकती है।

अपने पितरों की पीड़ा देखकर धर्मवर्ण ने उनकी बात मान ली। उन्होंने संन्यास त्याग दिया, गृहस्थ जीवन अपनाया और वैशाख अमावस्या के दिन पूरे विधि-विधान से तर्पण और पिंडदान किया। उनके इस कार्य से पितरों को शांति और मुक्ति मिल गई और उन्होंने अपनी कृपा उन पर बरसाई। तभी से वैशाख अमावस्या को पितृ तर्पण के लिए अत्यंत शुभ माना जाने लगा।

वैशाख अमावस्या पर इन चीजों का करें दान

  • काले तिल
  • सरसों का तेल
  • अन्न
  • वस्त्र
  • गुड़
  • जल से भरा घड़ा
  • छाता
  • चप्पल

FAQ

प्रश्न1. वैशाख की अमावस्या कब है?

इस साल वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल, शुक्रवार को है।

प्रश्न2. वैशाख अमावस्या के दिन क्या करना चाहिए?

शाख मास की अमावस्या तिथि के दिन पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए।

प्रश्न3. अमावस्या के दिन चावल खाना चाहिए या नहीं?

सनातन धर्म में अमावस्या के दिन चावल खाने या न खाने को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं।

प्रश्न4. हिंदू कैलेंडर में वैशाख महीना कौन सा है?

वैशाख हिंदू चंद्र पंचांग और भारतीय राष्ट्रीय पंचांग का दूसरा महीना है।

प्रश्न5. अमावस्या को कौन सी सब्जी नहीं खानी चाहिए?

अमावस्या के दिन प्याज, लहसुन, और तामसिक सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए ।