हिंदू पंचांग में हर एक तिथि का विशेष महत्व है। पंचांग के पांच प्रमुख अंगों में से एक तिथि भी होती है, जिसके आधार पर व्रत, त्योहार और शुभ कार्य तय होते हैं। इन्हीं तिथियों में द्वादशी तिथि dwadashi tithi भी का भी अपना अलग स्थान है। द्वादशी चंद्र मास की बारहवीं तिथि होती है, जो हर महीने दो बार आती है। एक शुक्ल पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में यानी साल में 24 द्वादशी तिथि dwadashi tithi पड़ती है। यह तिथि भगवान विष्णु को बहुत अधिक प्रिय होती है और विशेष रूप से यदि एकादशी व्रत का व्रत रखा है तो द्वादशी तिथि व्रत पारण के लिए महत्वपूर्ण होती है।
द्वादशी को भद्रा तिथि की श्रेणी में रखा गया है। यह तिथि बुद्धि, साहस, सद्गुण और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाली मानी जाती है। भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए लोग इस दिन विशेष प्रकार के उपाय जैसे दान-पुण्य, जरूरतमंदों की मदद आदि अच्छे कार्य करते हैं।
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तिथि |
वार |
चंद्र कला |
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31 दिसंबर 2025 |
बुधवार |
शुक्ल पक्ष द्वादशी |
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14 जनवरी 2026 |
बुधवार |
कृष्ण पक्ष द्वादशी |
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29 जनवरी 2026 |
गुरुवार |
शुक्ल पक्ष द्वादशी |
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13 फरवरी 2026 |
शुक्रवार |
कृष्ण पक्ष द्वादशी |
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27 फरवरी 2026 |
शुक्रवार |
शुक्ल पक्ष द्वादशी (गोविंदा द्वादशी) |
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15 मार्च 2026 |
रविवार |
कृष्ण पक्ष द्वादशी |
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29 मार्च 2026 |
रविवार |
शुक्ल पक्ष द्वादशी |
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14 अप्रैल 2026 |
मंगलवार |
कृष्ण पक्ष द्वादशी |
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27 अप्रैल 2026 |
सोमवार |
शुक्ल पक्ष द्वादशी |
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13 मई 2026 |
बुधवार |
कृष्ण पक्ष द्वादशी |
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27 मई 2026 |
बुधवार |
शुक्ल पक्ष द्वादशी |
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11 जून 2026 |
गुरुवार |
कृष्ण पक्ष द्वादशी |
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25 जून 2026 |
गुरुवार |
शुक्ल पक्ष द्वादशी (राम लक्ष्मण द्वादशी) |
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11 जुलाई 2026 |
शनिवार |
कृष्ण पक्ष द्वादशी |
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25 जुलाई 2026 |
शनिवार |
शुक्ल पक्ष द्वादशी |
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09 अगस्त 2026 |
रविवार |
कृष्ण पक्ष द्वादशी |
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24 अगस्त 2026 |
सोमवार |
शुक्ल पक्ष द्वादशी |
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07 सितंबर 2026 |
सोमवार |
कृष्ण पक्ष द्वादशी |
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22 सितंबर 2026 |
मंगलवार |
शुक्ल पक्ष द्वादशी |
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07 अक्टूबर 2026 |
बुधवार |
कृष्ण पक्ष द्वादशी |
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22 अक्टूबर 2026 |
गुरुवार |
शुक्ल पक्ष द्वादशी |
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05 नवंबर 2026 |
गुरुवार |
कृष्ण पक्ष द्वादशी |
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21 नवंबर 2026 |
शनिवार |
शुक्ल पक्ष द्वादशी |
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04 दिसंबर 2026 |
शुक्रवार |
कृष्ण पक्ष द्वादशी |
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20 दिसंबर 2026 |
रविवार |
शुक्ल पक्ष द्वादशी |
द्वादशी तिथि के स्वामी देव भगवान विष्णु माने गए हैं। इसलिए इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप और व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा भाव से इस दिन उपवास रखता है और भगवान विष्णु के मंत्र व नाम जप करता है, उसकी हर मनोकामना की पूर्ति होती है और घर परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। कई लोग इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ और तुलसी पूजन भी करते हैं।
द्वादशी का सबसे बड़ा महत्व एकादशी व्रत से जुड़ा हुआ है। जो लोग एकादशी का व्रत रखते हैं, वे अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर व्रत पारण करते हैं। यदि एकादशी व्रत का पारण सही समय पर द्वादशी में किया जाए तो व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। इसलिए द्वादशी को व्रत पूर्ण करने की तिथि भी कहा जाता है।
द्वादशी भगवान विष्णु को प्रिय तिथि मानी जाती है। इस दिन उनकी पूजा और आराधना करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। द्वादशी तिथि का संबंध पितरों से भी माना गया है। कहा जाता है कि इस दिन पितरों का स्मरण और उनके लिए किए गए शुभ कार्य विशेष फलदायी होते हैं। द्वादशी तिथि को कई शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना गया है। विवाह, यात्रा, धार्मिक अनुष्ठान और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए यह तिथि शुभ मानी जाती है।
कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वादशी को तुलसी विवाह मनाया जाता है। इस दिन तुलसी माता और भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप का विवाह कराया जाता है। इसके साथ ही विवाह और मांगलिक कार्यों का शुभ समय भी शुरू माना जाता है।
यह पर्व विशेष रूप से गाय और बछड़ों की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन गौ माता की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
पितृ पक्ष में आने वाली द्वादशी तिथि पर उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है जिनका निधन द्वादशी तिथि को हुआ हो। इसे पितरों की शांति और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुछ विशेष वारों के साथ द्वादशी तिथि का संयोग होने पर कुछ शुभ-अशुभ योगों का निर्माण करता है।
हालांकि किसी भी योग का प्रभाव कुंडली, नक्षत्र और अन्य ग्रह स्थितियों पर भी निर्भर करता है।
प्रश्न1. द्वादशी का अर्थ क्या होता है?
द्वादशी का शाब्दिक अर्थ 'बारहवां दिन' है।
प्रश्न2. द्वादशी के दिन कितनी बार खाना खाना चाहिए?
हिंदू धर्म और शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत का समापन (पारण) द्वादशी तिथि के दिन किया जाता है।
प्रश्न3. द्वादशी को किस भगवान की पूजा की जाती है?
द्वादशी का पर्व मुख्य रूप से ब्रह्मांड के रक्षक भगवान विष्णु को समर्पित है।
प्रश्न4. द्वादशी को कौन सी सब्जी नहीं खानी चाहिए?
द्वादशी तिथि पर 'पोई' (मालाबार पालक या पूतिका) का साग नहीं खाना चाहिए।
प्रश्न5. द्वादशी व्रत कितने बजे खोलना चाहिए?
सूर्योदय के बाद और द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना चाहिए।
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