Amalaki Ekadashi 2026 Kab Hai
शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026 · Shukla पक्ष, एकादशी तिथि — पवित्र आँवले के वृक्ष की पूजा.
व्रत एवं पारण का समय
एकादशी तिथि भर व्रत रखा जाता है और अगली सुबह द्वादशी पर पारण समय-सीमा में तोड़ा जाता है। नीचे दिए समय नई दिल्ली के लिए हैं और अनुमानित हैं — अपने शहर के लिए पंचांग से सटीक तिथि और पारण की पुष्टि करें।

आमलकी एकादशी
शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026
समय नई दिल्ली के लिए हैं और आपके स्थान के अनुसार बदलते हैं। आज का पंचांग देखें अपने शहर के लिए।
व्रत कैसे रखें
प्रातःकालीन संकल्प से लेकर द्वादशी पर पारण तक — चार सरल चरण।
ब्रह्म मुहूर्त में उठें, स्नान करें और शुद्ध एवं स्थिर मन से व्रत का संकल्प लें।
तुलसी, पुष्प, धूप और घी के दीपक से भगवान विष्णु की पूजा करें; फल और पंचामृत अर्पित करें।
अन्न और दालों का त्याग करें। दिन भर जप, कथा और दान में लगे रहें और रात्रि जागरण करें।
द्वादशी की प्रातःकाल में निर्धारित समय-सीमा के भीतर, दीन-दुखियों को भोजन कराने के बाद व्रत तोड़ें।
व्रत तभी पूर्ण होता है जब इसे सही ढंग से तोड़ा जाए: द्वादशी तिथि पर, पारण समय-सीमा में और एकादशी समाप्त होने के बाद। 2026 में आमलकी एकादशी का पारण शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026 की अगली सुबह, नई दिल्ली में पड़ता है।
हिंदू धर्म में हर माह पड़ने वाली एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली आमलकी एकादशी का महत्व और भी विशेष होता है। यही कारण है कि हर साल श्रद्धालु यह जानने की कोशिश करते हैं कि आमलकी एकादशी amalaki ekadashi 2026 कब है।
दरअसल आमलकी एकादशी amalaki ekadashi 2026 को आंवले के वृक्ष और भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित माना जाता है। इस दिन व्रत रखने, भगवान विष्णु की पूजा करने और आंवले के पेड़ की आराधना करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। कई जगहों पर इसे रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है और इसी दिन से होली के उत्सव की शुरुआत मानी जाती है।
आमलकी एकादशी amalaki ekadashi 2026 कब है
आमलकी एकादशी का व्रत 27 फरवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा।
एकादशी तिथि आरंभ: 27 फरवरी 2026 की मध्यरात्रि 12 बजकर 33 मिनट बजे से
एकादशी तिथि समाप्त: 27 फरवरी 2026 की रात 10 बजकर 32 मिनट तक बजे
आमलकी एकादशी पारण समय: 28 फरवरी 2026 की सुबह 6 बजकर 47 मिनट से सुबह 9 बजकर 06 मिनट तक
आमलकी एकादशी का महत्व
आमलकी एकादशी को सबसे फलदायी एकादशियों में से एक माना जाता है। इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ व्रत करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि आंवले का वृक्ष भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इसलिए इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा कहा जाता है कि आमलकी एकादशी पर की गई पूजा, दान और भक्ति से व्यक्ति को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
पद्म पुराण के अनुसार, इस व्रत को करने से साधक को जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है और बैकुंठ धाम (मोक्ष) की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही सुख, समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और मानसिक शांति की कामना से भी लोग यह व्रत रखते हैं।
भगवान विष्णु और आंवले का संबंध
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आंवले का वृक्ष भगवान विष्णु से जुड़ा हुआ माना जाता है। कहा जाता है कि सृष्टि की रचना के समय भगवान विष्णु के आनंद से आंवले का वृक्ष प्रकट हुआ था। इसी कारण इसे अत्यंत पवित्र माना गया है। हिंदू मान्यता के अनुसार, आंवले के वृक्ष में देवी-देवताओं का वास होता है इसलिए आमलकी एकादशी के दिन इसकी पूजा करना भगवान विष्णु की पूजा के समान माना जाता है।
काशी की प्रसिद्ध रंगभरी एकादशी
वाराणसी में आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव माता पार्वती का गौना कराकर इसी दिन पहली बार काशी आए थे। इसी कारण बाबा विश्वनाथ की नगरी में इस दिन विशेष उत्सव मनाया जाता है। श्रद्धालु गुलाल अर्पित करते हैं और होली के रंगों की शुरुआत करते हैं। काशी में रंगभरी एकादशी का उत्सव देखने के लिए दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं।
आमलकी एकादशी की पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थान को साफ करके भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल, धूप और दीप अर्पित करें।
- आंवले के वृक्ष के पास जाकर जल अर्पित करें।
- वृक्ष की परिक्रमा करें और उसकी पूजा करें।
- "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।
- विष्णु सहस्रनाम या विष्णु चालीसा का पाठ करें।
- फल, मिठाई और आंवले का भोग अर्पित करें।
- दिनभर व्रत रखकर भगवान का स्मरण करें।
- जरूरतमंद लोगों को दान-दक्षिणा दें।
आमलकी एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में वैदिश नाम का एक समृद्ध नगर था। वहां चैत्ररथ नाम के एक धर्मपरायण राजा शासन करते थे। उनकी प्रजा भी धार्मिक प्रवृत्ति की थी और सभी लोग नियमपूर्वक एकादशी का व्रत रखते थे। एक बार आमलकी एकादशी के दिन राजा और नगरवासी आंवले के वृक्ष की पूजा कर रहे थे। उसी समय एक शिकारी वहां पहुंचा। वह भूखा था और शिकार की तलाश में भटक रहा था। उसने देखा कि लोग पूरी रात भगवान का भजन-कीर्तन कर रहे हैं। वह भी वहीं बैठ गया और अनजाने में पूरी रात जागरण करता रहा।
कुछ समय बाद उस शिकारी की मृत्यु हो गई। लेकिन आमलकी एकादशी के दिन जागरण और भक्ति का पुण्य उसे प्राप्त हुआ। अगले जन्म में वह वसूरथ नाम का प्रतापी राजा बना। एक दिन राजा वसूरथ जंगल में भटक गए। तभी कुछ डाकुओं ने उन पर हमला कर दिया। जैसे ही डाकू उन्हें मारने वाले थे, राजा के शरीर से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई और उसने सभी डाकुओं का नाश कर दिया। जब राजा को होश आया तो उन्होंने पूछा कि उनकी रक्षा किसने की। तभी आकाशवाणी हुई कि यह सब पिछले जन्म में किए गए आमलकी एकादशी व्रत और जागरण का फल है।
FAQ
आमलकी एकादशी फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है, जो भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष को समर्पित है।
प्रश्न2. आमलकी एकादशी व्रत कब है?
27 फरवरी, शुक्रवार को है।
प्रश्न3. आमलकी एकादशी में क्या खाना चाहिए?
इस दिन आंवले का दान अत्यंत शुभ माना जाता है, साथ ही प्रसाद के रूप में आंवले का सेवन करना भी बहुत लाभकारी है।
प्रश्न4.आमलकी एकादशी का दूसरा नाम क्या है?
आंवला एकादशी और रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
प्रश्न5. क्या आमलकी एकादशी का दिन अच्छा है?
आमलकी एकादशी को पापों के निवारण, आध्यात्मिक चेतना को बढ़ाने और दैवीय आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
