Ganesh Chaturthi Kab Hai
हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी के पर्व का बहुत अधिक महत्व है। यह पर्व भगवान गणेश को समर्पित महत्वपूर्ण पर्वों में एक है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान गणेश का अवतार हुआ था, इसे विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि के देवता, रिद्धि-सिद्धि के दाता और प्रथम पूज्य माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य, यज्ञ, पूजा या मांगलिक कार्य की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन से ही की जाती है। मान्यता है कि उनकी आराधना करने से जीवन के सभी विघ्न और बाधाएं दूर हो जाती हैं तथा सुख, समृद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है।
गणेश चतुर्थी कब है ganesh chaturthi kab hai
साल 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर सोमवार के दिन मनाई जाएगी।
गणेश पूजा मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 08 मिनट से दोपहर 01 बजकर 36 मिनट तक।
अवधि: 02 घंटे 28 मिनट
गणेश चतुर्थी का महत्व
गणेश चतुर्थी का महत्व बहुत अधिक है। भारत के विभिन्न राज्यों में यह पर्व बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, लेकिन महाराष्ट्र में इसका विशेष महत्व है, जहां इसे गणेशोत्सव के रूप में दस दिनों तक मनाया जाता है। सनातन धर्म में भगवान गणेश को ज्ञान, बुद्धि, विवेक, सफलता और शुभता का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के दिन विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से व्यक्ति के जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। इस दिन भगवान गणेश के सिद्धिविनायक स्वरूप की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। श्रद्धापूर्वक पूजा करने से धन, वैभव, सम्मान, सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
गणेश चतुर्थी व्रत और पूजा विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि कार्यों से निवृत्त हो जाए।
- इसके बाद मंदिर को साफ करके भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
- एक कलश में जल भरकर उसके ऊपर स्वच्छ वस्त्र रखें।
- कलश के ऊपर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें।
- भगवान गणेश को सिंदूर और दूर्वा अर्पित करें।
- 21 लड्डुओं का भोग लगाएं।
- इनमें से 5 लड्डू भगवान गणेश को अर्पित करें।
- शेष लड्डू ब्राह्मणों, जरूरतमंदों या श्रद्धालुओं में वितरित करें।
- संध्या काल में गणेश जी की विशेष पूजा करें।
- गणेश चतुर्थी व्रत कथा का श्रवण करें।
- गणेश चालीसा और आरती का पाठ करें।
- पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें।
गणेश चतुर्थी पर इन बातों का रखें ध्यान
चंद्र दर्शन से बचें
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन चंद्र दर्शन करने से व्यक्ति को झूठे कलंक का सामना करना पड़ सकता है। यदि भूलवश चंद्र दर्शन हो जाए तो श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध के 57वें अध्याय का पाठ करना शुभ माना जाता है।
तुलसी पत्र न चढ़ाएं
भगवान गणेश की पूजा में तुलसी पत्र का उपयोग नहीं किया जाता। गणेश जी को दूर्वा, लाल पुष्प और मोदक अत्यंत प्रिय माने जाते हैं।
परिक्रमा का नियम
भगवान गणेश की एक परिक्रमा की जाती है, हालांकि कुछ परंपराओं में तीन परिक्रमा करने का भी विधान बताया गया है। परिक्रमा सदैव घड़ी की सुई की दिशा में और दाहिनी ओर से शुरू करनी चाहिए।
चतुर्थी के विभिन्न स्वरूप
संकष्टी गणेश चतुर्थी: प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी गणेश चतुर्थी कहा जाता है। यह व्रत संकटों और बाधाओं को दूर करने के लिए रखा जाता है।
वैनायकी गणेश चतुर्थी: शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को वैनायकी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
अंगारक चतुर्थी: जब गणेश चतुर्थी मंगलवार के दिन पड़ती है तो उसे अंगारक चतुर्थी कहा जाता है। यह अत्यंत शुभ मानी जाती है और इस दिन व्रत करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।
गणेश चतुर्थी की कथा
गणेश चतुर्थी को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित है। उनमें से एक यह है कि एक बार माता पार्वती स्नान करने जा रही थीं। उन्होंने अपने शरीर के उबटन से एक बालक की रचना की और उसमें प्राण स्थापित कर उसे द्वार पर पहरा देने के लिए नियुक्त कर दिया।उसी समय भगवान शिव वहां पहुंचे और अंदर जाने लगे। गणेश जी ने उन्हें रोक दिया। इससे भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने अपने त्रिशूल से गणेश जी का मस्तक अलग कर दिया। जब माता पार्वती को यह ज्ञात हुआ तो वे अत्यंत दुखी हुईं। उनके शोक को दूर करने के लिए भगवान शिव ने एक हाथी के बच्चे का सिर लाकर गणेश जी के धड़ पर स्थापित कर दिया। तभी से भगवान गणेश गजानन कहलाए।
एक अन्य कथा के अनुसार भगवान परशुराम भगवान शिव से मिलने कैलाश पहुंचे। उस समय भगवान शिव और माता पार्वती विश्राम कर रहे थे और गणेश जी द्वारपाल के रूप में पहरा दे रहे थे। गणेश जी ने परशुराम को अंदर जाने से रोका। इस बात से क्रोधित होकर परशुराम जी ने अपने परशु से गणेश जी पर प्रहार कर दिया, जिससे उनका एक दांत टूट गया। तभी से भगवान गणेश एकदंत के नाम से प्रसिद्ध हुए।
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FAQ
इस वर्ष गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी।
पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवान श्री गणेश जी का जन्म हुआ था।
बुद्धि के देवता भगवान गणेश हैं।
गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखना वर्जित है, क्योंकि इससे मिथ्या दोष लगता है।
गणेश चतुर्थी के भोजन में, मोदक विशेष रूप से प्रसिद्ध है।