हिंदू धर्म में भगवान शिव की उपासना के लिए कई व्रत और पर्व बताए गए हैं, जिनमें प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है। इस प्रकार साल में कुल 24 प्रदोष व्रत आते हैं। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से साधक के सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख, समृद्धि तथा सफलता प्राप्त होती है। उत्तर भारत में इस व्रत को प्रदोष व्रत कहा जाता है, जबकि दक्षिण भारत में इसे प्रदोषम के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत का पालन करता है, उस पर भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है।
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तिथि |
वार |
प्रदोष व्रत |
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01 जनवरी 2026 |
बृहस्पतिवार |
गुरु प्रदोष व्रत |
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16 जनवरी 2026 |
शुक्रवार |
शुक्र प्रदोष व्रत |
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30 जनवरी 2026 |
शुक्रवार |
शुक्र प्रदोष व्रत |
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14 फरवरी 2026 |
शनिवार |
शनि प्रदोष व्रत |
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01 मार्च 2026 |
रविवार |
रवि प्रदोष व्रत |
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16 मार्च 2026 |
सोमवार |
सोम प्रदोष व्रत |
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30 मार्च 2026 |
सोमवार |
सोम प्रदोष व्रत |
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15 अप्रैल 2026 |
बुधवार |
बुध प्रदोष व्रत |
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28 अप्रैल 2026 |
मंगलवार |
भौम प्रदोष व्रत |
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14 मई 2026 |
बृहस्पतिवार |
गुरु प्रदोष व्रत |
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28 मई 2026 |
बृहस्पतिवार |
गुरु प्रदोष व्रत |
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12 जून 2026 |
शुक्रवार |
शुक्र प्रदोष व्रत |
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27 जून 2026 |
शनिवार |
शनि प्रदोष व्रत |
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12 जुलाई 2026 |
रविवार |
रवि प्रदोष व्रत |
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26 जुलाई 2026 |
रविवार |
रवि प्रदोष व्रत |
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10 अगस्त 2026 |
सोमवार |
सोम प्रदोष व्रत |
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25 अगस्त 2026 |
मंगलवार |
भौम प्रदोष व्रत |
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08 सितंबर 2026 |
मंगलवार |
भौम प्रदोष व्रत |
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24 सितंबर 2026 |
बृहस्पतिवार |
गुरु प्रदोष व्रत |
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08 अक्टूबर 2026 |
बृहस्पतिवार |
गुरु प्रदोष व्रत |
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23 अक्टूबर 2026 |
शुक्रवार |
शुक्र प्रदोष व्रत |
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06 नवंबर 2026 |
शुक्रवार |
शुक्र प्रदोष व्रत |
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22 नवंबर 2026 |
रविवार |
रवि प्रदोष व्रत |
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06 दिसंबर 2026 |
रविवार |
रवि प्रदोष व्रत |
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21 दिसंबर 2026 |
सोमवार |
सोम प्रदोष व्रत |
प्रदोष संस्कृत शब्द है और यह दो शब्दों के योग से मिलकर बना है। 'प्र' जिसका अर्थ आगे या आरंभ होना है और दोष जिसका अर्थ रात्रि या अंधकार है। इस प्रकार प्रदोष का अर्थ है सूर्यास्त और रात्रि के बीच का वह शुभ समय, जिसे शिव आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना गया है। यह दिन भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन शिवलिंग का अभिषेक और मंत्र जाप करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और जीवन की बाधाएं, दुख और परेशानियां कम होती हैं। कई लोग विवाह, संतान सुख और पारिवारिक शांति की कामना के लिए प्रदोष व्रत रखते हैं। मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाता है।
ऐसी मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं और सभी देवता उनकी स्तुति करते हैं। इसलिए इस समय की गई पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। इस दिन शिव आराधना करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। जीवन के दुख और संकट दूर होते हैं। पाप कर्मों से मुक्ति मिलती है। वैवाहिक जीवन सुखमय बनता है। ग्रह दोषों से राहत मिलती है और साथ ही, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
पौराणिक कथा के अनुसार, एक दिन जब ब्राह्मणी भिक्षा मांगकर घर लौट रही थी, तो उसे रास्ते में एक घायल लड़का मिला। वह कोई और नहीं, बल्कि विदिशा या विदर्भ का राजकुमार था। शत्रुओं ने उसके राज्य पर आक्रमण कर उसके पिता को बंदी बना लिया था और वह जान बचाकर इधर-उधर भटक रहा था। ब्राह्मणी उस राजकुमार को घर ले आई और अपने पुत्र के समान उसका पालन-पोषण करने लगी। दोनों बालक बड़े होने लगे और प्रतिदिन माता के साथ भिक्षा मांगने जाते। एक दिन वे एक शिव मंदिर में पहुंचे, जहां शांडिल्य ऋषि उपस्थित थे। ऋषि ने ब्राह्मणी को प्रदोष व्रत की महिमा और विधि बताई। इसके बाद ब्राह्मणी और राजकुमार दोनों ने पूरी श्रद्धा और नियम के साथ प्रदोष व्रत करना शुरू कर दिया।
कुछ समय बाद, जब राजकुमार नदी किनारे घूम रहा था, तो उसे 'अंशुमती' नाम की एक गंधर्व कन्या मिली। गंधर्व कन्या राजकुमार पर मोहित हो गई और अपने पिता से उसका विवाह करने की इच्छा जताई। गंधर्वराज को जब पता चला कि वह विदर्भ का राजकुमार है, तो उन्होंने भगवान शिव की आज्ञा से अपनी पुत्री का विवाह उससे कर दिया। गंधर्वों की विशाल सेना की मदद से राजकुमार ने अपने शत्रुओं को हरा दिया और अपने पिता के राज्य (विदर्भ) पर पुनः अधिकार प्राप्त कर लिया।
इसके बाद, राजकुमार ने उस गरीब ब्राह्मणी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उसे अपने राजमहल में ससम्मान स्थान दिया और उसके पुत्र को अपना मुख्यमंत्री नियुक्त किया। यह कथा दर्शाती है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन और विश्वास के साथ प्रदोष व्रत का पालन करता है और त्रयोदशी के दिन शिव पूजा के पश्चात कथा सुनता या पढ़ता है, उस पर भगवान शंकर की विशेष कृपा बनी रहती है।
सोम प्रदोष व्रत: यह प्रदोष व्रत सोमवार को पड़ता है। विवाह, संतान सुख और पारिवारिक खुशहाली के लिए विशेष माना जाता है।
मंगल प्रदोष व्रत: मंगलवार को आने वाला प्रदोष व्रत मंगल प्रदोष कहलाता है। यह साहस, कर्ज मुक्ति और आर्थिक उन्नति के लिए शुभ माना जाता है।
शनि प्रदोष व्रत: शनिवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत शनि प्रदोष कहलाता है। मान्यता है कि यह शनि से जुड़ी परेशानियों को कम करने में सहायक होता है।
प्रश्न1. प्रदोष व्रत कैसे करें और क्या खाएं?
प्रदोष व्रत में त्रयोदशी तिथि के दिन सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें और 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें और सात्विक भोजन करें।
प्रश्न2. प्रदोष व्रत रखने से क्या लाभ होता है?
प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
प्रश्न3. प्रदोष के दिन शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए?
प्रदोष के दिन शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल, दूध, दही, शहद, और घी (पंचामृत) से अभिषेक करना चाहिए।
प्रश्न4. क्या प्रदोष के दिन बाल धोने चाहिए?
प्रदोष व्रत के दिन बाल धोना वर्जित माना जाता है।
प्रश्न5. प्रदोष व्रत में क्या न करें?
क्रोध और विवाद से बचें। मांसाहार और नशे का सेवन न करें। झूठ और छल-कपट से दूर रहें।
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