Trayodashi Kab Hai

हिंदू पंचांग में पड़ने वाली हर एक तिथि का अपना एक विशेष स्थान है, लेकिन त्रयोदशी trayodashi तिथि भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ और पवित्र मानी जाती है। यह तिथि भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। हिंदू पंचांग में चंद्र मास की तेरहवीं तिथि (13वें दिन) को त्रयोदशी trayodashi kab hai कहा जाता है। इसी तिथि की संध्या समय में यानी सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल पड़ता है, इसलिए इसे प्रदोष व्रत के लिए विशेष माना गया है। त्रयोदशी आत्मशुद्धि, भक्ति और भगवान शिव के प्रति समर्पण की तिथि मानी जाती है।

 त्रयोदशी trayodashi kab hai

 

तिथि

वार

पक्ष व तिथि

01 जनवरी 2026

गुरुवार

शुक्ल पक्ष त्रयोदशी

15 जनवरी

गुरुवार

कृष्ण पक्ष त्रयोदशी

30 जनवरी

शुक्रवार

शुक्ल पक्ष त्रयोदशी

14 फरवरी

शनिवार

कृष्ण पक्ष त्रयोदशी

28 फरवरी

शनिवार

शुक्ल पक्ष त्रयोदशी

16 मार्च

सोमवार

कृष्ण पक्ष त्रयोदशी (मधु कृष्ण)

30 मार्च

सोमवार

शुक्ल पक्ष त्रयोदशी

15 अप्रैल

बुधवार

कृष्ण पक्ष त्रयोदशी

28 अप्रैल

मंगलवार

शुक्ल पक्ष त्रयोदशी

14 मई

गुरुवार

कृष्ण पक्ष त्रयोदशी

28 मई

गुरुवार

शुक्ल पक्ष त्रयोदशी

12 जून

शुक्रवार

कृष्ण पक्ष त्रयोदशी

26 जून

शुक्रवार

शुक्ल पक्ष त्रयोदशी

12 जुलाई

रविवार

कृष्ण पक्ष त्रयोदशी

26 जुलाई

रविवार

शुक्ल पक्ष त्रयोदशी

10 अगस्त

सोमवार

कृष्ण पक्ष त्रयोदशी

25 अगस्त

मंगलवार

शुक्ल पक्ष त्रयोदशी

08 सितंबर

मंगलवार

कृष्ण पक्ष त्रयोदशी

23 सितंबर

बुधवार

शुक्ल पक्ष त्रयोदशी

07 अक्टूबर

बुधवार

कृष्ण पक्ष त्रयोदशी

23 अक्टूबर

शुक्रवार

शुक्ल पक्ष त्रयोदशी

06 नवंबर

शुक्रवार

कृष्ण पक्ष त्रयोदशी (धनत्रयोदशी)

22 नवंबर

रविवार

शुक्ल पक्ष त्रयोदशी

06 दिसंबर

रविवार

कृष्ण पक्ष त्रयोदशी

21 दिसंबर

सोमवार

शुक्ल पक्ष त्रयोदशी


 

त्रयोदशी तिथि का महत्व

त्रयोदशी तिथि हर माह दो बार पड़ती है एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। इसका निर्माण शुक्ल पक्ष में तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा का अंतर 145 डिग्री से 156 डिग्री अंश तक होता है। वहीं कृष्ण पक्ष में त्रयोदशी तिथि का निर्माण सूर्य और चंद्रमा का अंतर 313 से 336 डिग्री अंश तक होता है। त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव हैं। जीवन में प्रेम और दांपत्य सुख प्राप्ति के लिए इस तिथि में जन्मे जातकों को कामदेव की पूजा अवश्य करनी चाहिए।

त्रयोदशी तिथि का सबसे बड़ा महत्व प्रदोष व्रत के कारण माना जाता है। त्रयोदशी पर पूजा-पाठ और ध्यान करने से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति सकारात्मक सोच की ओर बढ़ता है।

त्रयोदशी तिथि पर योग

त्रयोदशी तिथि जिस वार को पड़ती है, उसके अनुसार विशेष योग बनते हैं और उसका फल भी शुभ अशुभ होता है। जैसे यदि त्रयोदशी तिथि बुधवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अशुभ योग माना जाता है। इसके अलावा त्रयोदशी तिथि मंगलवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय कार्य सिद्धि की प्राप्ति होती है। इसकी गिनती शुभ योगों में होती है। बता दें कि त्रयोदशी तिथि जया तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव की पूजा करना फलदायी माना जाता है लेकिन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव का पूजन वर्जित है।

त्रयोदशी के दिन क्या करें क्या न करें

क्या करें

  • भगवान शिव का ध्यान और पूजा करें।
  • शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करें।
  • प्रदोष व्रत रखें।
  • महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
  • जरूरतमंद लोगों को दान दें।
  • माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करें।
  • सात्विक भोजन और सकारात्मक विचार अपनाएं।

क्या न करें

  • क्रोध और विवाद से बचें।
  • मांसाहार और नशे का सेवन न करें।
  • झूठ और छल-कपट से दूर रहें।
  • किसी का अपमान न करें।
  • नकारात्मक सोच से बचें।
  • शिवलिंग पर तुलसी पत्र अर्पित न करें।

त्रयोदशी तिथि में पड़ने वाले प्रमुख व्रत व त्योहार

त्रयोदशी तिथि भगवान शिव की पूजा-आराधना के लिए बहुत अधिक फलदायी मानी जाती है। हिंदू धर्म में इस तिथि पर कई महत्वपूर्ण व्रत और पर्व मनाए जाते हैं, जिनका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व विशेष बताया गया है। मान्यता है कि त्रयोदशी तिथि पर श्रद्धापूर्वक व्रत, पूजा और दान-पुण्य करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन की सभी चुनौतियां कम हो जाती है।

प्रदोष व्रत

प्रदोष व्रत हिंदू धर्म में भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित एक महत्वपूर्ण और पवित्र व्रत है। यह व्रत हर महीने की दोनों पक्षों यानी कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। यह व्रत का भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। इस दिन शंकर जी की पूजा करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है और हर मनोकामना की पूर्ति होती है। इसके अलावा, यह व्रत साधक को मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति भी प्रदान करता है।

अनंग त्रयोदशी

यह पर्व मुख्य रूप से मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। कुछ क्षेत्रों में चैत्र मास की त्रयोदशी पर भी इसका विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के साथ-साथ कामदेव और उनकी पत्नी रति की आराधना करने का विधान है। मान्यता है कि अनंग त्रयोदशी का व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और सौहार्द बढ़ता है, दांपत्य संबंध मधुर बने रहते हैं तथा संतान सुख की प्राप्ति होती है। प्रेम संबंधों में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए भी यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है।

FAQ (Frequently Asked Questions)

प्रश्न1. त्रयोदशी तिथि का देवता कौन है?

यह तिथि चंद्रमा की तेरहवीं कला है, इस कला में अमृत का पान धन के देवता कुबेर करते हैं।

प्रश्न2. त्रयोदशी को क्या नहीं करना चाहिए?

इस दिन किसी को शाम के बाद नमक का दान न दें, न ही उधार करें।

प्रश्न3. त्रयोदशी का क्या अर्थ है?

हिंदू पंचांग की तेरहवीं तिथि को त्रयोदशी कहते हैं।

प्रश्न4. त्रयोदशी शुभ दिन है या नहीं?

यह सीखने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए सबसे अच्छे चंद्र दिवसों में से एक है, क्योंकि यह हमारे मन को अधिक तीक्ष्ण और तेज बनाता है।

प्रश्न5. त्रयोदशी व्रत करने से क्या लाभ होता है?

त्रयोदशी करने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं, दरिद्रता दूर होती है