जिस प्रकार सभी तिथियों का महत्व है वैसा ही महत्व सप्तमी तिथि का भी है। हिंदू पंचांग में यह सातवी तिथि है, जो सप्तमी कहलाती है। हिंदू कैलेंडर में सप्तमी तिथि महीने के दो बार आती है, एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। यह तिथि ऊर्जा, सफलता, बेहतर स्वास्थ्य और सम्मान का प्रतीक मानी जाती है। इस तिथि का संबंध विशेष रूप से सूर्य देव से है, इसलिए इसे तेज, आत्मविश्वास और उन्नति प्रदान करने वाली तिथि भी कहा जाता है। सनातन धर्म में इस तिथि में कई महत्वपूर्ण व्रत और पर्व भी मनाए जाते हैं, जिससे इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
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तिथि |
वार |
पक्ष तिथि |
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09 जनवरी 2026 |
शुक्रवार |
कृष्ण पक्ष सप्तमी |
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25 जनवरी 2026 |
रविवार |
शुक्ल पक्ष सप्तमी |
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08 फरवरी 2026 |
रविवार |
कृष्ण पक्ष सप्तमी |
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23 फरवरी 2026 |
सोमवार |
शुक्ल पक्ष सप्तमी |
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09 मार्च 2026 |
सोमवार |
कृष्ण पक्ष सप्तमी |
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24 मार्च 2026 |
मंगलवार |
शुक्ल पक्ष सप्तमी |
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08 अप्रैल 2026 |
बुधवार |
कृष्ण पक्ष सप्तमी |
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22 अप्रैल 2026 |
बुधवार |
शुक्ल पक्ष सप्तमी |
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08 मई 2026 |
शुक्रवार |
कृष्ण पक्ष सप्तमी |
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22 मई 2026 |
शुक्रवार |
शुक्ल पक्ष सप्तमी |
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07 जून 2026 |
रविवार |
कृष्ण पक्ष सप्तमी |
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20 जून 2026 |
शनिवार |
शुक्ल पक्ष सप्तमी |
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06 जुलाई 2026 |
सोमवार |
कृष्ण पक्ष सप्तमी |
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20 जुलाई 2026 |
सोमवार |
शुक्ल पक्ष सप्तमी |
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04 अगस्त 2026 |
मंगलवार |
कृष्ण पक्ष सप्तमी |
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18 अगस्त 2026 |
मंगलवार |
शुक्ल पक्ष सप्तमी |
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03 सितंबर 2026 |
गुरुवार |
कृष्ण पक्ष सप्तमी |
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17 सितंबर 2026 |
शनिवार |
शुक्ल पक्ष सप्तमी |
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02 अक्टूबर 2026 |
शुक्रवार |
कृष्ण पक्ष सप्तमी |
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17 अक्टूबर 2026 |
शनिवार |
शुक्ल पक्ष सप्तमी |
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31 अक्टूबर 2026 |
शनिवार |
कृष्ण पक्ष सप्तमी |
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16 नवंबर 2026 |
सोमवार |
शुक्ल पक्ष सप्तमी |
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30 नवंबर 2026 |
सोमवार |
कृष्ण पक्ष सप्तमी |
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15 दिसंबर 2026 |
मंगलवार |
शुक्ल पक्ष सप्तमी |
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29 दिसंबर 2026 |
मंगलवार |
कृष्ण पक्ष सप्तमी |
शास्त्रों में सप्तमी तिथि को मित्रापदा तिथि भी कहा गया है। यह तिथि शुभ कार्यों, नई शुरुआत और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अनुकूल मानी जाती है इसलिए इस दिन शुभ व धार्मिक कार्य करना श्रेष्ठ माना जाता है। सप्तमी तिथि के स्वामी सूर्यदेव हैं। इसलिए इस दिन सूर्य देव की पूजा और अर्घ्य देने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि सूर्य उपासना से व्यक्ति को अच्छी सेहत व सम्मान मिलता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सप्तमी तिथि नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास से जुड़ी हुई है। इस दिन किए गए प्रयास व्यक्ति को सफलता की ओर ले जाने वाले माने जाते हैं। सूर्य देव स्वास्थ्य के कारक हैं इसलिए सप्तमी पर सूर्य पूजा करने से शारीरिक और मानसिक ऊर्जा बढ़ती है।
रथ सप्तमी: माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को रथ सप्तमी मनाई जाती है। इसे सूर्य जयंती भी कहा जाता है। इस दिन सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है और स्वास्थ्य लाभ की कामना की जाती है।
गंगा सप्तमी: वैशाख मास की शुक्ल पक्ष सप्तमी को गंगा सप्तमी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा का पुनः प्राकट्य हुआ था। इस दिन गंगा स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है।
शीतला सप्तमी: चैत्र मास की कृष्ण पक्ष सप्तमी को शीतला सप्तमी मनाई जाती है। यह माता शीतला को समर्पित पर्व है। इस दिन माता की पूजा कर परिवार के अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है।
संतान सप्तमी: भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष सप्तमी को संतान सप्तमी मनाई जाती है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, सुख और सफलता के लिए व्रत रखती हैं।
विष्णु सप्तमी: मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष सप्तमी को विष्णु सप्तमी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इससे रुके हुए कार्य पूरे होने लगते हैं।
प्रश्न1.नवरात्र में सप्तमी तिथि कब है
वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि की सप्तमी 11 अक्टूबर 2026, रविवार को है।
प्रश्न2. सप्तमी तिथि का पंचांग क्या है?
हिंदू पंचांग की सातवीं तिथि को सप्तमी कहते हैं। यह तिथि मास में दो बार आती है।
प्रश्न3. सप्तमी तिथि का श्राद्ध कब है?
वर्ष 2026 में सप्तमी का श्राद्ध 3 अक्टूबर 2026 (शनिवार) को है।
प्रश्न4. दुर्गा पूजा वाला सप्तमी कब है?
वर्ष 2026 में दुर्गा पूजा की महा सप्तमी 18 अक्टूबर 2026 रविवार को है।
प्रश्न5. सप्तमी तिथि कौन सा भगवान है?
सप्तमी तिथि भगवान सूर्य को समर्पित है।
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