अष्टमी तिथि 2026 - Ashtami Kab Ki Hai

हिंदू कैलेंडर में अष्टमी तिथि का विशेष महत्व है। चंद्र मास की आठवीं तिथि अष्टमी कहलाती है। शास्त्रों में इसे कलावती तिथि भी कहा गया है। मान्यता है कि यह तिथि कला, ज्ञान, साहस और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती है। यह तिथि हर महीने में दो बार आती है, एक बार शुक्ल पक्ष में और दूसरी बार कृष्ण पक्ष में।

इस दौरान कई बड़े व प्रमुख व्रत और त्योहार भी पड़ते हैं, जिससे इस तिथि का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। अष्टमी तिथि शक्ति, साहस, विजय और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक मानी जाती है। यह तिथि विशेष रूप से भगवान शिव और माता दुर्गा की आराधना के लिए महत्वपूर्ण मानी गई है। अष्टमी तिथि को जया तिथियों की श्रेणी में रखा गया है यही वजह है कि इसे संघर्षों पर विजय और कठिन चुनौतियों से निकलने की ताकत देने वाली तिथि कहा जाता है।

अष्टमी कब है- Ashtami Tithi 2026

4. राधा अष्टमी: हिंदू पंचांग में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि  को राधाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। शास्त्रों में इस तिथि को श्री राधाजी का प्राकट्य दिवस माना गया है। श्री राधाजी वृषभानु की यज्ञ भूमि से प्रकट हुई थीं। इस दिन राधा-कृष्ण की पूजा करने से प्रेम, भक्ति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होने की मान्यता है।

5. सीता अष्टमी: हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को सीता अष्टमी मनाई जाती है। यह माता सीता को समर्पित पर्व माना जाता है। इसे जानकी जयंती भी कहा जाता है, हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है। इस दिन को माता सीता के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहे जीवनसाथी की कामना करती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा पूजा अष्टमी कब है?

वर्ष 2026 में दुर्गा पूजा की अष्टमी सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी।

अष्टमी तिथि किसे समर्पित है?

अष्टमी तिथि मुख्य रूप से माता दुर्गा की पूजा के लिए विशेष मानी जाती है।

क्या अष्टमी पर व्रत रखा जाता है?

हां, कई अष्टमी जैसे दुर्गाष्टमी, अहोई अष्टमी और राधा अष्टमी पर व्रत रखा जाता है।

अष्टमी पर क्या दान करना शुभ माना जाता है?

अन्न, वस्त्र, फल और जरूरतमंदों को भोजन कराना शुभ माना जाता है।

अष्टमी तिथि का मुख्य महत्व क्या है?

यह तिथि शक्ति, साहस, भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक मानी जाती है।