Ashtami Kab Hai?

हिंदू कैलेंडर में अष्टमी तिथि का विशेष महत्व है। चंद्र मास की आठवीं तिथि अष्टमी कहलाती है। शास्त्रों में इसे कलावती तिथि भी कहा गया है। मान्यता है कि यह तिथि कला, ज्ञान, साहस और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती है। यह तिथि हर महीने में दो बार आती है, एक बार शुक्ल पक्ष में और दूसरी बार कृष्ण पक्ष में।

इस दौरान कई बड़े व प्रमुख व्रत और त्योहार भी पड़ते हैं, जिससे इस तिथि का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। अष्टमी तिथि शक्ति, साहस, विजय और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक मानी जाती है। यह तिथि विशेष रूप से भगवान शिव और माता दुर्गा की आराधना के लिए महत्वपूर्ण मानी गई है। अष्टमी तिथि को जया तिथियों की श्रेणी में रखा गया है यही वजह है कि इसे संघर्षों पर विजय और कठिन चुनौतियों से निकलने की ताकत देने वाली तिथि कहा जाता है।

2026 में अष्टमी कब है (Ashtmi Kab Hai)

तिथि

वार

चंद्र पक्ष

10 जनवरी 2026

शनिवार

कृष्ण पक्ष अष्टमी

25 जनवरी 2026

रविवार

शुक्ल पक्ष अष्टमी (भीष्म अष्टमी)

09 फरवरी 2026

सोमवार

कृष्ण पक्ष अष्टमी

24 फरवरी 2026

मंगलवार

शुक्ल पक्ष अष्टमी

11 मार्च 2026

बुधवार

कृष्ण पक्ष अष्टमी

25 मार्च 2026

बुधवार

शुक्ल पक्ष अष्टमी (बुध अष्टमी, अशोक अष्टमी)

09 अप्रैल 2026

गुरुवार

कृष्ण पक्ष अष्टमी

23 अप्रैल 2026

गुरुवार

शुक्ल पक्ष अष्टमी

09 मई 2026

शनिवार

कृष्ण पक्ष अष्टमी

23 मई 2026

शनिवार

शुक्ल पक्ष अष्टमी

08 जून 2026

सोमवार

कृष्ण पक्ष अष्टमी

21 जून 2026

रविवार

शुक्ल पक्ष अष्टमी

07 जुलाई 2026

मंगलवार

कृष्ण पक्ष अष्टमी

21 जुलाई 2026

मंगलवार

शुक्ल पक्ष अष्टमी

05 अगस्त 2026

बुधवार

कृष्ण पक्ष अष्टमी

19 अगस्त 2026

बुधवार

शुक्ल पक्ष अष्टमी

04 सितंबर 2026 

शुक्रवार

कृष्ण पक्ष अष्टमी (कृष्ण जन्माष्टमी)

18 सितंबर 2026

शुक्रवार

शुक्ल पक्ष अष्टमी (ध्रुव अष्टमी, राधा अष्टमी)

03 अक्टूबर 2026

शनिवार

कृष्ण पक्ष अष्टमी (मध्य अष्टमी)

18 अक्टूबर 2026

रविवार

शुक्ल पक्ष अष्टमी (दुर्गा अष्टमी)

01 नवंबर 2026

रविवार

कृष्ण पक्ष अष्टमी (अहोई अष्टमी)

17 नवंबर 2026

मंगलवार

शुक्ल पक्ष अष्टमी (गोपाष्टमी)

01 दिसंबर 2026

मंगलवार

कृष्ण पक्ष अष्टमी

16 दिसंबर 2026

बुधवार

शुक्ल पक्ष अष्टमी

30 दिसंबर 2026

बुधवार

कृष्ण पक्ष अष्टमी

 

अष्टमी तिथि का महत्व

अष्टमी तिथि का संबंध देवी शक्ति से माना गया है। इसलिए इस दिन मां दुर्गा की पूजा विशेष महत्व है। मान्यता है कि मां दुर्गा की कृपा से व्यक्ति को साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है और हर कार्य का सकारात्मक परिणाम प्राप्त होता है।अष्टमी तिथि के स्वामी देव भगवान शिव माने गए हैं। इसलिए इस दिन शिव पूजा, मंत्र जाप और ध्यान करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

शास्त्रों के अनुसार अष्टमी तिथि नई कला, संगीत, नृत्य, अभिनय और अन्य रचनात्मक कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ मानी जाती है। कई लोग इस दिन नई शिक्षा या प्रशिक्षण शुरू करते हैं। 

अष्टमी तिथि पर क्या करें क्या न करें

क्या करें

  • नई कला या कौशल सीखना।
  • संगीत, नृत्य और अभिनय की शुरुआत करना।
  • नए वस्त्र और आभूषण खरीदना।
  • भवन निर्माण से जुड़े कार्य शुरू करना।
  • धार्मिक अनुष्ठान करना।
  • यात्रा की योजना बनाना।
  • साहस और पराक्रम से जुड़े कार्य करना।

क्या न करें

  • नारियल का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • अनावश्यक विवाद और क्रोध से दूर रहना चाहिए।
  • नकारात्मक विचारों को मन में नहीं रखना चाहिए।
  • किसी का अपमान नहीं करना चाहिए।

अष्टमी पर मनाए जाने वाले मुख्य पर्व व त्योहार

दुर्गाष्टमी (महाअष्टमी): हिंदू धर्म में दुर्गाष्टमी को सबसे शुभ दिनों में एक माना गया है। इसे महाअष्टमी भी कहा जाता है। यह त्योहार  नवरात्रि के आठवें दिन मनाया जाता है, जो देवी दुर्गा के सम्मान में किए जाने वाले आयोजनों का सबसे महत्वपूर्ण और आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली दिन माना जाता है। इस दिन कई लोग कन्या पूजन भी करते हैं। इस दिन माता दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा करने का विधान है।

अहोई अष्टमी: हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी को अहोई अष्टमी मनाई जाती है। अहोई अष्टमी व्रत का दिन करवा चौथ के चार दिन पश्चात तथा दीवाली पूजा से आठ दिन पूर्व पड़ता है। करवा चौथ के समान ही अहोई अष्टमी भी उत्तर भारत में अधिक लोकप्रिय है। अहोई अष्टमी को अहोई आठें के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, सुख और समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। शाम को तारे देखकर व्रत खोला जाता है और अहोई माता की पूजा की जाती है।

शीतला अष्टमी: हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शीतला अष्टमी मनाई जाती है। यह माता शीतला को समर्पित पर्व है, इन्हें  चेचक, खसरा और अन्य मौसमी बीमारियों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। शीतलाष्टमी को कई जगहों पर 'बसोड़ा' भी कहा जाता है। यह हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है जो मुख्य रूप से चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बासी भोजन ग्रहण करने की परंपरा भी है।

राधा अष्टमी: हिंदू पंचांग में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि  को राधाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। शास्त्रों में इस तिथि को श्री राधाजी का प्राकट्य दिवस माना गया है। श्री राधाजी वृषभानु की यज्ञ भूमि से प्रकट हुई थीं। इस दिन राधा-कृष्ण की पूजा करने से प्रेम, भक्ति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होने की मान्यता है।

सीता अष्टमी: हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को सीता अष्टमी मनाई जाती है। यह माता सीता को समर्पित पर्व माना जाता है। इसे जानकी जयंती भी कहा जाता है, हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है। इस दिन को माता सीता के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहे जीवनसाथी की कामना करती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा पूजा अष्टमी कब है?

वर्ष 2026 में दुर्गा पूजा की अष्टमी सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी।

अष्टमी तिथि किसे समर्पित है?

अष्टमी तिथि मुख्य रूप से माता दुर्गा की पूजा के लिए विशेष मानी जाती है।

क्या अष्टमी पर व्रत रखा जाता है?

हां, कई अष्टमी जैसे दुर्गाष्टमी, अहोई अष्टमी और राधा अष्टमी पर व्रत रखा जाता है।

अष्टमी पर क्या दान करना शुभ माना जाता है?

अन्न, वस्त्र, फल और जरूरतमंदों को भोजन कराना शुभ माना जाता है।

अष्टमी तिथि का मुख्य महत्व क्या है?

यह तिथि शक्ति, साहस, भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक मानी जाती है।