ज्योतिष में तृतीया तिथि (tritiya tithi) का विशेष महत्व है। हिंदू पंचांग में तीसरी तिथि तृतीया कहलाती है। इसकी स्वामिनी माता गौरी हैं और स्वामी भगवान विष्णु हैं। हिंदी में इसे ततिया, तइया, तेजा, तीजा, तीज, त्रीज और त्रीजा जैसे नामों से जाना जाता है। इसके अलावा, इस तिथि को जया तिथि भी कही जाती है क्योंकि माना जाता है कि इस तिथि में किए गए कार्य में विजय की प्राप्ति होती है। इसका निर्माण शुक्ल पक्ष में तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा का अंतर 25 डिग्री से 36 डिग्री अंश तक होता है।
आइए अब आगे बढ़ते हैं और जानते हैं साल 2026 में तृतीया तिथियां कब है, महत्व व इस दिन बनने वाले योग आदि के बारे में।
तृतीया तिथि को समृद्धि, सौभाग्य और नई शुरुआत से जोड़ा जाता है। नीचे जानें, साल 2026 में तृतीया तिथि कब-कब पड़ रही है।
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तिथि |
दिन |
चंद्र पक्ष |
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05 जनवरी, 2026 |
सोमवार |
कृष्ण पक्ष तृतीया |
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21 जनवरी, 2026 |
बुधवार |
शुक्ल पक्ष तृतीया |
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04 फरवरी, 2026 |
बुधवार |
कृष्ण पक्ष तृतीया |
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19 फरवरी, 2026 |
गुरुवार |
शुक्ल पक्ष तृतीया |
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05 मार्च, 2026 |
गुरुवार |
कृष्ण पक्ष तृतीया |
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21 मार्च, 2026 |
शनिवार |
शुक्ल पक्ष तृतीया |
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04 अप्रैल, 2026 |
शनिवार |
कृष्ण पक्ष तृतीया |
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19 अप्रैल, 2026 |
रविवार |
शुक्ल पक्ष तृतीया |
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04 मई, 2026 |
सोमवार |
कृष्ण पक्ष तृतीया |
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18 मई, 2026 |
सोमवार |
शुक्ल पक्ष तृतीया |
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02 जून, 2026 |
मंगलवार |
कृष्ण पक्ष तृतीया |
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17 जून, 2026 |
बुधवार |
शुक्ल पक्ष तृतीया |
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02 जुलाई, 2026 |
गुरुवार |
कृष्ण पक्ष तृतीया |
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16 जुलाई, 2026 |
गुरुवार |
शुक्ल पक्ष तृतीया |
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31 जुलाई, 2026 |
शुक्रवार |
कृष्ण पक्ष तृतीया |
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14 अगस्त, 2026 |
शुक्रवार |
शुक्ल पक्ष तृतीया |
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30 अगस्त, 2026 |
रविवार |
कृष्ण पक्ष तृतीया |
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13 सितंबर, 2026 |
रविवार |
शुक्ल पक्ष तृतीया |
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28 सितंबर , 2026 |
सोमवार |
कृष्ण पक्ष तृतीया |
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12 अक्टूबर, 2026 |
सोमवार |
शुक्ल पक्ष तृतीया |
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28 अक्टूबर, 2026 |
बुधवार |
कृष्ण पक्ष तृतीया |
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11 नवंबर, 2026 |
बुधवार |
शुक्ल पक्ष तृतीया |
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26 नवंबर, 2026 |
गुरुवार |
कृष्ण पक्ष तृतीया |
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11 दिसंबर, 2026 |
शुक्रवार |
शुक्ल पक्ष तृतीया |
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25 दिसंबर, 2026 |
शुक्रवार |
कृष्ण पक्ष तृतीया |
तृतीया को धार्मिक दृष्टि से बहुत ही शुभ माना जाता है। विशेष रूप से शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर पूजा पाठ, दान पुण्य व पितरों का तर्पण करने से सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं। मान्यता है कि इसमें किए गए शुभ कार्य में विजय की प्राप्त होती है। ऐसे में, नए बिजनेस की शुरुआत करना, अदालती मामलों का निपटारा करना और वाहन खरीदना शुभ माना जाता है। इस तिथि में पड़ने वाले त्योहार जैसे अक्षय तृतीया, हरियाली तीज, कजरी तीज इसका महत्व और अधिक बढ़ा देते हैं।
जैसा कि ऊपर बताया जा चुका है कि तृतीया तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है और इस तिथि में यदि किसी योग का निर्माण हो जाए तो इसका महत्व और अधिक हो जाता है। हिंदू पंचांग में यदि किसी भी पक्ष (शुक्ल या कृष्ण) में तृतीया तिथि मंगलवार को पड़ती है, तो सिद्ध योग बनता है। यह योग बहुत अधिक फलदायी होता है, इसलिए इस योग में किए गए कार्य का परिणाम भी अच्छा होता है।
इसके अलावा किसी माह में यदि तृतीया तिथि बुधवार के दिन पड़ती है तो मृत्युदा योग बनता है। इसे अशुभ योग माना जाता है और इस दौरान कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। वहीं, भाद्रपद माह की तृतीया तिथि को शून्य तिथि माना जाता है
इस तिथि से जुड़े कई पर्वों का संबंध सुख-समृद्धि, सौभाग्य और परिवार की खुशहाली से माना जाता है। आइए जानते हैं इस तिथि में कौन से पर्व व त्योहार मनाए जाते हैं।
हिन्दू पंचांग में रिक्ता तिथि (चौथ, नौमी, चौदश यानी चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) को सामान्यतः शुभ कार्यों के लिए अशुभ या त्याज्य माना जाता है।
वर्ष 2026 में तृतीया तिथि का श्राद्ध 29 सितंबर 2026 (मंगलवार) को है।
मांगलिक कार्यों के लिए द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी तिथियों को सबसे शुभ माना गया है।
ज्योतिष और पंचांग के अनुसार रिक्त तिथियां (चौथ/चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी), अमावस्या, पूर्णिमा, और अष्टमी को लंबी यात्रा के लिए अशुभ माना जाता है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार, तृतीया तिथि चंद्र मास का तीसरा दिन है। यह एक महीने में दो बार आती है