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एकादशी व्रत कैलेंडर 2026

प्रत्येक चंद्र पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, भगवान विष्णु को समर्पित — 2026 की सभी 24 एकादशी तिथियाँ, पारण समय और व्रत नियम।

व्रत के बारे में पूछें

क्या आज एकादशी है?

नहीं, हिंदू पंचांग के अनुसार सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को एकादशी तिथि नहीं है। अगली एकादशी मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को है।

अगली एकादशीकल

इंदिरा एकादशी

पूर्वजों की आत्मा को मुक्ति देता है — भगवान विष्णु को समर्पित ग्यारहवीं तिथि।

तिथि
6 अक्टूबर 2026
पक्ष
Krishna
चंद्र मास
Ashwina
व्रत
अन्न-रहित व्रत

2026 की सभी 24 एकादशी तिथियाँ

कृष्ण पक्ष · ढलता चंद्रमाशुक्ल पक्ष · बढ़ता चंद्रमा

एकादशी व्रत कैसे करें

प्रातःकालीन संकल्प से लेकर द्वादशी पर पारण तक — चार सरल चरणों का व्रत।

संकल्प एवं स्नान

ब्रह्म मुहूर्त में उठें, स्नान करें और शुद्ध एवं स्थिर मन से व्रत का संकल्प लें।

विष्णु पूजा

तुलसी, पुष्प, धूप और घी के दीपक से भगवान विष्णु की पूजा करें; फल और पंचामृत अर्पित करें।

उपवास एवं जाप

अन्न और दालों का त्याग करें। दिन भर जप, कथा और दान में लगे रहें और रात्रि जागरण करें।

पारण

द्वादशी की प्रातःकाल में निर्धारित समय-सीमा के भीतर, दीन-दुखियों को भोजन कराने के बाद व्रत तोड़ें।

समय अनुमानित हैं और आपके शहर के अनुसार बदलते हैं। आज का पंचांग देखें सटीक तिथि और पारण समय के लिए।

क्या करें और क्या न करें

✓क्या करें

  • •सूर्योदय पर संकल्प लें और अन्न-दाल रहित व्रत रखें
  • •तुलसी, घी का दीपक और विष्णु सहस्रनाम के साथ भगवान विष्णु की पूजा करें
  • •दिन भर जप, कथा और दान में लगे रहें; रात्रि जागरण (जागरण) करें
  • •अगली सुबह द्वादशी पारण समय-सीमा के भीतर व्रत तोड़ें

✗क्या न करें

  • ✗चावल, गेहूँ, दालें और समस्त अन्न — व्रत की अवधि तक
  • ✗प्याज, लहसुन, माँसाहार और मद्यपान
  • ✗एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना
  • ✗क्रोध, झूठ और निंदा — और पूजा के समय सोना

सनातन धर्म में एकादशी बहुत ही पवित्र और मोक्ष प्राप्त करने वाली तिथि मानी जाती है, जो हर माह पड़ती है। इस दिन व्रत रखते हैं और नियमानुसार पूजा पाठ करते हैं। यह वजह है कि लोग एकादशी कब की है ekadashi kab hai यह जानना चाहते हैं। एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने, मंत्रों का जाप करने और नाम स्मरण करने से व्यक्ति को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। कई हिंदू ग्रंथों में एकादशी व्रत को सभी व्रतों और धार्मिक अनुष्ठानों से भी अधिक महत्वपूर्ण बताया गया है इसलिए लाखों लोग श्रद्धा और विश्वास के साथ हर माह एकादशी का व्रत विधि-विधान से करते हैं।

एकादशी का महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार, चंद्र पखवाड़े का ग्यारहवां दिन एकादशी कहलाती है। एकादशी संस्कृत भाषा से लिया गया शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘ग्यारह’। हर महीने दो एकादशी आती हैं, एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। जो एकादशी अमावस्या के बाद आती है उसे शुक्ल पक्ष की एकादशी कहते हैं और जो पूर्णिमा के बाद आती है उसके कृष्ण पक्ष की एकादशी कहते हैं। इस प्रकार पूरे साल में लगभग 24 एकादशी पड़ती है। अधिमास पड़ने पर 26 एकादशी की तिथि भी पड़ सकती है। एकादशी बहुत ही शुभ तिथि मानी जाती है।

धार्मिक ग्रंथों में एकादशी को 'हरि वासर' और 'हरि दिवस' भी कहा गया है। इस शब्द का अर्थ है भगवान विष्णु का प्रिय दिन। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा और व्रत रखने से व्यक्ति को विशेष फल की प्राप्ति होती है। पद्म पुराण, स्कंद पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में एकादशी व्रत की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है। ऐसा कहा जाता है कि एकादशी का व्रत व्यक्ति को न केवल आध्यात्मिक लाभ देता है, बल्कि मन और शरीर को भी शुद्ध करता है। यह नहीं हिंदू मान्यता है कि एकादशी का व्रत करने से पितरों को भी शुभ फल प्राप्त होता है और परिवार पर भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है।

एकादशी की पूजा विधि

  • इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ कपड़े धारण करें।
  • इसके बाद पूजा स्थान की सफाई करें और फिर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  • इसके अलावा, भगवान विष्णु को पीले फूल, चंदन, अक्षत और तुलसी दल अर्पित करें।
  • धूप और घी का दीप जलाकर विधि विधान से पूजा करें।
  • भगवान को पीले फल, मिठाई या व्रत का भोग अर्पित करें।
  • पूजा करने के दौरान "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।
  • विष्णु सहस्रनाम, विष्णु चालीसा या भगवद्गीता का पाठ करें।
  • इसके अलावा, कथा जरूर पढ़ें। माना जाता है बिना कथा सुनें या पढ़ें पूजा सफल नहीं होती है।
  • आखिर में, भगवान विष्णु की आरती करें।
  • एकादशी के दिन रात में सोना वर्जित माना जाता है इसलिए इस दिन भजन-कीर्तन और भगवान का स्मरण करें।
  • जरूरतमंद लोगों को दान-दक्षिणा दें।
  • द्वादशी तिथि में पूजा के बाद व्रत का पारण करें।

एकादशी के दिन क्या करें क्या न करें

क्या करें

  • भगवान विष्णु की आराधना करें। 
  • क्रोध और विवाद से बचना चाहिए।
  • भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
  • जरूरतमंद लोगों को दान-दक्षिणा दें।
  • मन, वचन और कर्म से पवित्र रहने का प्रयास करें।
  • भगवान का भजन-कीर्तन और ध्यान करें।

क्या न करें

  • चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • मांसाहार और नशे से दूर रहना चाहिए।
  • किसी का अपमान नहीं करना चाहिए।
  • झूठ और नकारात्मक सोच से दूर रहना चाहिए।
  • तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • जरूरत से ज्यादा सोने और आलस्य करने से बचें।
  • व्रत के नियमों की अनदेखी न करें।

2026 में एकादशी कब है ekadashi vrat kab hai

वर्ष भर आने वाली 24 नियमित और अधिमास में आने वाली 2 अतिरिक्त एकादशियों सहित कुल 26 एकादशियों के होती है। आइए जानते हैं 2026 में एकादशी कब है ekadashi kis din hai।

तिथि

वार

एकादशी

14 जनवरी, 2026

बुधवार

षटतिला एकादशी

29 जनवरी 2026

गुरुवार

जया एकादशी

13 फरवरी 2026

शुक्रवार

विजया एकादशी

27 फरवरी 2026

शुक्रवार

आमलकी एकादशी

15 मार्च 2026

रविवार

पापमोचिनी एकादशी

29 मार्च 2026

रविवार

कामदा एकादशी

13 अप्रैल 2026

सोमवार

वरुथिनी एकादशी

27 अप्रैल 2026

सोमवार

मोहिनी एकादशी

13 मई 2026

बुधवार

अपरा एकादशी

27 मई 2026

बुधवार

पद्मिनी एकादशी

11 जून 2026

गुरुवार

परम एकादशी

25 जून 2026

गुरुवार

निर्जला एकादशी

10 जुलाई 2026

शुक्रवार

योगिनी एकादशी

25 जुलाई 2026

शनिवार

देवशयनी एकादशी

09 अगस्त 2026

रविवार

कामिका एकादशी

23 अगस्त 2026

रविवार

श्रावण एकादशी

07 सितंबर 2026

सोमवार

अजा एकादशी

22 सितंबर 2026

मंगलवार

परिवर्तिनी एकादशी

06 अक्टूबर 2026

मंगलवार

इंदिरा एकादशी

22 अक्टूबर 2026

गुरुवार

पापांकुशा एकादशी

05 नवंबर 2026 

गुरुवार

रमा एकादशी 

20 नवंबर 2026

शुक्रवार 

देवुत्थान एकादशी

04 दिसंबर 2026

शुक्रवार

उत्पन्ना एकादशी

20 दिसंबर 2026

रविवार

मोक्षदा एकादशी

 

हर एकादशी का अपना अलग महत्व, नाम और कथा होती है। लेकिन कुछ एकादशी को बहुत ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। देवशयनी एकादशी, निर्जला एकादशी, देवउठनी एकादशी, मोक्षदा एकादशी और पुत्रदा एकादशी आदि।

देवशयनी एकादशी

देवशयनी एकादशी को हरिशयनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसी दिन से चातुर्मास की शुरुआत होती है और मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है।

निर्जला एकादशी

निर्जला एकादशी को सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक माना जाता है। इस दिन बिना जल ग्रहण किए व्रत रखा जाता है।  मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से वर्ष भर की सभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त होता है।

देवउठनी एकादशी

देवउठनी एकादशी को प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं। इसके बाद विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत होती है।

मोक्षदा एकादशी

मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष मास में आती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को गीता का उपदेश देने के कारण गीता जयंती भी मनाई जाती है।

पुत्रदा एकादशी

पुत्रदा एकादशी संतान सुख और संतान की उन्नति के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ इस व्रत को करने से संतान प्राप्ति और संतान के सुखी जीवन का आशीर्वाद मिलता है।

FAQ

जून 2026 में दो एकादशी पड़ रही हैं परमा एकादशी और निर्जला एकादशी।

प्रश्न2. अगस्त में एकादशी कब है?

पहली कामिका एकादशी 9 अगस्त को और दूसरी श्रावण पुत्रदा एकादशी 23 अगस्त को मनाई जाएगी।

प्रश्न3. निर्जला एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा?

वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026, गुरुवार को रखा जाएगा।

प्रश्न4. एकादशी का दिन क्या है?

एकादशी वैष्णव परंपरा में महीने में दो बार मनाया जाने वाला एक पवित्र उपवास दिवस है, जो भगवान विष्णु और भगवान कृष्ण को समर्पित है।

प्रश्न5. एकादशी को सिर धोना चाहिए?

एकादशी के दिन सिर (बाल) नहीं धोना चाहिए