सनातन धर्म में किसा भी व्रत, त्योहार, पूजा-पाठ या शुभ कार्य का निर्धारण तिथि देखकर किया जाता है इसलिए हिंदू पंचांग में तिथि का बहुत अधिक महत्व है। तिथि हर माह दो बार पड़ती है एक शुक्ल पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में। तिथि में शुक्ल पक्ष में तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा का अंतर 0 डिग्री से 12 डिग्री अंश तक होता है। वहीं कृष्ण पक्ष में प्रतिपदा तिथि का निर्माण सूर्य और चंद्रमा का अंतर 181 से 192 डिग्री अंश तक होता है।
हिंदू पंचांग की पहली तिथि प्रतिपदा तिथि होती है है, जिसका अर्थ है मार्ग। प्रतिपदा तिथि को संस्कृत में प्रतिपदा तथा हिंदी में पड़वा, परेवा या पड़वा तिथि भी कहा जाता है। प्रतिपदा तिथि को नई शुरुआत, उत्साह, ऊर्जा और शुभ कार्यों का प्रतीक होता है। इसी तिथि से चंद्रमा अपनी नई यात्रा आरंभ करता है, इसलिए यह तिथि नए संकल्पों और नई योजनाओं की शुरुआत के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
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तिथि |
वार |
पक्ष |
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03 जनवरी 2026 |
शनिवार |
कृष्ण पक्ष |
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19 जनवरी 2026 |
सोमवार |
शुक्ल पक्ष |
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02 फरवरी 2026 |
सोमवार |
कृष्ण पक्ष |
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17 फरवरी 2026 |
मंगलवार |
शुक्ल पक्ष |
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03 मार्च 2026 |
मंगलवार |
कृष्ण पक्ष |
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19 मार्च 2026 |
गुरुवार |
शुक्ल पक्ष |
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02 अप्रैल 2026 |
गुरुवार |
कृष्ण पक्ष |
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17 अप्रैल 2026 |
शुक्रवार |
शुक्ल पक्ष |
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01 मई 2026 |
शुक्रवार |
कृष्ण पक्ष |
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17 मई 2026 |
रविवार |
शुक्ल पक्ष |
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31 मई 2026 |
रविवार |
कृष्ण पक्ष |
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15 जून 2026 |
सोमवार |
शुक्ल पक्ष |
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30 जून 2026 |
मंगलवार |
कृष्ण पक्ष |
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14 जुलाई 2026 |
मंगलवार |
शुक्ल पक्ष |
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29 जुलाई 2026 |
बुधवार |
कृष्ण पक्ष |
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12 अगस्त 2026 |
बुधवार |
शुक्ल पक्ष |
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28 अगस्त 2026 |
शुक्रवार |
कृष्ण पक्ष |
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11 सितंबर 2026 |
शुक्रवार |
शुक्ल पक्ष |
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26 सितंबर 2026 |
शनिवार |
कृष्ण पक्ष |
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10 अक्टूबर 2026 |
शनिवरा |
शुक्ल पक्ष |
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26 अक्टूबर 2026 |
सोमवार |
कृष्ण पक्ष |
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09 नवंबर 2026 |
सोमवार |
शुक्ल पक्ष |
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24 नवंबर 2026 |
मंगलवार |
कृष्ण पक्ष |
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09 दिसंबर 2026 |
बुधवार |
शुक्ल पक्ष |
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24 दिसंबर 2026 |
गुरुवार |
कृष्ण पक्ष |
प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्निदेव हैं। अग्नि को पवित्रता, ऊर्जा, तेज और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इस तिथि में अग्निदेव की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सफलता और शुभ फल प्राप्त होने की मान्यता है। जिन लोगों का जन्म प्रतिपदा तिथि में होता है, उन्हें विशेष रूप से अग्निदेव का पूजन करने की सलाह दी जाती है। प्रतिपदा तिथि को नई शुरुआत और शुभता की तिथि माना जाता है। कई महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व और उत्सव की शुरुआत इसी तिथि से होते हैं। हिंदू नववर्ष, नवरात्रि और गोवर्धन पूजा जैसे प्रमुख पर्व प्रतिपदा तिथि पर मनाए जाते हैं। यह तिथि व्यक्ति को जीवन में नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान करने वाली मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ, दान-पुण्य और आध्यात्मिक कार्य करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
यदि प्रतिपदा तिथि रविवार या मंगलवार को पड़े तो मृत्युदा योग बनता है। इस योग में शुभ कार्यों और बड़े फैसले न लेने की सलाह दी जाती है। यदि प्रतिपदा तिथि शुक्रवार को पड़े तो इसे सिद्धा तिथि कहा जाता है। इस दिन किए गए शुभ कार्यों में सफलता मिलने की मान्यता है। भाद्रपद माह की प्रतिपदा को शून्य तिथि माना गया है। शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा में भगवान शिव का पूजन नहीं करना चाहिए। वहीं कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा में भगवान शिव की पूजा शुभ फलदायी मानी गई है।
हिंदू नववर्ष: हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष का आरंभ होता है। इसे सृष्टि की रचना का दिन भी माना जाता है। इसके अलावा, यह वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक भी है। इसे अलग-अलग राज्यों में गुड़ी पड़वा, उगादी और नव संवत्सर के रूप में मनाया जाता है।
गोवर्धन पूजा: दीपावली के अगले दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन की पूजा की जाती है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा करने की स्मृति में मनाया जाता है। गोवर्धन पूजा को अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व का मुख्य उद्देश्य प्रकृति संरक्षण और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है। इस दिन श्रद्धालु विभिन्न प्रकार का व्यंजन बनाकर भगवान कृष्ण को अर्पित करते हैं।
नवरात्रि का प्रारंभ: नवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख और पवित्र त्योहार है जो नौ दिनों तक चलता है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। साल में कुल चार नवरात्रि आती है, जिसे चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ नाम से जाना जाता है। जिनमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि प्रमुख माने जाते हैं।
प्रश्न1. प्रतिपदा का मतलब क्या होता है?
प्रतिपदा का अर्थ है, किसी पक्ष या महीने का पहला दिन।
प्रश्न2. प्रतिपदा के स्वामी कौन हैं?
प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्निदेव माने गए हैं।
प्रश्न3. प्रतिपदा क्यों मनाई जाती है?
यह दिन केवल कैलेंडर परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और चेतना के नव जागरण का प्रतीक है।
प्रश्न4. तिथि क्या है?
तिथि भारतीय पंचांग की एक समय इकाई है, जो सूर्य और चंद्रमा की गति पर आधारित होती है।
प्रश्न5. प्रतिपदा तिथि में कौन से काम नहीं करने चाहिए?
शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा में विवाह, गृह प्रवेश, वास्तु पूजन, उपनयन और यात्रा जैसे कार्य वर्जित माने गए हैं।
पहली चैट मुफ़्त