हिंदू धर्म में प्रत्येक मास की शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि यानी पूर्णिमा तिथि को बेहद पवित्र और पुण्यदायी कहा गया है। यह तिथि भगवान विष्णु, चंद्रदेव और माता लक्ष्मी को समर्पित है। चैत्र पूर्णिमा हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा होती है, जिसे आध्यात्मिक रूप से अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि चैत्र पूर्णिमा chait purnima के दिन व्रत, स्नान, दान, जप, तप और पूजा-पाठ करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन चंद्रमा अपने पूर्ण स्वरूप में दिखाई देता है, इसलिए इस दिन चंद्रमा की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है।
तिथि प्रारंभ: 1 अप्रैल 2026 बुधवार की सुबह 07 बजकर 06 मिनट से
तिथि समाप्त: 2 अप्रैल 2026 गुरुवार की सुबह 07 बजकर 41 मिनट तक
पूर्णिमा वह तिथि होती है जब चंद्रमा अपनी सोलहों कलाओं से पूर्ण होता है। हिंदू धर्म में इसे सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक होती है। चैत्र पूर्णिमा chait purnima हिंदू वर्ष की पहली पूर्णिमा होती है, इसलिए इसे अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। चैत्र पूर्णिमा के महत्व की बात करें तो इसका सबसे बड़ा महत्व यह है कि इस दिन संकट मोचन भगवान हनुमान का जन्मोत्सव मनाया जाता है। उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में हनुमान जयंती इसी दिन मनाई जाती है। भक्त इस दिन हनुमान मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ करते हैं। कई लोग जगह-जगह भंडारा का आयोजन करवाते हैं। मान्यता है कि हनुमान जी पूजा आराधना से व्यक्ति को भय, रोग, शत्रु बाधा और जीवन की चुनौतियों से निपटने का साहस मिलता है।
धार्मिक मान्यता है कि चैत्र पूर्णिमा पर गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान करने से पापों का नाश होता है। यदि नदी में स्नान करना संभव न हो तो इस दिन स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी शुभ माना जाता है। इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान देने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। चैत्र पूर्णिमा के पावन दिन अन्न का दान, जल से भरा घड़ा, चावल, सफेद वस्त्र, सफेद मिठाई, फल, जरूरतमंदों को भोजन आदि दान कर सकते हैं। मान्यता है कि इससे चंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
सुख और समृद्धि के लिए: इस दिन शाम के समय मां लक्ष्मी की पूजा कर लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें। साथ ही, उनके बीज मंत्र "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः" का जाप करें। इससे घर में धन, सुख और समृद्धि का आगमन होता है।
नकारात्मकता दूर करने के लिए: पूर्णिमा की रात बहुत अधिक महत्वपूर्ण होती है। घर में सुख-शांति व सकारात्मकता के लिए इस दिन रात के समय नदी, तालाब या किसी जलाशय में दीपदान करना शुभ माना गया है।
पितरों के आशीर्वाद के लिए: सनातन धर्म में पीपल के वृक्ष को देववृक्ष माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसके विभिन्न हिस्सों में 33 करोड़ देवी-देवता वास करते हैं। ऐसे में चैत्र पूर्णिमा के दिन पीपल के वृक्ष में जल व सफेद मिठाई अर्पित करने से पितरों का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है तथा घर में सुख-शांति बनी रहती है।
आर्थिक समस्याओं से निपटने के लिए: पूर्णिमा की रात चंद्रमा को अर्घ्य देने, भगवान विष्णु की पूजा करने और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से मानसिक तनाव दूर होता है और आर्थिक समस्याओं में राहत मिलती है।
सौभाग्य के लिए: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पूर्णिमा के दिन एकाक्षी नारियल की पूजा करने से धन प्राप्ति और सौभाग्य के योग बनते हैं।
प्रश्न1. सबसे शक्तिशाली पूर्णिमा कौन सी है?
हिन्दू पंचांग और ज्योतिष में शरद पूर्णिमा को सबसे अधिक शक्तिशाली और चमत्कारी माना जाता है।
प्रश्न2. चैत के महीने में क्या नहीं खाना चाहिए?
चैत्र महीने में गुड़, मसालेदार चीजें, खट्टी चीजें और मांस-मदिरा का सेवन करना नहीं करना चाहिए।
प्रश्न3. पूर्णिमा के दिन चावल खाना चाहिए कि नहीं?
पूर्णिमा के दिन चावल खाना पूरी तरह से सुरक्षित और शुभ माना जाता है।
प्रश्न4. पूर्णिमा के दिन कौन सा टोटका करना चाहिए?
इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देना, पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाना और माता लक्ष्मी को खीर का भोग लगाना सबसे फलदायी टोटके हैं।
प्रश्न5. पूर्णिमा के देवता कौन थे?
हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को चंद्र देव और भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष माना गया है।
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