काल सर्प दोष निवारण- Kaal Sarp Dosha Remedies Free

Posted On - December 3, 2019 | Posted By - Aacharya Sagar Ji | Read By -

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काल सर्प दोष निवारण- Kaal Sarp Dosha Remedies Free

काल” राहु और “सर्प” का केतु प्रभुत्व करते हैं। यथा, किसी भी व्यक्ति के जीवन में काल सर्प दोष तब बनता है जब राहु और केतु सभी ग्रहों पर प्रभाव डाल रहे हों या सरे ग्रह कुंडली में राहु-केतु के बीच में आजायें। शाब्दिक अर्थ में, काल ‘समय’ को संदर्भित करता है, सर्प को ‘सांप’ और ‘दोष’ अथार्थ ‘रोग’। यह एक विपत्तिपूर्ण ज्योतिषीय संभावना है जो कई दुर्भाग्य के साथ इसके जातक को प्रभावित कर सकता है। साथ ही, चूंकि राहु और केतु पिछले जीवन कर्मों को इंगित करते हैं, यह जातक के पिछले जन्मों में उनके द्वारा किए गए बहुत सारे अस्वस्थ बुरे कर्मों का फल भी होता है।

कुंडली में दोष प्रायः पीड़ा और दुःख का करक बनते हैं। कालसर्प दोष ऐसे ही दोषों में से एक है जिसके कारण जातक को लम्बे समय तक अशुभ और कष्टदायक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। काल सर्प दोष का एक प्रमुख प्रभाव यह है कि ऐसी स्थिति में राहु और केतु के अलावा बाकि सात ग्रहों कि शुभ दृष्टि से जातक वंचित हो जाता है। हालाँकि, यह जितना कष्टवर्दक होता है उतना ही फल दायक भी। परन्तु, इसका असर व्यक्ति जीवन में ४२ वर्षों के लिए होता है जो कि एक लम्बी अवधी है।

यथा, कल सर्प दोष का निवारण अत्यंत आवश्यक होता है। काल सर्प दोष निवारण के लिए उपाय कुछ इस प्रकार हैं-

Ghatak kaal sarp yog remedies in Hindi

  • सर्प देवता को प्रसन्न करने के बेहतर उपायों में से एक है भगवन शिव को प्रसन्न करना। यथा, सावन के महीने में प्रतिदिन १०८ बेल पत्र शिवलिंग पर चढ़ाये और ॐ नमः शिवाय का जप करें। इससे हमेशा लाभ प्राप्त होता है।
  • नाग देवता के सम्मान अवसर, नागपंचमी पर शिवलिंग पर नाग का जोड़ा चढाने से काल सर्प दोष का निवारण होता है।
  • शिवरात्रि पर शिवजी का अभिषेक करवाएं। इससे अत्यंत लाभ प्राप्ति होती है और साथ ही कष्ट और अशुभता से छुटकारा मिलता है।
Ghatak kaal sarp yog remedies in Hindi काल सर्प दोष

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  • प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर जल से अभिषेक करें साथ ही 5 माला महाम्रत्युन्जय मन्त्र का जप करें।
  • मछलियों को जल में छोड़े। काल सर्प दोष का मुख्य कारण पीछले जन्म में किये गए बुरे कर्म होते हैं, यथा, जातक को हर वह कार्य करना चाहिए जिससे पुण्य की प्राप्ति हो।
  • भगवन शिव को प्रसन्न करने के लिए ॐ नमः शिवाय का जप करें।
  • काल अथार्थ रोग को दूर करने और राहू के शुभ फल की प्राप्ति के लिए राहु का जप करें।
  • एक नियमित अंतराल पर शिवलिंग पर चन्दन का लेप करें और भोग लगाएं।
  • कालसर्प यंत्र अपने घर पर रखें और उसका नियमित पूजन करें।
  • मोर पंख नकारात्मक ऊर्जा को घर से दूर रखता है। यथा, घर में मोर पंख सदैव रखें।

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