राहु कवच पाठ- चमत्कारी लाभ से बदलें अपना जीवन

राहु कवच पाठ- चमत्कारी लाभ से बदलें अपना जीवन

राहु कवच पाठ

राहु एक छाया ग्रह है जिसका वैदिक ज्योतिष में एक बहुत महत्वपूर्ण अर्थ है। यह व्यक्ति के पिछले जीवन के ऐसे मनोग्रस्ति और लक्ष्यों को दर्शाता है जो अपूर्ण थे और वे इस जीवन में उन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए यहां हैं। हालांकि, यह समझने के लिए, आपको देखना होगा कि राहु कुंडली में किस राशि में स्थित है। राहु प्रतिबन्ध से बहार निकलने वाली सभी इच्छाओं का प्रतिनिधित्व करता है। साथ ही, यह चीजों के प्रवर्धन, कुछ ऐसा है जो मूल रूप से नैतिक रूप से नहीं होना चाहिए उसका प्रतिनिधित्व करता है। राहु एक ऐसा ग्रह है जो ऐसा कुछ चाहता है जिसे वह प्राप्त नहीं कर सकता है।

अगर आपकी जन्म पत्रिका में राहु की स्थिति अच्छी ना हो और राहु की महादशा का भोग कर रहे हैं अथवा राहु नीच राशि शत्रु भाव क्या किसी कारण से आपको राहु से कष्ट प्राप्त हो रहा है तो राहु कवच का पाठ करना बहुत ही श्रेयस्कर है।

राहुकवचम्

अस्य श्रीराहुकवचस्तोत्रमंत्रस्य चंद्रमा ऋषिः ।
अनुष्टुप छन्दः । रां बीजं I नमः शक्तिः ।
स्वाहा कीलकम्। राहुप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ।।

प्रणमामि सदा राहुं शूर्पाकारं किरीटिन् ।।
सैन्हिकेयं करालास्यं लोकानाम भयप्रदम् ।। १।।
निलांबरः शिरः पातु ललाटं लोकवन्दितः।
चक्षुषी पातु मे राहुः श्रोत्रे त्वर्धशरीरवान् ।। २ ।।
नासिकां मे धूम्रवर्णः शूलपाणिर्मुखं मम।
जिव्हां मे सिंहिकासूनुः कंठं मे कठिनांघ्रीकः ।। ३ ।।
भुजङ्गेशो भुजौ पातु निलमाल्याम्बरः करौ ।
पातु वक्षःस्थलं मंत्री पातु कुक्षिं विधुंतुदः ।।४ ।।
कटिं मे विकटः पातु ऊरु मे सुरपूजितः ।
स्वर्भानुर्जानुनी पातु जंघे मे पातु जाड्यहा ।।५ ।।
गुल्फ़ौ ग्रहपतिः पातु पादौ मे भीषणाकृतिः ।
सर्वाणि अंगानि मे पातु निलश्चंदनभूषण: ।।६ ।।
राहोरिदं कवचमृद्धिदवस्तुदं यो।
भक्ता पठत्यनुदिनं नियतः शुचिः सन् ।
प्राप्नोति कीर्तिमतुलां श्रियमृद्धिमायु
रारोग्यमात्मविजयं च हि तत्प्रसादात् ।।७ ।।
।।इति श्रीमहाभारते धृतराष्ट्रसंजयसंवादे द्रोणपर्वणि राहुकवचं संपूर्णं ।।

कवच पाठ के लाभ

राहु कवच का नियमित पाठ मन की शांति देता है। साथ ही, यह आपके जीवन से सभी बुराईयों को दूर रखता है और आपको स्वस्थ, धनवान और समृद्ध बनाता है। जिस भी व्यक्ति के जीवन में राहु गृह की पीड़ा हो उसे यह पथ अवश्य करना चाहिए। वैदिक शास्त्रों और तंत्र शास्त्रों में समान रूप से सभी नवग्रहों को प्रसन्न करने के लिए भिन्न-भिन्न उपाय बताए गए हैं। इनमे, सर्वश्रेष्रेष्ठ स्थान दान, मंत्र जप, कवच, और स्तोत्र, आदि का है। राहु कवच पाठ एक दुर्लभ कवच है। इसका नियमित पाठ करने से गृह की शांति होती है और जीवन की समस्त समस्याओं और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

अपनी कुंडली में ग्रहों की स्थिति के बारे में अधिक जानने के लिए ज्योतिषी आलोक से परामर्श करें

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