Kartik Purnima 2026: कार्तिक पूर्णिमा पर 3 शुभ योग, जानें गंगा स्नान से लेकर देव दिवाली तक की परंपरा और विधि

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Kartik Purnima 2026: पूर्णिमा हिंदू धर्म की प्रमुख तिथियों में एक है, जिनमें कार्तिक पूर्णिमा अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसका कारण यह है कि इस तिथि का महत्व केवल हिंदू धर्म ही नहीं बल्कि सिख और अन्य भारतीय परंपराओं में भी है। इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा अधिक खास रहने वाली है, क्योंकि इस दिन तीन शुभ योगों का संयोग बन रहा है। आइए जानते हैं कार्तिक पूर्णिमा पर बनने वाले शुभ योग और गंगा स्नान से लेकर देव दीपावली तक की परंपरा के बारे में।

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व

कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन देव दीपावली का उत्सव मनाया जाता है, गंगा स्नान और दीपदान होते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर ही सिख समुदाय में गुरुनानक देव जी की जयंती मनाई जाती है, जिसे प्रकाश पर्व भी कहा जाता है। वहीं दक्षिण भारत में इस दिन को भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इन्हीं धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के कारण इस पूर्णिमा का महत्व अधिक बढ़ जाता है।

कार्तिक पूर्णिमा पर बनेंगे तीन शुभ योग

कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि इस वर्ष बुधवार, 24 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। इसे त्रिपुरी पूर्णिमा, त्रिपुरारी पूर्णिमा, देव दीपावली, महाकार्तिकी पूर्णिमा और गंगा स्नान पर्व जैसे नामों से भी जाना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा पर इस वर्ष सर्वार्थ सिद्धि योग, हंस महापुरुष राजयोग और शिववास जैसे तीन शुभ योग भी बन रहे हैं, जिससे यह पूर्णिमा अत्यधिक पुण्यदायी मानी जा रही है।

  1. सर्वार्थ सिद्धि योग- पंचांग के अनुसार सुबह 06:51 बजे से कृतिका नक्षत्र के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण होगा, जिसका प्रभाव रात्रि 11:25 बजे तक रहेगा।
  2. हंस महापुरुष राजयोग- बृहस्पति अपनी उच्च राशि (कर्क) या स्वराशि में केंद्र भाव में स्थित होते हैं, तब इस राजयोग का निर्माण होता है। इस योग में गुरु ग्रह के शुभ प्रभाव से ज्ञान, नेतृत्व क्षमता, आर्थिक मजबूती और आध्यात्मिक कार्यों में वृद्धि होती है।
  3. शिववास- कार्तिक पूर्णिमा पर शिववास का योग रहता है, क्योंकि इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा और त्रिपुरारी रूप में आराधना की जाती है।

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कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान विधि और मुहूर्त

दिवाली के 15 दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस तिथि पर किए गए स्नान से रोग-दोष दूर होते हैं। स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त को सबसे शुभ माना जाता है। वहीं दीपदान के लिए सूर्यास्त के बाद का समय यानी संध्या बेला शुभ होता है।

स्नान का मुहूर्त- 24 नवंबर को सुबह 4:30 बजे से 6:00 बजे तक।

कार्तिक पूर्णिमा स्नान की विधि

सुबह सूर्योदय से पहले उठकर गंगा, यमुना, नर्मदा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। यदि किसी कारण नदी स्नान संभव न हो तो घर पर ही स्नान करने वाले जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं। स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें और सूर्य को अर्घ्य दें। इसके बाद अपनी क्षमतानुसार अन्न और वस्त्र दान करें। कार्तिक पूर्णिमा पर जरूरतमंदों को कंबल और काले तिल का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।

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Posted On - November 4, 2026 | Posted By - Astrotalk Team | Read By -

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