पितृ दोष के कारण, प्रभाव और निवारण के उपाय

Posted On - September 21, 2021 | Posted By - Shantanoo Mishra | Read By -

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पितृ दोष के बचने के उपाय, Pitra Dosh upay

पितृ दोष क्या है?

वहम की माने तो पितृ दोष पितरों द्वारा दिया गया श्राप माना जाता है, लेकिन वास्तव में यह दोष पितरों का कर्म ऋण है। यह कुंडली में अशुभ ग्रहों की संयोजन के रूप में प्रभाव डालता है और जिस व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष होता है उसे इसका भुगतान करना होता है। सीधे शब्दों में कहें तो, किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष तब बनता है, जब उसके पूर्वजों द्वारा कोई पाप या गलती हुई हो। तब उनकी जगह, उनके जातक को विभिन्न दंडों के माध्यम से अपने पूर्वजों के जीवन में हुए गलत कार्यों के भुगतान करने के लिए जिम्मेदार बनाया जाता है। 

किसी की कुंडली में पितृ दोष की उपस्थिति जातक के जीवन में कुछ अपरिहार्य और अप्रत्याशित कठिनाइयाँ ला सकती हैं। यह किसी के जीवन में गंभीर उतार-चढ़ाव का मुख्य कारण बन सकता है। जातक को निर्णय लेने में अक्षमता और धन की कमी का सामना करना पड़ता है।

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दोष की पहचान करने के संकेत

1. बच्चे बार-बार बीमार पड़ना।

2. दंपत्ति को पुत्र/पुत्री प्राप्त होने में समस्या उत्पन्न होना।

3. बार-बार गर्भपात।

4. केवल बालिका की प्राप्ति होना।

5. बिना किसी वैध कारण के परिवार के सदस्यों के बीच झगड़ा होना।

6. व्यक्ति की शैक्षिक और करियर वृद्धि में बाधा उत्पन्न होना।

7. परिवार के विकास में देरी और लगातार समस्याओं का सामना करना।

8. शारीरिक या मानसिक रूप से विकलांग व्यक्ति को दोष के होने की संभावना अधिक होती है।

कुंडली में इस अशुभ दोष के पीछे सिर्फ एक कारण है। अर्थात पितरों द्वारा किया गलत कार्य जो आगे चलकर कुंडली में कुछ ग्रहों की स्थिति को उत्पन्न करते हैं, जिससे यह दोष उतपन्न होता है।

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पितृ दोष के कारण

क) यहां उन पापों की सूची दी गई है जो कुंडली में अशुभ प्रभाव विकसित करते हैं।

केवल प्रार्थना और पूजा-पाठ से समस्याएं या दोष दूर नहीं हो सकते हैं, इनके साथ वह सभी समान परिस्थितियों और परेशानियों का सामना करना पड़ता है जो आपने या आपके पूर्वजों ने दूसरों को दी थी। 

  • किसी(मानव/पशु) के साथ क्रूरता (या) अत्याचार (या) गाली-गलौज करना या इंसानों/जानवरों को मारना। पृथ्वी पर किसी भी प्रकार के जीवित प्राणी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसमें शामिल होना। 
  • कुछ चोरी करना जो कानूनी रूप से आपका नहीं है (या) जबरदस्ती छीनना (या) लूटना (या) अनैतिक या गैरकानूनी तरीके से छेड़छाड़ करके दूसरों को धोखा देना।
  • गलत तरीके से धन का संचय (या) दूसरों की संपत्ति को जबरदस्ती लेना या अपनी क्षमताओं और शक्तियों का दुरुपयोग करना।
  • शारीरिक, मानसिक या यौन रूप से किसी को (मनुष्य/पशु या पृथ्वी पर किसी भी प्रकार के जीवित प्राणी) को गाली देना।
  • जानबूझकर अफवाहें फैलाना (या) झूठा आरोप लगाना (या) गलत इरादे से किसी को बुरा बोलना (या) असत्यापित जानकारी के साथ कुछ भी बोल देना।

अतीत के बुरे कर्मों की बात करें तो, क्या आप जानते हैं कि काल सर्प दोष सबसे विनाशकारी ज्योतिषीय प्रचलनों में से एक है जो इस दोष की चपेट में आए व्यक्ति को कई प्रकार के दुर्भाग्य से प्रभावित कर सकता है। ऐसा होने का मुख्य कारण अपने पिछले जन्म में आपके द्वारा किए बुरे कर्म हैं।

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ख) पितृ दोष के लिए जिम्मेदार ग्रहों की स्थिति

इस दोष से प्रभावित व्यक्ति के कुंडली में कुछ ग्रहों की स्थिति से पितृ दोष को दर्शाता है जो विभिन्न प्रकार के पितृ दोष विकसित करते हैं।

पितृ दोष को दर्शाने वाले ग्रह/भाव

  • सूर्य- पिता या पिता के समान पूर्वजों का प्रतिनिधित्व करता है
  • चंद्र- माँ और मन का प्रतिनिधित्व करता है
  • शनि- जीवन में ऋण, पाप और कठिनाइयों का प्रतिनिधित्व करता है
  • नौवां भाव(घर)- पिछले जन्म, पूर्वजों का प्रतिनिधित्व करता है 
  • दूसरा भाव(घर)- परिवार, विरासत और रक्त रेखा का प्रतिनिधित्व करता है

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पितृ दोष के लिए जिम्मेदार ग्रह

  • कुंडली में पितृ दोष का प्रभाव तब माना जाता है, जब कुंडली में नौवां भाव या उस भाव का स्वामी राहु या केतु के साथ गठजोड़ में हो या उस पर दृष्टि हो।
  • यदि कुंडली में सूर्य के साथ या बृहस्पति के साथ राहु या केतु की संयोजन या दृष्टि में हो तो कुछ हद तक पितृ दोष का प्रभाव पड़ता है।
  • जन्म कुंडली के पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, नौवें और दसवें भाव में सूर्य और राहु या सूर्य और शनि तब इस दोष का प्रभाव पड़ता है।  
  • राहु लग्न में है और लग्न का स्वामी छठे, आठवें या बारहवें भाव में है, उस स्थिति में भी कुंडली में पितृ दोष उत्पन्न होता है।
  • छठे, आठवें या बारहवें भाव के स्वामी के पितृ दोष बनाने वाले ग्रहों पर दृष्टि या उनसे संयोजन करने के प्रभाव से जातक को गंभीर दुर्घटना, चोट, आंखों की समस्या और मूल रूप से जीवन में जटिलता का सामना करना पड़ सकता है।

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पितृ दोष के प्रभाव

  • पितृ दोष से ग्रसित जातक को संतान से संबंधित कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, उनके बच्चों को शारीरिक या मानसिक बीमारी से प्रभावित होने की संभावना है।
  • इस दोष से पीड़ित लोगों को अपनी शादी को लेकर कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इस दोष के कारण वह कई कोशिशों के बावजूद सही समय पर शादी नहीं कर पाते हैं।
  • अक्सर घर बीमारियों से घिरा रहता है, जिसके कारण परिवार को बहुत सारी शारीरिक, भावनात्मक और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
  • यह दोष घर में प्रतिकूल वातावरण बनाता है। छोटी-छोटी बातों पर पति-पत्नी में अनबन और विवाद हो सकता है।
  • जातक अक्सर नियमित रूप से कर्ज में डूबे रहते हैं और तमाम कोशिशों के बाद भी वे कर्ज नहीं चुका पाते हैं।
  • पितृ दोष के अशुभ प्रभावों के कारण जातक का परिवार आर्थिक विकास में पिछड़ जाता है। और हमेशा गरीबी और अपर्याप्तता से घिरे रहते हैं।
  • यदि कोई परिवार पितृ दोष से पीड़ित है, तो परिवार के किसी भी सदस्य को सपने में सांप या पूर्वज भोजन या कपड़े की मांग करते हुए देखने की संभावना है।

    जातक समाज में अपनी प्रतिष्ठा खो सकता है या पितृ दोष के दुष्परिणाम इस हद तक भी जा सकते हैं कि जातक को जेल में लंबी सजा काटनी पड़ती है।
  • जातक की कुंडली में पितृ दोष बढ़ने से अप्राकृतिक मृत्यु जैसे आत्महत्या/दुर्घटना/हत्या और/या रहस्यमय तरीके से जीवन की निरंतर हानि हो सकती है। 

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दोष से निवारण के उपाय

  • जातक को ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। उन्हें धन और लाल वस्त्र दान करें और संक्रांति या अमावस्या के रविवार को पितृ तर्पण करें।
  • इसके उपाय के रूप में, जातक को दोष निवारण पूजा की व्यवस्था करनी चाहिए जिसमें त्रिपिंडी श्राद्ध और पितृ विसर्जन शामिल हैं।
  • जातकों को अपने पूर्वजों को याद करने और उनका सम्मान करने के लिए अत्यंत ईमानदारी और विश्वास के साथ श्राद्ध का अनुष्ठान करना चाहिए।
  • जातकों को श्राद्ध के दौरान या उनकी मृत्यु की तिथि पर 15 दिनों के लिए अपने पितरों को जल अर्पित करना चाहिए।
  • इसके अलावा, बरगद के पेड़ और भगवान शिव को प्रतिदिन जल चढ़ाने से कुंडली में इस दोष के नकारात्मक प्रभाव कम हो जाते हैं।

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पितृ दोष को उत्पन्न करने वाले अशुभ ग्रह को जातक की जन्म कुंडली से पता लगाना चाहिए। पितृ पक्ष में उस प्रतिकूल ग्रह को प्रसन्न करने के उपाय के रूप में, जातक को दोष निवारण पूजा करनी चाहिए।

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