कुंडली के यह योग भी हैं आत्महत्या करने की वजह

कुंडली के यह योग भी हैं आत्महत्या करने की वजह

आत्महत्या

आत्महत्या एक ऐसी गलती है जिसको आदमी एक बार कर के कभी दोहरा नहीं सकता। बहुत सी ऐसी वजहें होती हैं जिनके कारण व्यक्ति आत्महत्या की तरफ बढ़ जाता है। मानसिक दबाव, समाज की बेरुखी, पारिवारिक कलह, बदनामी कुछ ऐसी वजहों में से हैं जिनके कारण व्यक्ति आत्महत्या की ओर बढ़ जाता है। बॉलीवुड के जानेमाने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने भी केवल 34 साल की उम्र में आत्महत्या कर ली। हालांकि इस आत्महत्या की वजहें अभी तक सामने नहीं आयी हैं लेकिन कायस लगाए जा रहे हैं कि कुछ न कुछ तो ऐसा था जो उन्होंने यह कदम उठाया। आज हम ज्योतिष के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे कि आत्महत्या के पीछे आखिर वजह क्या होती है। 

आत्महत्या के कारण हैं यह ग्रह 

कुंडली में कुछ ऐसे ग्रह होते हैं जो आत्महत्या का कारण बन सकते हैं। इसके साथ ही ग्रहों की दशा और अंतर्दशाएं भी व्यक्ति को आत्महत्या के लिए प्रेरित कर सकती हैं। 

कुंडली में चंद्रमा और बुध की स्थिति 

जिन जातकों की कुंडली में चंद्र ग्रह मजबूत नहीं होता उनकी मानसिक स्थिति भी डामाडोल हो सकती है। चंद्रमा को मन का कारक ग्रह माना गया है इसलिए इस पर पाप ग्रहों की दृष्टि भी व्यक्ति को मानसिक रूप से कमजोर बनाती है। कमजोर चंद्रमा होने से व्यक्ति छोटी-छोटी बातों का भी बुरा मान जाता है और कई बार मानसिक दबाव में आकर आत्महत्या तक भी कर सकता है। 

इसी तरह बुध भी यदि व्यक्ति की कुंडली में दुर्बल अवस्था में है तो यह व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता पर असर डालता है। ऐसे लोग कई बार गलत फैसलों के कारण भी परेशान रहते हैं। बुध की खराब स्थिति निर्णय क्षमता को भी प्रभावित करती है इसलिए कई बार इंसान आत्महत्या का निर्णय भी ले सकता है। 

कुंडली के अन्य ग्रह 

मंगल और राहु दो ऐसे ग्रह हैं जो व्यक्ति को आत्महत्या जैसे काम भी करवा सकते हैं। कुंडली में यदि चंद्रमा पर मंगल या राहु की दृष्टि हो तो व्यक्ति गलत फैसले ले सकता है। वहीं लग्न पर यदि इन दोनों ग्रहों की दृष्टि होती है तो व्यक्ति आत्मिक रूप से कमजोर हो सकता है और अपने जीवन को समाप्त करने में भी पीछे नहीं हटता है। वहीं शनि यदि अच्छी अवस्था में नहीं है तो तब भी व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है। 

आत्महत्या से जुड़ी कुछ अन्य परिस्थितियां

  • चंद्रमा पर राहु की दृष्टि होने या इन दोनों की युति से व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर हो सकता है और आत्महत्या तक कर सकता है। 
  • जिन जातकों की कुंडली के केंद्र में कोई भी ग्रह विराजमान न हो तो ऐसे लोग सुसाइड कर सकते हैं। 
  • इसके साथ ही इस बारे में जानकारी ग्रहों की दशा के बदलने से भी पता चलती है। जब भी मारक ग्रहों की दशाएं आती हैं तो ऐसे समय में संभलकर रहना चाहिए। 

सूर्य की शुभ स्थिति आत्महत्या से व्यक्ति को रोकती है

सूर्य आत्मा कारक ग्रह है, जिन भी जातकों की कुंडली में यह ग्रह शुभ और मजबूत होता है वह आत्मिक रूप से काफी सशक्त होते हैं और कभी भी आत्महत्या जैसा कार्य नहीं करते। ऐसे लोग अपनी बातों से दूसरों को भी ऊर्जा दे सकते हैं। 

आत्महत्या के विचारों से कैसे बचा जाए

कई बार लोगों के जीवन में कुछ ऐसी घटना होती है जिसके चलते वो आत्महत्या करने का विचार बना लेते हैं। ऐसे में कुछ उपाय हैं जो व्यक्ति को सकारात्मक बनाए रख सकते हैं। 

  • प्रतिदिन योग ध्यान करना व्यक्ति को नकारात्मक विचारों से बचाता है। इसलिए नियमित रूप से योग करना जरूरी है। 
  • भगवान शिव की आराधना करना भी व्यक्ति के लिए शुभ माना गया है। इससे कुंडली के कई बुरे पक्ष सही हो सकते हैं। 
  • भगवान कृष्ण की अराधना करना भी फायदेमंद। 
  • दिनचर्या में सुधार, कई बार खराब दिनचर्या भी आपके डिप्रेशन का कारण बन सकती है इसलिए इसमें सुधार आवश्यक है। 

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