नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, नोट करें पूजा मुहूर्त, विधि, शुभ योग और उपाय

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Shardiya Navratri 2026 Day 2: नौ दिनों तक चलने वाले शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए समर्पित होता है। पंचांग के अनुसार नवरात्रि आश्विन शुक्ल की प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि तक मनाई जाती है। इस वर्ष रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो रही है और सोमवार 19 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि का समापन होगा। जानें नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा कैसे करें, पूजा के लिए कौन सा मुहूर्त शुभ रहेगा, मां के दिव्य स्वरूप की कथा क्या है और इस दिन कौन से योग बन रहे हैं?

शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन कब?

पंचांग के अनुसार शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन आश्विन शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर होता है। इस वर्ष सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन रहेगा, जिसमें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विधान है। शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा के इस स्वरूप की पूजा करने से व्यक्ति में तप, वैराग्य, त्याग, सदाचार और संयम में वृद्धि होती है।

नवरात्रि के दूसरे दिन बुध का नक्षत्र गोचर, शुक्र अस्त, प्रभाव और योग

शुक्र अस्त: शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन वक्री शुक्र पश्चिम दिशा में अस्त होंगे। वक्री शुक्र का अस्त होना, सावधानी बरतने के संकेत दे रहा है। ग्रह-नक्षत्रों के गोचर का आपकी राशि पर क्या प्रभाव पड़ेगा यह जानने के लिए ज्योतिषी से फ्री चैट कर सकते हैं।

बुध नक्षत्र गोचर: इस दिन बुद्धि-व्यापार के दाता बुध ग्रह स्वाति नक्षत्र से निकलकर विशाखा नक्षत्र में गोचर करेंगे। बुध का यह गोचर सोमवार शाम 6:48 बजे होगा। बुध का नक्षत्र परिवर्तन मेष, कर्क, कन्या, मकर और कुंभ जैसी राशियों के लिए शुभ रहेगा। इस अवधि में इन राशियों को आर्थिक तरक्की, निवेश में लाभ और कार्यक्षेत्र में नए-नए अवसर मिल सकते हैं। 

शुभ योग: शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन विष्कुम्भ योग और प्रीति योग रहेगा। 

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

मां शैलपुत्री की पूजा के बाद नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का दिन होता है। देवी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय और भव्य है। इस दिन स्नान के बाद सफेद रंग के वस्त्र पहनने चाहिए। कुछ मान्यताओं में इस तिथि पर लाल और हरा रंग पहनना शुभ माना जाता है। माता को कुमकुम, फूल, फल अर्पित कर दीपक जलाएं। इसके बाद  शक्कर, मिश्री और पंचामृत का भोग लगाएं तथा मंत्रों का जाप करें। आखिर में आरती करें और सभी में प्रसाद वितरित करें।

मां ब्रह्मचारिणी की कथा

मां ब्रह्मचारिणी का पूर्वजन्म हिमालय के घर पुत्री के रूप में हुआ था। इन्होंने नारद जी के शिवजी को पति के रूप में पाने के लिए तप किए, जिस कारण इनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। इन्होंने वन में रहकर सौ वर्षों तक सिर्फ फल-फूल खाएं, हजार वर्षों तक टूटे बेलपत्र खाएं और कई दिन उपवास रखा। कठिन तप के कारण देवी का शरीर क्षीण हो गया। देवी की तपस्या देख तीनों लोक में हाहाकार मच गया। देवी की अडिग भक्ति और कठिन तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इस प्रकार देवी ब्रह्मचारिणी की तपस्या पूर्ण हुई।

नवरात्रि के दूसरे दिन करें ये उपाय

लंबी आयु और स्वास्थ्य लाभ के लिए मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में अर्पित भोग को प्रसाद के रूप में बांटे।

जन्म कुंडली में यदि मंगल ग्रह कमजोर हो या मंगल दोष हो तो नवरात्रि के दूसरे दिन की पूजा में मां ब्रह्मचारिणी को लाल फूल अर्पित करें और शक्कर का भोग लगाएं।

पढ़ाई में एकाग्रता, करियर में तरक्की और जीवन में चल रही परेशानियों से मुक्ति के लिए मां को दूध का भोग लगाएं और छोटी कन्याओं में इसे बांटें।

मां ब्रह्मचारिणी की आरती

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता। जय चतुरानन प्रिय सुख दाता। 

ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो।।

ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा। जिसको जपे सकल संसारा। 

जय गायत्री वेद की माता। जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।।

कमी कोई रहने न पाए। कोई भी दुख सहने न पाए। 

उसकी विरति रहे ठिकाने। जो ​तेरी महिमा को जाने।।

रुद्राक्ष की माला ले कर। जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर। 

आलस छोड़ करे गुणगाना। मां तुम उसको सुख पहुंचाना।।

ब्रह्माचारिणी तेरो नाम। पूर्ण करो सब मेरे काम। 

भक्त तेरे चरणों का पुजारी। रखना लाज मेरी महतारी।।

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Posted On - October 7, 2026 | Posted By - Admin | Read By -

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