मंगल दोष (मांगलिक दोष): कारण, लक्षण और उपाय

'मंगल दोष' ऐसा शब्द है जिसका नाम सुनते ही लोग डर जाते हैं। खासकर जो विवाह योग्य हैं,  उन्हें कुंडली में मंगल दोष का पता चलते ही चिंता होने लगती है। पुरुष और महिला दोनों इस दोष से प्रभावित हो सकते हैं। लेकिन मंगल दोष को लेकर इतना चिंतित होने से पहले और इसके बारे में विस्तारपूर्वक समझना चाहिए कि, मंगल दोष क्या है? यह कुंडली में कैसे बनता है? मांगलिक किन्हें कहते हैं? मंगल दोष का क्या असर होता है? और इसके क्या उपाय हैं?

आधुनिक समय में इंटरनेट पर मंगल दोष को लेकर ऐसे कई लेख हैं जो सही जानकारी देने के बजाय लोगों के बीच डर फैलाते हैं। लेकिन सच तो यह है कि जन्म कुंडली में मंगल दोष या मांगलिक दोष होने का अर्थ यह नहीं है कि, आपका भाग्य खराब है, विवाह में समस्या होगी या शादीशुदा जीवन चुनौतीपूर्ण ही रहेगा। दरअसल कई मांगलिक लोगों का वैवाहिक जीवन खुशहाल रहता है, सही समय पर शादी भी होती है और लोग संतोषजनक जीवन जीते हैं। अगर आप मंगल दोष के बारे में जानना चाहते हैं, तो आगे पढ़ें।

मंगल दोष क्या होता है?

मंगल दोष कुंडली में बनने वाले विभिन्न दोषों में से एक है। ज्योतिष में मंगल ग्रह को साहस, ऊर्जा, आत्मविश्वास, महत्वकांक्षा और काम करने की क्षमता का कारक माना जाता है। यह ऐसा ग्रह जो व्यक्ति को लक्ष्य पाने, चुनौतियों का सामने करना और आत्मविश्वासी बनाने के लिए प्रेरित करता है। 

कुंडली में मंगल के कुछ खास भावों में स्थित होने को मंगल दोष की उपस्थिति माना जाता है। खासकर शादी-विवाह के समय लोग कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति पर विशेष ध्यान देते हैं।

आप मंगल दोष कैलकुलेटर का इस्तेमाल करके पता लगा सकते हैं कि आपकी कुंडली में मंगल दोष है या नहीं।

मंगल दोष कैसे बनता है?

मंगल दोष तब बनता है जब कुंडली के कुछ भावों जैसे- लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश में मंगल ग्रह मौजूद हो। ये भाव पारिवारिक जीवन, रिश्ते, भावनात्मक स्थिरता और साझेदारी की स्थितियों को दर्शाते हैं।

  • लग्न भाव: लग्न यानी पहला भाव 'जीवनसाथी' का होता है। मंगल पहले भाव में हो तो शादीशुदा जीवन तनावपूर्ण रह सकता है।
  • द्वितीय भाव: कुंडली में मंगल जब दूसरे भाव में सक्रिय हो तो इससे शादीशुदा जीवन में परेशानी रहती है या दूसरा विवाह हो सकता है।
  • चतुर्थ भाव: कुंडली के चौथे भाव में स्थित मंगल व्यावसायिक जीवन पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
  • सप्तम भाव: कुंडली के सातवें भाव में मौजूद मंगल अहंकार की भावना को बढ़ाता है, जिससे रिश्तों में झगड़े होते हैं।
  • अष्टम भाव: कुंडली के आठवें भाव में मंगल की उपस्थिति से पुश्तैनी नुकसान या पारिवारिक झगड़े होते हैं।
  • द्वादश भाव: कुंडली के बारहवें भाव में स्थित मंगल ग्रह मानसिक तनाव को बढाता है।

विवाह से मंगल दोष का संबंध क्यों माना जाता है?

मंगल एक गर्म ग्रह है इसलिए यह अधिक उग्र, अहंकार और अस्थिर स्वभाव का प्रतीक होता है। मंगल का यह गुण साथी के साथ मतभेद या तनाव पैदा कर सकता है। इसलिए मंगल दोष वाले जातकों को साथी के साथ समझौता करने या सामंजस्य स्थापित करने में थोड़ी कठिनाई रहती है।

यही कारण है कि कुंडली मिलान में मंगल दोष का अर्थ समझना जरूरी है। आधुनिक ज्योतिष शास्त्र विवाह से पहले मंगल दोष के कई कारकों पर विचार करते हुए व्यापक नजरिया अपनाते हैं। इन कारकों में भावनात्मक समझ, बातचीत का तरीका, साझा मूल्य और दोनों जन्म-कुंडलियों की समग्र मजबूती शामिल है।

क्या मांगलिक व्यक्ति गैर-मांगलिक से विवाह कर सकता है?

यह प्रश्न कई लोगों के मन में रहता है कि क्या मांगलिक व्यक्ति का विवाह गैर-मांगलिक से हो सकता है? इसका जवाब है 'हाँ'। ऐसी कई सफल शादियां हैं, जिनमें एक पार्टनर मांगलिक और दूसरा गैर-मांगलिक होता है। हालांकि विवाह से पूर्व ज्योतिषियों के सलाह जरूर लेनी चाहिए, जिससे कि सिर्फ एक पहलू नहीं बल्कि पूरी कुंडली का विस्तारपूर्वक अध्ययन किया जा सके।

अगर आप भी अपने और अपने पार्टनर की कुंडली जांच करवाना चाहते है, तो एस्ट्रोटॉक पे मुफ्त ज्योतिष चैट ले। 

अगर एक मांगलिक व्यक्ति का विवाह गैर-मांगलिक से होता है तो सीधे तौर पर कुछ नहीं होता। लेकिन कभी-कभी बातचीत, फैसले या भावनात्मक असंतुष्टि के कारण विवाह में परेशानी हो सकती है। हालांकि ऐसी परेशानियां मंगल दोष के बगैर भी आ सकती हैं। कई बार विवाह की सफलता किसी एक ग्रह पर न होकर आपसी समझ, भरोसा, संवाद पर भी निर्भर करती है।

क्या मंगल दोष निरस्त हो सकता है?

हां, कई मामलों में मंगल दोष को निरस्त किया जा सकता है। सभी की कुंडली में मंगल ग्रह मजबूत स्थिति में हो, यह जरूरी नहीं है। बृहस्पति और शुक्र ग्रह की मजबूत व अच्छी स्थिति से भी शादी और शादीशुदा जीवन के अच्छे संकेत मिलते हैं। इसलिए ज्योतिष किसी एक दोष के बजाय पूरी कुंडली का आकलन करते हैं। मंगल दोष को दूर करने या इसके प्रभाव को कम करने के लिए ज्योतिष शास्त्र में कई असरदार उपाय बताए गए हैं।

मंगल दोष के लक्षण और उपाय

मंगल दोष के इसके लक्षणों में गुस्सा जल्दी आना, जल्दबाजी में निर्णय लेना और आत्मविश्वास की अधिकता शामिल हैं। वैवाहिक जीवन में विवाह में देरी, जीवनसाथी से मतभेद और दांपत्य जीवन में तनाव जैसी समस्याएं भी देखी जाती हैं।

आप मंगल दोष के ये उपाय परख सकते है:

1. कुंभ विवाह- जिनकी कुंडली में मंगल दोष होता है या फिर मंगल की स्थिति मजबूत होती है, उन्हें ज्योतिषी 'कुंभ विवाह' की सलाह देते हैं। कुंभ विवाह केले के पेड़, पीपल के पेड़ या फिर भगवान विष्णु की सोने या चांदी की मूर्ति के साथ किया जाने वाला एक प्रतीकात्मक विवाह होता है, जो किसी व्यक्ति से विवाह करने से पहले होता है, जिससे कि मंगल दोष के नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सके।

2. मंगल दोष निवारण पूजा: कुंडली में मंगल दोष को कम करने के लिए विद्वान पंडितों द्वारा मंगल दोष निवारण पूजा कराई जाती है।

3. मंगल मंदिर के दर्शन: शुभ फल पाने के लिए कई लोग मंगल मंदिरों जैसे उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर में दर्शन के लिए जाते हैं।

4. रत्न धारण: कुंडली में मंगल से शुभ फल पाने के लिए ज्योतिषी की सलाह से सोने या तांबे की अंगूठी में मूंगा धारण कर पहन सकते हैं।

5. व्रत और पूजा: मंगल दोष के प्रभाव को कम करने के लिए मंगलवार का व्रत रखना और भगवान हनुमान की पूजा करना फलदायी होता है।

6. मंत्र जाप: जिनकी कुंडली में मंगल दोष होता है, उन्हें 108 बार मंगल बीज मंत्र, "ॐ क्रां क्रीं क्रौं भौमाय नमः" का जाप करने की सलाह दी जाती है।

मांगलिक लोगों से जुड़े आम मिथक

मंगल दोष और मांगलिक को लेकर लोगों के बीच कई तरह की गलतफहमियां और डर हैं। सबसे पहले तो यह माना जाता है कि, मांगलिक लोगों का शादीशुदा जीवन खुशहाल नहीं रहता या फिर विवाह में बाधाएं आती हैं। लेकिन सच कहें तो ये मान्यताएं गलत हैं। पारिवारिक जीवन की सफलता या असफलता सिर्फ एक ग्रह की स्थिति पर निर्भर नहीं करती।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. मंगल दोष के लक्षण क्या हैं?

मंगल दोष के मुख्य लक्षणों में विवाह में देरी, वैवाहिक जीवन में परेशानी, पारिवारिक कलह-क्लेश, गुस्सा, स्वभाव में आक्रामकता और मानसिक अशांति शामिल है।

2. मंगल दोष कितने साल तक रहता है?

इसका सीधा-सीधा उत्तर नहीं है, क्योंकि यह व्यक्ति की कुंडली, ग्रह-दशा और योगों पर निर्भर करता है। कुछ ज्योतिषी मानते हैं है कि मंगल दोष का असर 28 साल तक रहता है, जबकि कुछ मानते हैं यह जीवनभर रहता है।

3. कौन सा मंगल दोष हानिकारक है?

कुंडली के अष्टम भाव और लग्न भाव में स्थित मंगल दोष को सबसे अधिक हानिकारक माना जाता है।

4. मंगल दोष के क्या फायदे हैं? 

यह दोष वैवाहिक जीवन के लिए हानिकारक होता है। लेकिन जिनकी कुंडली में मंगल मजबूत होता है वे अधिक साहसी, पराक्रमी और निडर होते हैं।