कुंडली के अलग-अलग भावों में ग्रहों की युति और संयोजन से कई तरह के दोष या योग बनते हैं, जिसका जीवन पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गहरा प्रभाव पड़ता है। अगर आपको ऐसा महसूस हो रहा है कि, तमाम कोशिशों के बावजूद सफलता कोसों दूर हैं, रिश्तों में सामंजस्य बनाना मुश्किल हो रहा है, सुख की खुशी क्षणिक रहती है तो यह सब शकट दोष के कारण हो सकता है। यह कुंडली का ऐसा गंभीर दोष है जो अन्य ग्रहों से मिलने वाले अच्छे प्रभावों को भी नष्ट करने की शक्ति रखता है। लेकिन राहत की बात यह है कि कुछ उपायों के जरिए इस दोष के बुरे प्रभाव को कम किया जा सकता है। अगर आप शकट दोष के बारे में विस्तारपूर्क जानना चाहते हैं तो यहां पढ़ते रहें।
शकट दोष के कारण व्यक्ति भ्रमित रहता है और स्थिरता प्राप्त करने में कठिनाई होती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, शकट दोष का असर जातक के करियर, वित्त, सेहत, मानसिक स्थिति और रिश्तों पर पड़ता है। कुंडली में शकट दोष तब बनता है जब चंद्रमा बृहस्पति से छठे, आठवें या फिर बारहवें भाव में स्थित हो। कहा जाता है कि, अतीत में कपटपूर्ण गतिविधियों में जाने-अनजाने में लिप्त हुए हों तो इस दोष की संभावना बढ़ जाती है। कुल मिलाकर यह दोष जैसा बोओगे, वैसा काटोगे की कहावत को सच करता है। शकट दोष इतना अशुभ होता है कि, यह अन्य ज्योतिषीय स्थितियों से मिलने वाले अच्छे प्रभावों को भी नष्ट कर सकता है। इसलिए ज्योतिष में शकट योग को अशुभ माना जाता है।
शकट दोष को कुछ उपायों से कम किया जा सकता है। लेकिन कुछ ऐसी स्थितियां भी होती हैं, जो शकट दोष को समाप्त कर सकती हैं। जैसे-
कुंडली में बना शकट दोष करियर को प्रभावित करता है। इससे कार्यस्थल में पदोन्नति में देरी, मान्यता न मिलता और विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने में असमर्थता जैसी चुनौतियां आ सकती हैं। शकट दोष के मामले में भाग्य का साथ मिलना थोड़ा मुश्किल होता है। शकट दोष ऐसा समय होता है, जब जीवन में सब कुछ हासिल की हुई चीजों को खोने की संभावना बढ़ जाती है।
कुंडली में जब शकट दोष बनता है, तब धन-संपत्ति के मामले में भाग्य भी साथ देना छोड़ देता है। सौभाग्य में कमी आने लगती है। चंद्रमा ज्ञान और भाग्य का प्रतीक है। इस दोष से मजबूत अंतर्ज्ञान की कमी के कारण व्यक्ति भ्रमित हो जाता है कि, कौन का निवेश लाभकारी हो सकता है और कौन हानि करा सकता है।
शकट दोष के कारण पारिवारिक जीवन और रिश्ते-नाते प्रभावित हो सकते हैं। इसका कारण यह है कि चंद्रमा बृहस्पति से दुष्टस्थान भावों में स्थित होकर व्यक्ति को आंतरिक खालीपन या अचानक मनोदशा में परिवर्तन जैसी समस्याएं बढ़ा सकता है।
ज्योतिष में चंद्रमा को मन और भावनाओं का ग्रह माना गया है। वहीं बृहस्पति भाग्य, ज्ञान और समृद्धि का ग्रह है। चंद्रमा और बृहस्पति से संबंधित दोषों का असर मानसिक स्थिति पर पड़ता है। ऐसे में चिंता और तनाव में अत्यधिक वृद्धि होती है और व्यक्ति वर्तमान या भविष्य को लेकर अधिक चिंतित रहता है।
कुंडली में शकट दोष बनना सामान्यत: अच्छा नहीं होता है। यह दोष रिश्ते, आर्थिक स्थिति, करियर और मानसिक स्वास्थ्य में समस्याएं पैदा करता है।
शकट का अर्थ होता है 'पहिया'। शकट दोष होने पर व्यक्ति का जीवन भी पहिए की तरह ऊपर-नीचे होता रहता है।
नहीं, शकट दोष जीवन में सुख और दुख दोनों लाता है। लेकिन इस दोष के कारण सुख और दुख दोनों स्थायी न होकर क्षणिक होते हैं।
कुंडली में अगर मंगल का प्रभाव चंद्रमा पर हो, तब यह योग भंग माना जाता है।