Sakata Dosha

कुंडली के अलग-अलग भावों में ग्रहों की युति और संयोजन से कई तरह के दोष या योग बनते हैं, जिसका जीवन पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गहरा प्रभाव पड़ता है। अगर आपको ऐसा महसूस हो रहा है कि, तमाम कोशिशों के बावजूद सफलता कोसों दूर हैं, रिश्तों में सामंजस्य बनाना मुश्किल हो रहा है, सुख की खुशी क्षणिक रहती है तो यह सब शकट दोष के कारण हो सकता है। यह कुंडली का ऐसा गंभीर दोष है जो अन्य ग्रहों से मिलने वाले अच्छे प्रभावों को भी नष्ट करने की शक्ति रखता है। लेकिन राहत की बात यह है कि कुछ उपायों के जरिए इस दोष के बुरे प्रभाव को कम किया जा सकता है। अगर आप शकट दोष के बारे में विस्तारपूर्क जानना चाहते हैं तो यहां पढ़ते रहें।

शकट दोष क्या होता है?

शकट दोष के कारण व्यक्ति भ्रमित रहता है और स्थिरता प्राप्त करने में कठिनाई होती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, शकट दोष का असर जातक के करियर, वित्त, सेहत, मानसिक स्थिति और रिश्तों पर पड़ता है। कुंडली में शकट दोष तब बनता है जब चंद्रमा बृहस्पति से छठे, आठवें या फिर बारहवें भाव में स्थित हो। कहा जाता है कि, अतीत में कपटपूर्ण गतिविधियों में जाने-अनजाने में लिप्त हुए हों तो इस दोष की संभावना बढ़ जाती है। कुल मिलाकर यह दोष जैसा बोओगे, वैसा काटोगे की कहावत को सच करता है। शकट दोष इतना अशुभ होता है कि, यह अन्य ज्योतिषीय स्थितियों से मिलने वाले अच्छे प्रभावों को भी नष्ट कर सकता है। इसलिए ज्योतिष में शकट योग को अशुभ माना जाता है।

कब नहीं होता शकट दोष प्रभाव?

शकट दोष को कुछ उपायों से कम किया जा सकता है। लेकिन कुछ ऐसी स्थितियां भी होती हैं, जो शकट दोष को समाप्त कर सकती हैं। जैसे-

  • कुंडली में जब बृहस्पति या फिर चंद्रमा केंद्र भावों में हों, जो लग्न, चौथा, सातवां या दसवां भाव होता है।
  • इसके अलावा जब बृहस्पति कर्क राशि में उच्च हो और चंद्रमा वृषभ राशि में उच्च हो।
  • चंद्रमा स्वराशि कर्क में हो या गुरु अपनी स्वराशि धनु या मीन में हों। इसके अलावा चंद्रमा के साथ जब शुभ ग्रह मौजूद हों।
  • किसी जातक की कुंडली में चंद्राधि योग या वसुमति योग हो तो शकट दोष का प्रभाव निष्फल हो सकता है।

शकट दोष के प्रभाव

1. करियर

कुंडली में बना शकट दोष करियर को प्रभावित करता है। इससे कार्यस्थल में पदोन्नति में देरी, मान्यता न मिलता और विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने में असमर्थता जैसी चुनौतियां आ सकती हैं। शकट दोष के मामले में भाग्य का साथ मिलना थोड़ा मुश्किल होता है। शकट दोष ऐसा समय होता है, जब जीवन में सब कुछ हासिल की हुई चीजों को खोने की संभावना बढ़ जाती है।

2. आर्थिक

कुंडली में जब शकट दोष बनता है, तब धन-संपत्ति के मामले में भाग्य भी साथ देना छोड़ देता है। सौभाग्य में कमी आने लगती है। चंद्रमा ज्ञान और भाग्य का प्रतीक है। इस दोष से मजबूत अंतर्ज्ञान की कमी के कारण  व्यक्ति भ्रमित हो जाता है कि, कौन का निवेश लाभकारी हो सकता है और कौन हानि करा सकता है।

3. रिश्ते

शकट दोष के कारण पारिवारिक जीवन और रिश्ते-नाते प्रभावित हो सकते हैं। इसका कारण यह है कि चंद्रमा बृहस्पति से दुष्टस्थान भावों में स्थित होकर व्यक्ति को आंतरिक खालीपन या अचानक मनोदशा में परिवर्तन जैसी समस्याएं बढ़ा सकता है। 

4. मानसिक

ज्योतिष में चंद्रमा को मन और भावनाओं का ग्रह माना गया है। वहीं बृहस्पति भाग्य, ज्ञान और समृद्धि का ग्रह है। चंद्रमा और बृहस्पति से संबंधित दोषों का असर मानसिक स्थिति पर पड़ता है। ऐसे में चिंता और तनाव में अत्यधिक वृद्धि होती है और व्यक्ति वर्तमान या भविष्य को लेकर अधिक चिंतित रहता है।

शकट दोष के उपाय

  • कुंडली में शकट दोष होने पर भगवान शिव, गणेशजी और चंद्रमा की पूजा करनी चाहिए। पूर्णिमा के दिन व्रत रखने से भी चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है।
  • शकट दोष होने पर बृहस्पति और चंद्रमा की ऊर्जा को संतुलित करना जरूरी होता है। इसके लिए पुखराज या मोती पहनें। रत्न धारण करने से पहले एस्ट्रोटॉक पर भारत के सर्वश्रेष्ठ ज्योतिषी विशेषज्ञों से फ्री चैट करके सलाह ले सकते हैं।
  • शकट दोष के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए बृहस्पति मंत्र का जाप करना फलदायी होता है। श्री सूक्तम मंत्र का जाप करने से शकट दोष की अवधि और अस्त-व्यस्त जीवन में सुधार आता है।
  • बेजुबानों की सेवा करें। विशेष रूप से गाय, कुत्ते और पक्षियों को भोजन कराएं। गरीब-जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आएं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या शकट दोष अच्छा होता है?

कुंडली में शकट दोष बनना सामान्यत: अच्छा नहीं होता है। यह दोष रिश्ते, आर्थिक स्थिति, करियर और मानसिक स्वास्थ्य में समस्याएं पैदा करता है।

2. शकट का क्या मतलब है?

शकट का अर्थ होता है 'पहिया'। शकट दोष होने पर व्यक्ति का जीवन भी पहिए की तरह ऊपर-नीचे होता रहता है। 

3. क्या शकट दोष सिर्फ दुख देता है?

नहीं, शकट दोष जीवन में सुख और दुख दोनों लाता है। लेकिन इस दोष के कारण सुख और दुख दोनों स्थायी न होकर क्षणिक होते हैं।

4. शकट योग कब भंग माना जाता है?

कुंडली में अगर मंगल का प्रभाव चंद्रमा पर हो, तब यह योग भंग माना जाता है।