कुंडली में नाड़ी दोष (Nadi Dosha in Hindi)

कुंडली में ऐसे कई दोष होते हैं, जिनका व्यक्ति के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। कुंडली में निर्मित कई दोषों में 'नाड़ी दोष' को ऐसा दोष माना जाता है, जिसका प्रभाव शादी-विवाह या वैवाहिक जीवन पर पड़ता है। ऐसा माना जाता है कि, जिनकी कुंडली में यह दोष होता है, उनका वैवाहिक जीवन अच्छा नहीं गुजरता है।

वैदिक ज्योतिष में 'नाड़ी दोष' सबसे चर्चित विषयों में एक माना जाता है। जब भी कुंडली मिलान की चर्चा होती है, तो इसमें नाड़ी दोष का जिक्र जरूर आता है। इसे इतना गंभीर और खतरनाक दोष माना जाता है कि, अगर किसी की जन्मकुंडली में नाड़ी दोष पाया जाता है, तो लोग विवाह पर विचार करने से पहले कई बार सोचते हैं। लेकिन सच्चाई इससे थोड़ी अलग है। 

ज्योतिषाचार्य भी सलाह देते हैं, विवाह के लिए कुंडली मिलान करते समय नाड़ी दोष को जरूर देखना चाहिए। लेकिन इसे अकेले देखकर कोई फैसला करने से पहले किसी जानकार ज्योतिषी से कुंडली का संपूर्ण विश्लेषण अवश्य करवाएं। कुंडली के पूर्ण विश्लेषण से ही पता चलता है कि, क्या नाड़ी दोष से विवाह में कोई समस्या रहेगी या नहीं।

अगर आप भी नाड़ी दोष का सही मतलब, वैवाहिक जीवन पर इसका प्रभाव, इसे दूर करने के उपाय और यह जानना चाहते हैं कि क्या कुंडली में इस दोष के होने के बावजूद सफलतापूर्वक शादी की जा सकती है या नहीं, तो आगे पढ़ते रहिए।

नाड़ी दोष क्या होता है?

कुंडली मिलान की प्रकिया में जब लड़का और लड़की दोनों पार्टनर एक ही नाड़ी श्रेणी में होते हैं, तब 'नाड़ी दोष' बनता है। कुंडली मिलान अष्टकूट मिलान के माध्यम से किया जाता है। यह ऐसी प्रणाली है, जो आठ कारकों के आधार पर दो लोगों की कुंडलियों के बीच अनुकूलता का आकलन करती है। इन सभी कारकों को मिलाकर कुछ 36 अ्ंक होता है। मिलान के सभी कारकों में ज्योतिषी नाड़ी को सबसे अधिक महत्व देते हैं। ज्योतिष के अनुसार, नाड़ी ऊर्जा के प्रवाह, स्वास्थ्य और दो व्यक्तियों के बीच समग्र अनुकूलता को दर्शाती है। जब दो लोग एक ही नाड़ी श्रेणी के होते हैं, तो ऐसा माना जाता है कि इससे वैवाहिक जीवन में समस्याएं , परिवार और भविष्य में संतान से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं। लेकिन आधुनिक ज्योतिष नाड़ी दोष का आकलन करते समय जन्म कुंडली के अन्य कारकों पर भी विचार करने की सलाह देते हैं।

विवाह के लिए नाड़ी दोष देखना क्यों जरूरी

कुंडली मिलान में नाड़ी दोष का महत्व प्राचीन ज्योतिष सिद्धांतों से जुड़ा है। नाड़ी को वैवाहिक जीवन और पति-पत्नी के बीच चलने वाले तालमेल से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि, अगर लड़का और लड़की की नाड़ी एक ही होती है तो, इस समानता का असर विवाह और पारिवारिक जीवन पर पड़ सकता है। इसलिए विवाह से पूर्व ज्योतिषी नाड़ी के तालमेल की जांच करते हैं, जिससे कि यह जाना जा सके कि, जोड़े की ऊर्जा एक-दूसरे के अनुकूल है या नहीं। 

नाड़ी दोष के प्रकार

शास्त्रों में अनेक प्रकार की नाड़ियों का उल्लेख मिलता है, लेकिन मुख्य रूप से नाड़ी दोष तीन तरह के होते हैं, जो इस प्रकार हैं-आद्य (आदि) नाड़ी, मध्य नाड़ी और अंत्य नाड़ी। ये तीनों नाड़ी 27 नक्षत्र (अभिजीत को छोड़कर) हैं। इनमें 9 नक्षत्रों की नाड़ी आदि, 9 नक्षत्रों की नाड़ी मध्य और 9 नक्षत्रों का नाड़ी अंत्य है।

1. आदि नाड़ी 

आदि नाड़ी का संबंध गति, उत्साह और सक्रिय ऊर्जा से है। इस नाड़ी की प्रकृति शीतल, विश्रामदायक और चित्त को अंतर्मुखी करने वाली होती है। इसलिए इस नाड़ी के लोग ऊर्जावान, गतिशील, साहसी और शीघ्र निर्णय लेने वाले होते हैं। आदि नाड़ी ज्येष्ठा, मूल, आर्द्रा, पुनर्वसु, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, अश्विनी नक्षत्रों की है।

2. मध्य नाड़ी 

मध्य नाड़ी का संबंध संतुलन, दृढ़ संकल्प और जुनून से होता है। इस श्रेणी के लोग महत्वाकांक्षी, भावनात्मक रूप से आक्रामक, लक्ष्य-केंद्रित और व्यावहारिक सोच वाले होते हैं। मध्य नाड़ी के नक्षत्र मृगशिरा, चित्रा, अनुराधा, भरणी, धनिष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, पुष्य, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराभाद्रपद है।

3. अंत्य नाड़ी

अंत्य नाड़ी को धैर्य, स्थिरता और सहनशक्ति का प्रतीक माना जाता है। इस नाड़ी वाले लोग अधिकतर शांत, भरोसेमंद, धैर्यवान और जिम्मेदार होते हैं। अंत्य नाड़ी के 9 नक्षत्र स्वाति, विशाखा, कृत्तिका, रोहिणी, आश्लेषा, मघा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, रेवती है।

कैसे बनता है नाड़ी दोष?

जब दूल्हा और दुल्हन के जन्म नक्षत्र के आधार पर दोनों एक ही नाड़ी श्रेणी में आते हैं, तो नाड़ी दोष उत्पन्न होता है। यहां देखें उदाहरण:

  • आदि नाड़ी+ आदि नाड़ी = नाड़ी दोष 
  • मध्य नाड़ी+ मध्य नाड़ी = नाड़ी दोष
  • अंत्य नाड़ी+ अंत्य नाड़ी = नाड़ी दोष

इससे आप समझ सकते हैं कि, कुंडली में नाड़ी दोष कब और कैसे बनता है। वहीं वर के जन्म नक्षत्र में आदि नाड़ी हो या वधू के जन्म नक्षत्र मध्य या अंत्य नाड़ी हो तो इससे नाड़ी दोष नहीं माना जाता है।

क्या नाड़ी दोष हमेशा बुरा होता है?

नहीं, यह जरूरी नहीं है कि, नाड़ी दोष हमेशा बुरा हो या नुकसान पहुंचाएं। नाड़ी दोष से नुकसान होता है, यह सोच सबसे बड़ी गलतफहमी है। बहुत से लोग कुंडली में नाड़ी दोष का पता चलते ही परेशान हो जाते हैं कि, शादी सफल नहीं रहेगी या फिर कुंडली में नाड़ी दोष होने पर किसी रिश्ते पर विचार नहीं किया जाता है। नाड़ी दोष का असर कब बुरा नहीं होता यह इन शर्तों पर निर्भर करता है, जैसे-

  • सातवें भाव की मजबूती
  • शुक्र और गुरु की स्थिति
  • चंद्रमा की अनुकूलता
  • नवांश कुंडली का विश्लेषण
  • कुल गुण मिलान संख्या
  • पार्टनर्स के बीच भावनात्मक तालमेल

नाड़ी दोष होने के बावजूद भी कई जोड़े सफल वैवाहिक जीवन बिताते हैं। इसलिए अनुभवी ज्योतिषी विवाह पर अंतिम निर्णय लेने से पहले दोनों पक्ष के कुंडली का पूरा विश्लेषण करते हैं। अगर आप भी अपनी और अपने साथी की कुंडली जांचना चाहते है तो आज ही Astrotalk पर फ्री ज्योतिष चैट लें 

नाड़ी दोष के लक्षण और उपाय 

नाड़ी दोष के लक्षण

  • नाड़ी दोष होने पर वैवाहिक जीवन में तालमेल नहीं बनता।
  • पार्टनर के बीच भावनात्मक समझ में कमी रह सकती है।
  •  पारिवारिक जीवन, स्वास्थ्य, संतान और रिश्तों की स्थिरता में पड़ता है।

नाड़ी दोष के उपाय

  • भगवान शिव और माता पार्वती की अराधना करें।
  • पति-पत्नी दोनों महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
  • नाड़ी दोष निवारण पूजा कराएं।
  • नाड़ी दोष के प्रभाव को कम करने के लिए अपने वजन के बराबर अन्न का दान (तुला दान) कर सकते हैं।

नाड़ी दोष बनाम मंगल दोष

कई लोग नाड़ी दोष और मंगल दोष को एक ही मानते हैं, लेकिन दोनों अलग-अलग दोष हैं और कुंडली में दोनों के निर्मित होने का कारण भी अलग होता है। 
 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या नाड़ी दोष होने पर शादी हो सकती है?

हां, नाड़ी दोष होने पर भी शादी हो सकती है। ज्योतिष में इसके लिए कई उपाय बताए गए हैं, जिससे दोष के असर को कम या खत्म किया जा सकता है।

2. क्या नाड़ी दोष का मतलब असफल शादी है?

नहीं, नाड़ी दोष होने के बावजूद कई जोड़ों की शादी सफल रहती है।

3. क्या लव मैरिज में नाड़ी दोष देखना चाहिए?

हां, शादी से पहले अगर परिवार कुंडली मिलान कराता है, तो लव मैरिज में भी नाड़ी दोष और अन्य कूटों का विश्लेषण कराना चाहिए।

4. नाड़ी दोष होने पर किस देवता की पूजा करनी चाहिए?

नाड़ी दोष शांति या निवारण के लिए वर और वधू को भगवान शिव की पूजा और  महामृत्युंजय मंत्र के जाप करना चाहिए।