क्या आप एकांत का अनुभव करते हैं, बहुत कोशिशों के बाद भी सामाजिक परिवेश में ढलना आपके लिए मुश्किल हो जाता है, मन में हमेशा परिवार या अपनों से भावनात्मक सहयोग की कमी खलती है, मानसिक तनाव रहता है या किसी न किसी बात को लेकर अधिक चिंतित रहते हैं, जरूरी मुद्दों पर मानसिक स्पष्टता में कमी रहती है, तो ऐसा केमद्रुम दोष के कारण हो सकता है।
वैदिक ज्योतिष में जिस तरह से सूर्य को आत्मा का कारक माना जाता है, उसी तरह से चंद्रमा को मन का कारक कहा जाता है। चंद्रमा के कुछ चरणों में हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण व्यक्ति का मन और स्वभाव प्रभावित होता है, जिससे मन:स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ता है और निर्मित योग को केमद्रुम दोष कहा जाता है। यह चंद्रमा द्वारा निर्मित महत्वपूर्ण दोष है। अगर आप केमद्रुम योग के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं तो पढ़ते रहें।
आमतौर पर कुंडली में किसी भी दोष का निर्माण ग्रहों की युति, अशुभ दृष्टि या किसी विशेष भाव में ग्रहों की स्थिति से होता है। लेकिन केमद्रुम ऐसा दोष है जो, तब बनता है जब कुंडली में चंद्रमा अकेला होता है। यानी चंद्रमा के साथ कोई अन्य ग्रह नहीं होता, चंद्रमा पर किसी अन्य शुभ ग्रहों की सीधी दृष्टि नहीं पड़ती है या दूसरे और बारहवें भाव में कोई ग्रह नहीं होता। चंद्रमा मन और भावनाओं का ग्रह है। ऐसे में चंद्रमा के आसपास किसी ग्रह की अनुपस्थिति नहीं होती है तब यह दोष व्यक्ति को एकांतवासी बना सकता है।
चंद्रमा द्वारा निर्मित केमद्रुम दोष जब किसी जातक की कुंडली में बनता है तो व्यक्ति की मानसिक शक्ति भले ही कितनी भी अच्छी क्यों न हो, लेकिन कई इसका दुरुपयोग भी हो सकता है। इसलिए यह दोष अच्छे-बुरे दोनों प्रभावों को जागृत करता है। केमद्रुम योग आत्म परिवर्तन के मौके देता है, अनुशान की कला सिखाता है और आशावादी भी बनाता है। लेकिन जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में इसके कई नकारात्मक प्रभाव भी पड़ते हैं। जानें किन क्षेत्रों पर पड़ता है केमद्रुम दोष का प्रभाव।
केमद्रुम दोष से व्यक्ति की आर्थिक स्थिति और करियर प्रभावित हो सकते हैं। क्योंकि इस दोष से पीड़ित जातकों में बावनात्मक संतु्ष्टि की कमी रहती, जिस कारण ये एक नौकरी में लंबे समय तक नहीं टिक पाते और बार-बार नौकरी बदलते हैं। मानसिक भटकाव के कारण ये बचत करने में भी असमर्थ होते हैं।
चंद्रमा मारक होकर केमद्रुम दोष में हो तो व्यक्ति को मानसिक अवसाद हो सकता है और वह चिड़चिड़ा भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में पारिवारिक रिश्तों में तालमेल बिठाना मुश्किल हो सकता है। चंद्रमा माता का कारक भी होता है। इसलिए इस दोष का नकारात्मक पहलू यह है कि माता या मातृसत्तात्मक व्यक्ति से संबंध टूटने की संभावना रहती है।
कुंडली में चंद्रमा मारक होकर छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो तो व्यक्ति बहुत जल्दी अवसाद में आ सकता है और नकारात्मक सोच से पीड़ित हो सकती है। यही कारण है कि केमद्रुम दोष व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। इस स्थिति में व्यक्ति अकेलापन महसूस कर सकता है, चिंता बढ़ सकती है या मनोदैहिक रोगों से पीड़ित हो सकता है।
केमद्रुम दोष व्यक्ति एकांतवासी बनाता है, जिससे व्यक्ति को समूह में घुलले-मिलने में कठिनाई महसूस हो सकती है। कई बार तो गहरी दोस्ती भी प्रभावित होती हैं और धीरे-धीरे व्यक्ति का सामाजिक दायरा कम होने लगता है।
किसी भी दोष के बुरे प्रभाव से बचने के लिए नियमित माता-पिता का आशीर्वाद लेना चाहिए। साथ ही हमेशा उनकी सेवा और सम्मान करें। माता के साथ समय बिताने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है।
चांदी चंद्रमा का प्रतिनिधित्व करती है। चंद्रमा से निर्मित केमद्रुम दोष को कम करने के लिए चांदी धारण करना अच्छा हो सकता है। इससे मन शांत रहता है और ग्रहणशीलता बढ़ती है।
केमद्रुम दोष के प्रभाव को कम करने के लिए भगवान शिव की पूजा करना अच्छा होता है। शिवलिंग पर कच्चे दूध और शहद से अभिषेक करें। चंद्रमा की ऊर्जा मजबूत करने के लिए 'ऊँ सोम सोमाय नमः' और शिव मंत्र 'ऊँ नम: शिवाय' का जाप करना भी लाभकारी होता है। जातक सोमवार और पूर्णिमा के दिन उपवास रखें।
गरीब और जरूरतमंदों में सफेद रंग की वस्तुएं जैसे सफेद वस्त्र, चीनी, दूध, चावल, मिठाई आदि का दान करने से कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है।
चंद्रमा से जुड़े दोष को कम करने या चंद्रमा की शुभता बढ़ाने के लिए ज्योतिषी मोती पहनने की सलाह देते हैं। इससे भावनाएं स्थिर होती हैं और मानसिक संतुलन बना रहता है। लेकिन ज्योतिषी से उचित परामर्श के बाद ही रत्न धारण करें।
केमद्रुम दोष निवारण के लिए वैदिक मंत्रोच्चारण द्वारा शांति पूजन की जाती है।
जब चंद्रमा से केंद्र (1, 4, 7, 10) स्थानों पर कोई ग्रह स्थित हो, चंद्रमा पर शुभ ग्रहों (गुरु, बुध, शुक्र) की दृष्टि हो या चंद्रमा के आगे-पीछे के भाव में कोई ग्रह हो। तब केमद्रुम योग भंग होता है।
केमद्रुम दोष के मुख्य लक्षणों में मानसिक अशांति, आर्थिक तंगी और अकेलापन शामिल हैं।
ज्योतिष में केमद्रुम दोष को शुभ योग नहीं माना जाता है। इससे कोई लाभ नहीं होता, बल्कि जीवन में कई तरह की चुनौतियां आ सकती हैं।