नवरात्रि के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा, नोट करें पूजा मुहूर्त, विधि, शुभ योग, कथा और उपाय

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Shardiya Navratri 2026 Day 3: नौ दिनों तक चलने वाले शारदीय नवरात्रि के पर्व में हर दिन विशेष धार्मिक महत्व होता है। नवरात्रि के नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा का महत्व है। शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन देवी दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा के लिए समर्पित है। मां के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र होने के कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। आइए जानते हैं तीसरे दिन की देवी की पूजा विधि, इस दिन बनने वाले शुभ योग, मां के दिव्य स्वरूप की कथा, उपाय और मंत्र के बारे में।

शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन कब?

शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को होता है। इस वर्ष मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन रहेगा, जिसमें मां चंद्रघंटा की पूजा का विधान है। शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा के इस स्वरूप की पूजा करने से साहस, आत्मविश्वास और मानसिक शांति बढ़ती है। साथ ही भय और चिंताओं से मुक्ति मिलती है।

नवरात्रि के तीसरे दिन का योग, ग्रहों की युति और प्रभाव

  • शुभ योग: पंचांग के अनुसार, 13 अक्टूबर को प्रीति योग रहेगा। इसे बहुत ही शुभ और सकारात्मक योग माना जाता है।
  • ग्रहों की युति: इस समय गुरु और मंगल कर्क राशि में रहेंगे, जिससे गुरु-मंगल का योग बनेगा।
  • त्रिग्रही योग: तुला राशि में चंद्रमा, बुध और शुक्र की युति से त्रिग्रही योग बनेगा। इस योग से ज्ञान, साहस और आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है।
  • लक्ष्मी नारायण योग: बुध और शुक्र की युति से लक्ष्मी नारायण योग का निर्माण होगा। यह योग कला, व्यापार और रचनात्मकता के लिए शुभ और फलदायी होता है।

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नवरात्रि के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के बाद नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का दिन होता है। देवी का स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इस दिन स्नान के बाद लाल रंग के वस्त्र पहनने चाहिए। माता को लाल चंदन, लाल फूल, लाल चुनरी और फल अर्पित कर दीपक जलाएं। इसके बाद मां को दूध से बनी चीजों का भोग लगाएं और चंद्रघंटा मंत्रों का जाप करें। आखिर में आरती करें और सभी में प्रसाद वितरित करें। मां चंद्रघंटा की पूजा से मंगल ग्रह की अशुभता कम होती है और व्यक्ति में साहस जागृत होता है।

माँ चंद्रघंटा की कथा

दैत्य महिषासुर के बढ़ते आतंक के अंत के लिए चंद्रघंटा की उत्पत्ति हुई। कथा के अनुसार, स्वर्गलोक पर राज करने की इच्छा से महिषासुर ने देवराज इंद्र का सिंहासन हड़प लिया था। देवताओं और महिषासुर के बीच भयंकर युद्ध चल रहा था। महिषासुर को हराना देवताओं के लिए आसान नहीं था। क्योंकि कठोर तपस्या कर उसने ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया था कि, संसार का कोई भी पुरुष, देवता या असुर उसे मार नहीं सकता। धीरे-धीरे तीनों लोकों में महिषासुर का आतंक बढ़ने लगा। चिंतित होकर देवता त्रिदेव के पास पहुंचे और अपनी व्यथा सुनाई। तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने क्रोध प्रकट किया, जिससे उनके मुख से ऊर्जा निकली और एक देवी प्रकट हुई। शिवजी ने देवी को अपना त्रिशूल दिया, विष्णु जी से चक्र, इंद्र ने घंटा, सूर्य ने तेज, तलवार और सिंह दिया। इस प्रकार सभी देवताओं की संयुक्त ऊर्जा से माता ने महिषासुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई। 

नवरात्रि के तीसरे दिन करें ये उपाय

  • कार्य में लगातार बाधा आ रही है या तरक्की रुक गई है तो नवरात्रि के तीसरे दिन किसी दुर्गा मंदिर में घंटी भेंट करें और साथ ही दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
  • कुंडली में मंगल कमजोर है या मंगल दोष हो तो मां चंद्रघंटा को तांबे का सिक्का या तांबे की कोई वस्तु अर्पित करें। पूजा के बाद उस तांबे की वस्तु को अपने पर्स में संभालकर रखें।
  • मां चंद्रघंटा को घंटी की ध्वनि प्रिय है। नवरात्रि के तीसरे दिन सुबह और शाम की पूजा के दौरान आरती के समय घंटी जरूर बजाएं। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होगी।

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माँ चंद्रघंटा की आरती

जय मां चंद्रघंटा सुख धाम। पूर्ण कीजो मेरे काम।।

चंद्र समान तू शीतल दाती। चंद्र तेज किरणों में समाती।।

क्रोध को शांत बनाने वाली। मीठे बोल सिखाने वाली।।

मन की मालक मन भाती हो। चंद्र घंटा तुम वरदाती हो ।। 

सुंदर भाव को लाने वाली। हर संकट मे बचाने वाली ।।

हर बुधवार जो तुझे ध्याये। श्रद्धा सहित जो विनय सुनाय ।।

मूर्ति चंद्र आकार बनाएं। सन्मुख घी की ज्योत जलाएं ।।

शीश झुका कहे मन की बाता। पूर्ण आस करो जगदाता ।।

श्रद्धा से जो आरती गाए। सुख संपदा सबको पाए॥

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Posted On - October 7, 2026 | Posted By - Admin | Read By -

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