Shardiya Navratri 2026 Day 5: शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन मां दुर्गा की पांचवी शक्ति देवी स्कंदमाता की पूजा के लिए समर्पित होता है। कमल के फूल पर विरामजान मां स्कंदमाता की पूजा करने से हर संभव कार्य भी संभव हो जाते हैं और निसंतान दंपति को संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है। आइए जानते हैं शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन कब रहेगा, इस तिथि पर कौन से शुभ योग बन रहे हैं, मां स्कंदमाता की पूजा कैसे करें और इस दिन कौन से उपाय करने चाहिए?
शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन आश्विन महीने की पंचमी तिथि को होता है, जो गुरुवार 15 अक्टूबर 2026 को पड़ रही है। इस दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा की जाएगी। शारदीय नवरात्रि की शुरुआत इस वर्ष 2026 में रविवर 11 अक्टूबर से हो रही है और सोमवार 19 अक्टूबर को महानवमी पर नवरात्रि का आखिरी दिन रहेगा। वहीं, दशहरा का पर्व मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा।
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मां कुष्मांडा की पूजा के बाद नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा होती है। इस दिन स्नान के बाद सफेद, पीले या हरे रंग के वस्त्र पहनने चाहिए। सबसे पहले पूजास्थल की सफाई करें और फिर स्कंदमाता की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। मां को रोली,चंदन, फूल, भोग, फल आदि अर्पित करें। स्कंदमाता को केले का भोग अतिप्रिय है। इसके अलावा खीर और पीले रंग की मिठाई भी चढ़ा सकते हैं। इसके बाद मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती करके सभी में प्रसाद वितरित करें।
स्कंदमाता की सवारी सिंह है। कहा जाता है कि, माता ने पहाड़ों पर रहकर सांसारिक जीवों में नवचेतना का निर्माण किया था। स्कंदमाता कुमार कार्तिकेय (स्कंद) की माता है, इसलिए इसका नाम स्कंदमाता पड़ा। मां के विग्रह में भगवान स्कंद बाल रूप में इनकी गोद में बैठे नजर आते हैं। देवी स्कंदमाता की कृपा जिस पर पड़ जाए तो मूर्ख से मूर्ख व्यक्ति भी ज्ञानी बन जाता है।
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता से संबंधित कथा के अनुसार, तारकासुर नामक राक्षस ने कठोर तप कर ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया था। तारकासुर की तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उससे वरदान मांगने को कहा, तब तारकासुर ने ब्रह्मा जी से अमरता का वरदान मांग लिया। ब्रह्मा जी ने कहा कि, जिसका जन्म हुआ है, उसकी मृत्यु निश्चित है। इसलिए मैं तुम्हें अमरता का वरदान नहीं दे सकता।
तारकासुर ने अपना दिमाग लगाया और ब्रह्मा जी से कहा कि, अगर मृत्यु निश्चित है तो मैं सिर्फ भगवान शिव के पुत्र के हाथ से मरना चाहता हूं। तारकासुर ने ऐसा वरदान इसलिए मांगा, क्योंकि वो सोचता था कि, महादेव तो आदियोगी हैं और वे कभी विवाह नहीं करेंगे। इसलिए उनके पुत्र की संभावना भी नहीं है। उसे लगा कि ऐसा वरदान मांगकर वर अमर हो जाएगा।
ब्रह्मा जी ने तथास्तु कहकर तारकासुर को अमरता का वरदान दे दिया। ब्रह्मा जी से वरदान मिलते ही तीनों लोकों में उसका उत्पात बढ़ता गया। राक्षस से परेशान होकर सभी देवतागण महादेव के पास पहुंचे और उससे मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की। कुछ समय बाद भगवान शिव ने मां पार्वती से विवाह किया, जिसके बाद कुमार कार्तिकेय का जन्म हुआ। बड़े होकर कार्तिकेय ने तारकासुर का वध किया। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि, कालिदास द्वारा रचित रघुवंशम महाकाव्य मेघदूत रचनाएं भी स्कंदमाता की कृपा से संभव हुई है।
जय तेरी हो स्कंदमाता। पांचवा नाम तुम्हारा आता।।
सब के मन की जानन हारी। जग जननी सब की महतारी।।
तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं। हरदम तुम्हें ध्याता रहूं मैं।।
कई नामों से तुझे पुकारा। मुझे एक है तेरा सहारा ।।
कही पहाड़ों पर हैं डेरा। कई शहरों में तेरा बसेरा।।
हर मंदिर में तेरे नजारे। गुण गाये तेरे भगत प्यारे ।।
भगति अपनी मुझे दिला दो। शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो।।
इंद्र आदी देवता मिल सारे। करे पुकार तुम्हारे द्वारे ।।
दुष्ट दत्य जब चढ़ कर आएं । तुम ही खंडा हाथ उठाएं।।
दासो को सदा बचाने आई। ‘चमन’ की आस पुजाने आई।।
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