बुरे सपनों और अनिद्रा से हैं परेशान तो अपनाएं यह उपाय

बुरे सपनों और अनिद्रा से हैं परेशान तो अपनाएं यह उपाय

अनिद्रा

इंसान के लक्ष्य चाहे कितने ही बड़े हों, चाहे इंसान के पास कितना ही धन हो, व्यक्ति कितना ही संपंन क्यों न हो लेकिन सबसे बड़ा सुख तभी मिलता है जब आपको अच्छी नींद आती है। ऐसी नींद जिसमें किसी भी तरह की बाधा न हो न अच्छे स्वप्न हों न बुरे। लेकिन वास्तविकता में ऐसा नहीं है पूरी दुनिया में बहुत कम ही लोग हैं जो चैन से सो पाते हैं। अनिद्रा की समस्या इन दिनों बहुत बड़ी समस्या है। 

क्या हैं अनिद्रा और बुरे स्वप्नों का वैज्ञानिक कारण

अगर आप किसी डॉक्टर के पास जाएंगे तो आपको वह यही बताएगा कि आपकी दिनचर्या ठीक नहीं है, बहुत ज्यादा सोचते हैं, भागदौड़ के बीच अपने लिए भी समय निकालिए। योग कीजिए व्यायाम कीजिए धीरे-धीरे समस्या ठीक हो जाएगी। एक हद तक डॉक्टर की बातें सही हैं। लोग डॉक्टर की बातों पर अमल भी करते हैं कुछ फर्क भी पड़ता है लेकिन समस्या हमेशा के लिए दूर नहीं होती। आपके जीवन में थोड़ी सी उथल-पुथल मचती है और समस्या फिर से आ खड़ी होती है।

आध्यात्मिक दृष्टि में अनिद्रा और बुरे स्वप्नों का कारण

अब जरा आध्यात्मिक दृष्टि से इस समस्या पर विचार करें। ऊपरी तौर पर तो आध्यात्म भी आपकी दिनचर्या, आपके विचारों को इसका कारण मानता है लेकिन आध्यात्म अच्छे और बुरे दोनों तरह के विचारों को ही आपकी समस्या का कारण बताता है।

अगर आप बुरे विचारों को अच्छे विचारों से दूर करने की कोशिश करेंगे तो कभी न कभी किसी बुरी परिस्थिति में अच्छे विचारों वाले घड़े में बुरे विचार भी आने लगेंगे। इसी तरह सपने अच्छे हों या बुरे दोनों का ही आना गलत है। इसका मतलब है कि आपका मस्तिष्क कुछ क्षणों के लिए भी आराम नहीं कर पा रहा। 

बुरे स्वप्न

बुरे सपनों का सबसे बड़ा कारण है आपका डर। यह डर कुछ भी हो सकता है मौत का डर, किसी के खोने का डर, पैसों के लुटने का डर, कोई आपको बुरा न समझे इसका डर। डर किसी भी तरह का डर हो सकता है। आप जितना चीजों से लोगों से खुद को जोड़ते हैं उतना ही आपके मस्तिष्क में डर घर करने लगता है।

आध्यात्म कहता है कि इस दुनिया में आपके सिवा आपका कोई नहीं है लेकिन हम खुद को समझने से ज्यादा लोगों से अपने भले होने का सर्टिफिकेट चाहते हैं। जिस दिन हम अपनी खुबियों-खामियों पर काम करना शुरू कर देते हैं और लोगों से अपनी निर्भरता कम कर देते हैं उस दिन बुरे सपनों का आना बंद हो जाता है।

बुरे सपनों और अनिद्रा से कैसे पाएं छुटकारा

सबसे पहले तो उन लोगों से अनिद्रा की समस्याओं का समाधान पूछना छोड़ दें जो आपकी बातों से अपनी बातों को मिलाकर आपको संतुष्ट करना चाहते हैं। वास्तविकता यह है कि आपकी महत्वकांक्षाएं, दूसरों से आपकी उम्मीदें, एकाग्रता की कमी, छोटी-छोटी बातों का भी आप पर असर पड़ना यह अनिद्रा और बुरे स्वप्नों के असली कारण है।

सिर्फ इतना ही नहीं आपने किसी का भला किया और आप उम्मीद करते हैं कि वो भी आपका भला करे यह भी अनिद्रा का कारण है, क्योंकि वह व्यक्ति आपके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता तो आप निराश हो जाते हैं, क्योंकि भला आप इसी उम्मीद से करते हैं कि सामने वाला व्यक्ति आपके ईगो को संभाले, यह उम्मीद आपको परेशान करती है।

सीधे शब्दों में कहें तो बुरे विचार और कर्म आपके लिए जितने बुरे हैं उतने ही अच्छे भी। तो कुल मिलाकर कहा जाए तो आपके विचार ही आपकी हर समस्या की जड़ होते हैं। नीचे कुछ उपाय दिये गये हैं जिनको करने से आप अनिद्रा और बुरे स्वप्नों से छुटकारा पा सकते हैं।  

उपाय

  • सुबह उठते ही एक या दो मिनट के लिए बिस्तर पर ही बैठें और सांसों पर ध्यान दें। 
  • स्नान ध्यान के बाद प्राणायाम करें। 
  • आप दिनभर में क्या करने वाले हैं, जो काम आपको गलत लगते हैं जिनको आप नहीं करना चाहते उनको किसी डायरी पर लिखें। प्रतिदिन इसे दोहराएं। 
  • दिन के ज्यादातर समय में मौन रहने की कोशिश करें और बेवजह की बहसों में शामिल होने से बचें। 
  • मादक पदार्थों का सेवन करना छोड़ दें। 
  • शाम के वक्त कुछ वक्त एकांत में गुजारें, और मन में चल रहे विचारों को देखने की कोशिश करें। 
  • अगर हो सके तो दिन का कुछ समय निकालकर किसी आध्यात्मिक पुस्तक या प्रेरणादायक जीवनी का अध्ययन करें।
  • दिन के अंत पर डायरी में लिखें कि आज के दिन से आप संतु्ष्ट हैं या नहीं। 
  • सोने से पहले अपने पूरे दिन को याद करने की कोशिश करें। 
  • इसके बाद सांसों पर ध्यान दें और बेवजह के विचारों को मन से हटाने की कोशिश करें। 

ऊपर दिये गये उपायों को करके आप अपनी अनिद्रा और बुरे स्वप्नों की समस्या से बच सकते हैं। बस यह बात समझ लीजिए कि आपकी अनिद्रा का कारण आपका मस्तिष्क है। यदि आप अपने मस्तिष्क के चालक बन जाते हैं तो यह समस्या खुद ही दूर हो जाती है।

जब तक आपका मस्तिष्क आपका चालक है तब तक समस्याएं बनी रहती हैं। दुनिया में रहें लेकिन दुनिया वालों की बातों को अपने मस्तिष्क पर किसी भी तरह से प्रभाव न डालने दें और ऐसा अभ्यास से ही होगा।  

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