Shardiya Navratri 2026 Day 8: शारदीय नवरात्रि का आठवां दिन मां महागौरी को समर्पित है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक चलने वाले 9 दिनों के उत्सव को शारदीय नवरात्रि कहा जाता है। शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों की अवधि में उपासक संतुलित और सात्विक भोजन अपनाकर ध्यान, चिंतन और पूजा-पाठ में समय बिताकर पुण्य प्राप्त करते हैं। नवरात्रि के 9 दिन शक्ति की अराधना का दिन होता है। आइए जानते हैं शारदीय नवरात्रि का आठवां दिन कब रहेगा, इस दिन कौन से शुभ योग बन रहे हैं, पूजा की विधि, कथा, उपाय क्या हैं?
पंचांग के अनुसार शारदीय नवरात्रि का आठवां दिन आश्विन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर होता है। इसे महाअष्टमी भी कहते हैं। इस दिन मां महागौरी के साथ ही कन्या पूजन का भी विधान है। इस वर्ष रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि का आठवां दिन रहेगा, जिसमें मां महागौरी की पूजा की जाएगी। शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा के इस स्वरूप की पूजा करने से मन की शुद्धि, मानसिक शांति और सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है।
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18 अक्टूबर 2026 को पंचांग के अनुसार, सुकर्म योग और धृति योग का निर्माण हो रहा है। साथ ही इस तिथि पर त्रिग्रही योग, बुधादित्य योग और शुक्रादित्य योग का भी प्रभाव रहेगा।
मां कालरात्रि के बाद नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा का दिन होता है। मां महागौरी को मां दुर्गा की आठवीं शक्ति के रूप में पूजा जाता है। इनकी पूजा से हर असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं और मां अपने भक्तों को मनोवांछित फल का आशीर्वाद देती है। इस दिन पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सफेद वस्त्र धारण करें। फिर मां महागौरी की प्रतिमा को गंगाजल से शुद्ध करने के बाद मां को सफेद वस्त्र अर्पित करें, कुमकुम या रोली से तिलक करें, सफेद फूल, फल, अक्षत अर्पित कर पूजा करें। मां महागौरी को हलवा, काले चने और नारियल का भोग प्रिय होता है। भोग चढ़ाने के बाद मंत्र जाप करें और फिर आरती करें। आखिर में प्रसाद वितरित करें।
महाअष्टमी पर महागौरी की पूजा के साथ ही कन्या पूजन का भी महत्व है। कुछ लोग अष्टमी तो कुछ नवमी तिथि पर कन्या पूजन करते हैं। आप अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन करते हुए कन्या पूजन कर सकते हैं। कन्या पूजन के लिए 9 छोटी कन्याओं और एक छोटे बालक (बटुक भैरव) को आदरपूर्वक घर बुलाकर पैर धोएं, तिलक लगाएं और भोजन कराएं। इसके बाद उन्हें उपहार दें और उनका आशीर्वाद लेकर उन्हें विदा करें।
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नवदुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार,माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कई वर्षों वन में रहकर कठिन तपस्या की थी। इस दौरान उन्होंने अन्न और जल का त्याग कर केवल कंद-मूल और सूखे पत्ते खाए तथा धूप-बरसात सहन की। कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर काला पड़ गया था।
उनकी इस अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया। लेकिन देवी इस रंग से छुटकारा पाना चाहती थीं। तब भगवान शिव ने अपनी जटा से बहने वाले पवित्र गंगाजल को उनके शरीर पर डाला। गंगाजल से स्नान करते ही माता का शरीर कांतिमान और गौर (श्वेत) वर्ण का हो गया। मां पार्वती के काले रंग के स्वरूप को कौशिकी नामक शक्ति स्वरूपा और पार्वती को प्राप्त हुए अत्यंत गौर वर्ण को महागौरी के नाम से जाना जाता है।
जय महागौरी जगत की माया। जया उमा भवानी जय महामाया।।
हरिद्वार कनखल के पासा। महागौरी तेरा वहां निवासा।।
चंद्रकली और ममता अंबे। जय शक्ति जय जय मां जगदंबे।।
भीमा देवी विमला माता। कौशिकी देवी जग विख्याता।।
हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा। महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा।।
सती ‘सत’ हवन कुंड में था जलाया। उसी धुएं ने रूप काली बनाया।।
बना धर्म सिंह जो सवारी में आया। तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया।।
तभी मां ने महागौरी नाम पाया। शरण आनेवाले का संकट मिटाया।।
शनिवार को तेरी पूजा जो करता। मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता।।
भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो। महागौरी मां तेरी हरदम ही जय हो।।
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