Diwali Calendar 2026: दीपावली भारत का प्रमुख हिंदू त्योहार है, जिसे देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार लंकापति रावण का वध कर दशहरा के बाद जब भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे तो इस उपलक्ष्य में अयोध्या को दीपों से रोशन किया गया था। इसलिए हर साल दीपावली मनाई जाती है। लेकिन दीपावली एक दिन का नहीं, बल्कि पांच दिनों का धार्मिक उत्सव है।
पांच दिवसीय दीपोत्सव के दौरान धनतेरस, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा और भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है। इस वर्ष पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत 6 नवंबर से होकर 11 नवंबर 2026 तक चलेगा। यहां दीपोत्सव का पूरा कैलेंडर और शुभ मुहूर्त देखें।
| त्योहार | तिथि |
| धनतेरस | शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 |
| नरक चतुर्दशी | शनिवार, 7 नवंबर 2026 |
| दीपावली / लक्ष्मी पूजन | रविवार, 8 नवंबर |
| गोवर्धन पूजा | मंगलवार, 10 नवंबर 2026 |
| भाई दूज | बुधवार, 11 नवंबर 2026 |
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दीपोत्सव का शुभारंभ धनतेरस के दिन से हो जाता है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर धनतेरस मनाई जाएगी। इस दिन आभूषण, वाहन और अन्य चीजों की खरीदारी के साथ भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की पूजा का महत्व है। साथ ही प्रदोष काल में दीपदान भी किया जाता है।
पूजा मुहूर्त- शाम 06:02 बजे से 07:57 बजे तक।
कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी मनाई जाएगी। इसे छोटी दिवाली, रूप चौदस, काली चौदस जैसे कई नामों से जाना जाता है। 7 नवंबर को काली चौदस और छोटी दिवाली का दिन रहेगा। लेकिन पंचांग गणना और उदयातिथि के अनुसार कई जगहों पर 8 नवंबर को नरक चतुर्दशी मनाई जाएगी।
अभ्यंग स्नान मुहूर्त- सुबह 5:41 बजे से 6:38 बजे तक (8 नवंबर)।
अभ्यंग स्नान का महत्व जनने के लिए पढ़े नरक चतुर्दशी 2026 का लेख
कार्तिक अमावस्या तिथि को दीपोत्सव का महत्वपूर्ण क्रम होता है। दीपावली के दिन लक्ष्मी-गणेश की पूजा की जाती है, घर-आंगन में दीप जलाए जाते हैं, उपहारों का आदान-प्रदान होता है और लोग फुलझड़ियां जलाकर खुशी मनाते हैं।
पूजा मुहूर्त- शाम 5:31 बजे से रात 8:09 बजे तक।
कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर गोवर्धन पूजा की जाती है। इसे अन्नकूट भी कहा जाता है। इस दिन गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर पूजा करने का विधान है।
पूजा मुहूर्त- सुबह 6:40 से 8:50 तक और सुबह 11:43 से दोपहर 12:26 तक (अभिजीत मुहूर्त)।
भाई दूज या यम द्वितीया का त्योहार पांच दिवसीय दीपोत्सव का अंतिम उत्सव होता है, जिसे कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर मनाया जाता है। भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास के इस पर्व में बहनें अपने भाई का तिलक कर उनकी लंबी आयु, स्वस्थ जीवन और सफलता की कामना करती हैं।
तिलक लगाने का मुहूर्त- दोपहर 1:10 बजे से दोपहर 3:20 बजे तक।
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