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किचन के लिए वास्तु

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विषयसूचि

  • वास्तु के अनुसार किचन की सही दिशा
  • किचन की खिड़की के लिए वास्तु
  • ओपन किचन लेआउट के लिए वास्तु टिप्स
  • वास्तु के अनुसार चुनें किचन का रंग
  • वास्तु के अनुसार किचन में पूजा घर
  • वास्तु के मुताबिक किचन का सामान और उनकी दिशा
  • किचन स्लैब के लिए वास्तु शास्त्र
  • किचन के लिए वास्तु के कुछ जरूरी सुझाव
  • वास्तु के अनुसार किचन में किस दिशा में पकाएं खाना
  • किचन के वास्तु दोष दूर करने के उपाय
  • अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वास्तु का हमारे जीवन में बहुत गहरा महत्व है। यही कारण है कि ज्यादातर लोग वास्तु के अनुसार ना सिर्फ अपना घर डिजाइन करवाते हैं, बल्कि बेडरूम (शयनकक्ष), किचन, हॉल, लिविंग एरिया, बाथरूम को भी वास्तु के मुताबिक डिजाइन करवाना चाहते हैं। वास्तु की मानें तो हर कमरा, हर कमरे में रखे सामान की अपनी-अपनी ऊर्जा होती है। अगर उन्हें सही दिशा में ना रखा जाए, तो इसका नकारात्मक असर हमारे जीवन में पड़ सकता है। इससे हमारे रिश्ते-नाते, स्वास्थ्य, करियर सब प्रभावित होते हैं। ऐसे में जरूरी है कि घर का हर कमरा सही दिशा में हो, हर सामान सही दिशा में रखा गया हो। इससे सफलता-समृद्धि की संभावना में वृद्धि होती है।

जब हम संपूर्ण घर की बात कर रहे हैं, तो इसमें किचन को नजरंदाज नहीं किया जा सकता। आपको बता दें कि किचन वह स्थान है, जहां से हमें पूरे दिन सक्रिय रहने के लिए ऊर्जा प्राप्त होती है। इसलिए यहां से जो भी ऊर्जा हमें मिल रही है, वह सकारात्मक होनी चाहिए। वैसे भी स्वास्थ्य ही धन है। वास्तु शास्त्र के अनुसार चीजों की सही स्थिति और उचित दिशा आपके जीवन में कई पहलुओं पर गहन असर डालती है। इसलिए आपको यह पता होना चाहिए कि किचन में जिस जगह जो रख रहे हैं, उसकी उपयोगिता है भी या नहीं।

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उदारहण के तौर पर किचन में रखी चिमनी बहुत ही यूजफूल किचन एप्लायंस है। दरअसल, चिमनी किचन से निकल रही दूषित हवा को ही बाहर नहीं निकालती बल्कि किचन की हवा को शुद्ध भी करती है। इस प्रकार किचन में मौजूद ऊर्जा हमारे लिए पोषण देने वाली हो जाती है। इसी तरह किचन में स्टोव को भी सही दिशा में रखा जाना चाहिए। वास्तुविदों के अनुसार किचन उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम में नहीं होनी चाहिए।

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वास्तु के अनुसार किचन की सही दिशा

वास्तु शास्त्र इस तथ्य को गहराई से स्वीकारता है कि ब्रह्मांड के प्राकृतिक नियमों के अनुरूप इमारतों के डिजाइन और निर्माण करना चाहिए। इन दिनों जैसा कि ओपन किचन का काफी ट्रेंड है। इसलिए वास्तु के मुताबिक ओपन किचन और बंद किचन के लिए भी अलग-अलग दिशा-निर्देश देता है। इसके नियमों को अनुसरण करने से घर में सही तरह की ऊर्जा और सकारात्मकता बनी रह सकती है। साथ ही उस घर में रहने वाले लोगों का स्वास्थ्य लाभ होता है। वास्तु के अनुसार सबसे अच्छा किचन लोकेशन चुनते समय किचन का आकार पर भी गौर किया जाना जरूरी है। अगर किचन बहुत छोटा है तो घर की महिलाओं पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

  • वास्तु के अनुसार पूर्व मुखी घर के लिए दक्षिण-पूर्व किचन के लिए आदर्श दिशा है। अगर आपकी किचन इस दिशा में स्थित नहीं है, तो कोशिश करें कि किचन उत्तर पश्चिम दिशा की ओर हो।
  • उत्तर, पश्चिम और उत्तर पूर्व दिशाओं में अपनी किचन ना बनाएं।
  • पश्चिममुखी घर के लिए किचन डिजाइन करने के लिए दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पश्चिम दिशा पर विचार किया जा सकता है।
  • टॉयलेट या बाथरूम के ऊपर या नीचे किचन बनाना सही नहीं होता है। दरअसल, बाथरूम या टॉयलेट ऐसी जगह होती है, जहां हम अपना वेस्ट फेंकते हैं। अगर ये दोनों एक-दूसरे के ऊपर नीचे रहेंगे, तो इससे नकारात्मक और सकारात्मक ऊर्जा आपस में क्लेश कर सकते हैं। यह स्थिति घर के मालिक के लिए सही नहीं है। इससे घर में पैसों की तंगी बढ़ सकती है, बनते काम बिगड़ सकते हैं।
  • अपनी किचन कभी बेडरूम के ऊपर या नीचे भी नहीं बनानी चाहिए। यही नहीं किचन में चूल्हा किचन के दरवाजे के सामने नहीं रखना चाहिए। इससे आपकी सकारात्मक ऊर्जा दरवाजे के रास्ते किचन से बाहर निलक जाएगी।
  • किचन का मुख्य द्वार कोने में नहीं होना चाहिए। दरवाजा पूर्व, पश्चिम या उत्तरी दिशा में बनवाएं।
  • ईशान कोण दिशा में किचन का होना अच्छे संकेत नहीं देता है। ऐसा करने से घर के सदस्यों के बीच मानसिक तनाव बढ़ता है। काम के बिगड़ने की आशंका में भी वृद्धि होती है।
  • दक्षिण पश्चिम दिशा में किचन नहीं होनी चाहिए। ऐसा करने से घरवालों में झगड़े हो सकते हैं और रिश्तों पर दरार भी आ सकती है।
  • उतर दिशा में किचन बनाना खतरनाक होता है। यह कुबेर भगवान की दिशा है। इस दिशा में किचन बनाने से आपके खर्चे बढ़ जाते है।
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  • सफेद - किचन के लिए औसत स्थान
  • चांदी - किचन के लिए सबसे अच्छी जगह
  • उत्तर
  • ईशान कोण
  • पूर्व
  • दक्षिण पूर्व
  • दक्षिण
  • दक्षिण पूर्व
  • पश्चिम
  • उत्तर पश्चिम

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किचन की खिड़की के लिए वास्तु

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किचन में रखे गए सामान की ही तरह किचन की खिड़की का भी खास महत्व होता है। आमतौर पर किचन में खिड़की की ओर लोगों का कम ही ध्यान जाता है। जबकि यह सही नहीं है। आपको अपने घर की किचन की खिड़की की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए। उसकी साफ-सफाई पर विशेष बल देना चाहिए ताकि खिड़की के जरिए घर में अच्छी ऊर्जा प्रवेश कर सके और उसे अंदर प्रवेश करने हेतु किसी तरह की परेशानी का सामना ना करना पड़े।

  • अगर किचन की वेंटिलेशन गलत जगह पर होगी, तो वहां खाना बनाने वाले व्यक्ति या महिला का स्वास्थ्य खराब रहने की आशंका बढ़ जाएगी। साथ ही उसे कई अन्य समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है।
  • वास्तु के अनुसार किचन की खिड़कियों की सही स्थिति सकारात्मक वातावरण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उचित जगह मौजूद खिड़की या निकास पंखे (एग्जॉस्ट) या आधुनिक चिमनी के रूप में हवा के आउटलेट, हवा को बाहर निकालने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। अच्छी रोशनी और हवा से भोजन की गुणवत्ता बेहतर हो जाती है।
  • वास्तु के अनुसार किचन में खिड़कियों के लिए सबसे अच्छी दिशा, पूर्व है। पूर्व दिशा में एग्जॉस्ट फैन भी लगाया जा सकता है।

ओपन किचन लेआउट के लिए वास्तु टिप्स

वर्तमान समय में खुली किचन यानी ओपन किचन का ट्रेंड बढ़ गया है। खुली किचन की अवधारणा बहुत सारे भारतीय परिवारों में पसंद की जा रही है, खासकर वे जिन्हाेंने लंबा समय विदेशों में बिताया है। वास्तु के अनुसार खुले किचन के लेआउट के लिए कुछ वास्तु युक्तियां दी जा रही हैं। अप इन्हें ध्यान से जानें-समझें-

  • खुली किचन के लिए आदर्श क्षेत्र दक्षिण-पूर्व है, क्योंकि दक्षिण और पूर्व दोनों दिशाओं में अग्नि तत्व का प्रभुत्व है।
  • उत्तर क्षेत्र में खुले किचन लेआउट से बचना चाहिए, क्योंकि यह करियर, विकास और धन में नए अवसरों को प्रभावित करता है।
  • खुले किचन लेआउट के लिए भी पश्चिम क्षेत्र को अच्छा माना जाता है। वास्तु के अनुसार, पश्चिम दिशा में एक खुली किचन शारीरिक और आर्थिक रूप से लाभ और अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है।

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वास्तु के अनुसार चुनें किचन का रंग

किचन पवित्रता का प्रतीक है। इसलिए किचन में वही रंग इस्तेमाल किए जाने चाहिए, जो कि शांति, शुद्धि, खुशहाली और सकारात्म्कता की ओर इशारा करते हों। ऐसे किसी रंग का किचन की दीवारों, शेल्फ में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए, जो नकारात्मकता को बढ़ावा देते हैं। ध्यान रखें कि नकारात्मक रंग आपके जीवन में उत्साह की कमी कर सकता है, आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए किचन में कुछ चुनिंदा रंगों को ही जगह दी जानी चाहिए। यहां हम आपको कुछ ऐसे ही विशेष रंगों के बारे में बता रहे हैं। साथ ही उनके लाभ और और उनसे मिलने वाले प्रतिफल भी आप यहां जान पाएंगे।

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वास्तु शास्त्र के अनुसार सफेद रंग किचन के लिए सबसे अच्छा रंग है, लेकिन सफेद रंग को ज़्यादा इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। जैसा कि किसी भी चीज की अति समस्या पैदा करती है, इसी तरह सफेद रंग की अति आपके घर में खुशहाली के बजाय नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करवा सकती है।

  • किचन में लाल रंग का अधिक प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह अस्थिर ऊर्जा पैदा करता है।
  • अपनी किचन में हमेशा गहरे रंगों का प्रयोग करने से बचना चाहिए, क्योंकि ये रंग अवसाद बढ़ाते हैं।
  • किचन के लिए अनुशंसित अन्य आदर्श रंग हरे, नींबू पीले और नारंगी हैं। ये पौष्टिक रंगों और आग के रंगों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • संतुलन बनाने के लिए किचन की छत में सफेद रंग के विकल्प को चुना जा सकता है। किचन में काले, भूरे और नीले रंगों के प्रयोग करने से बचें।

वास्तु के अनुसार किचन में पूजा घर

पूजा स्थान और किचन दोनों ही हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण और खास स्थान होते हैं। जहां लोग सुबह सवेरे नित्य क्रिया से निवृत्त होकर पूजा घर में प्रवेश करते हैं। यहीं से अमूमन लोग अपने दिन की शुरुआत करते हैं। यहीं से मन में कई अभिलाषाएं और उम्मीदें जन्म लेती हैं। ऐसे में सबसे जरूरी है कि पूजा घर सबसे पवित्र हो। लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो पूजा घर कभी भी किचन में नहीं बनाई जानी चाहिए। यह घर की सुख-शांति के लिए सही नहीं है। इसकी कई वजहें हैं-

  • पूजा घर में बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित होता है। जबकि किचन में घर आए मेहमान भी चले जाते हैं। लिहाजा पूजा कक्ष किचन में बनवाए।
  • विशेषज्ञों की मानें तो घर में सबसे पवित्र जगह किचन नहीं है। वास्तव में किचन में पूजा का स्थान बनाने से घर में अशांति पसर जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि किचन में जूठे बरतन रखे जाते हैं।
  • जूठे बर्तन घर में दरिद्रता में दरिद्रता लाते हैं और अशांति फैलाते हैं। साथ ही पूजा के स्थान में जूठे बर्तन रखने से मां लक्ष्मी रूठ जाती हैं, जिससे घर में पैसों की तंगी व्याप्त होने लगती है।
  • इसके अलावा लंबे समय तक किचन के बड़े कैबिनेट्स की सफाई नहीं होती। जिस जगह गंदगी होती है, वहां भगवान की कृपादृष्टि या दयादृष्टि उनके भक्तों पर कभी नहीं पड़ती है।
  • किचन में कई बार ऐसी चीज़ों का इस्तेमाल किया जाता है, जो पूजा घर में नहीं होनी चाहिए जैसे लहसुन, प्याज। इससे पूजा का स्थान अपवित्र होता है।
  • अगर पूजा कक्ष किचन में रखना ही हो, तो दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जैसे किचन में उत्तर/ पूर्व कोने में एक मंदिर हो सकता है। लेकिन वहां शाकाहारी भोजन ही पकाया जाना चाहिए।
  • वास्तु शास्त्र के सिद्धांत बताते हैं कि कोई भी मंदिर को चूल्हे के बाएं या दाएं रखा जा सकता है। मंदिर के सामने चूल्हा रखने से बचें।
  • वास्तु की मानें तो किचन का सिंक और चूल्हे का स्थान मंदिर के पास या नीचे नहीं होना चाहिए।

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वास्तु के मुताबिक किचन का सामान और उनकी दिशा

प्रकार सर्वश्रेष्ठ दिशा
प्रवेश द्वार उत्तर, पूर्व या पश्चिम
गैस सिलेंडर दक्षिण-पूर्व
किचन गैस दक्षिण पूर्व का कोना
फ्रिज दक्षिण पूर्व, दक्षिण, उत्तर या पश्चिम
उपकरण जैसे हीटर, अवन, माइक्रोवेव दक्षिण पूर्व या दक्षिण
स्टोरेज रैक्स पश्चिमी या दक्षिणी दीवार
सिंक उत्तर-पूर्व कोना
पेय जल ईशान कोण
खिड़किंया और एग्जॉस्ट फैन पूर्व दिशा
घड़ी दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम की दीवार

किचन स्लैब के लिए वास्तु शास्त्र

वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन स्लैब के लिए ग्रेनाइट की जगह पत्थर या मार्बल का इस्तेमाल करना अच्छा हाेता है। आप मार्बल या काले रंग का पत्थर उपयोग कर सकते हैं। किचन की दीवारों और उपयोग में आने वालों सामनों के साथ मिलकर किचन के स्लैब का रंग, उसकी दिशा-दशा भी आपके घर के लिए मायने रखती है।

  • किचन स्लैब का रंग उस दिशा पर निर्भर करता है, जिस ओर किचन स्थित है। यदि किचन पूर्व में है, तो हरा या भूरा स्लैब आदर्श रहेगा।
  • उत्तर-पूर्व में किचन के लिए, पीले स्लैब का विकल्प चुना जा सकता है। वास्तु सिद्धांतों के अनुसार किचन स्थान के लिए दक्षिण या दक्षिण-पूर्व में, भूरे, मैरून या हरे रंग के स्लैब बहुत अच्छे माने जाते हैं।
  • पश्चिम दिशा में किचन के लिए ग्रे या पीले रंग के स्लैब की सलाह दी जाती है। हालांकि उत्तर में किचन स्लैब के लिए हरा रंग ठीक है। आदर्श रूप से उत्तर क्षेत्र में किचन नहीं होना चाहिए।
  • अगर आप किचन में ग्रेनाइट का उपयोग करना चाहते हैं, तो किचन में लाल रंग की ग्रेनाइट लगा सकते हैं, क्योंकि लाल रंग अग्नि का प्रतीक है। इस रंग की बदौलत आपको कई शुभ परिणाम मिल सकते हैं।

किचन के लिए वास्तु के कुछ जरूरी सुझाव

वास्तु के सिद्धांतों के अनुसार सिर्फ उनके नियमों का अनुसरण करना ही काफी नहीं होता। कई अन्य जरूरी बातें भी हैं, जिन्हें निश्चित रूप से मानना भी चाहिए।

  • शौचालय के आसपास कभी भी किचन नहीं बनाना चाहिए। शौचालय के ऊपर और नीचे भी किचन बनाने से बचना चाहिए।
  • वास्तु के अनुसार किचन का दरवाजा मुख्य द्वार की ओर नहीं होना चाहिए।
  • किचन में कभी भी दवाइयां नहीं रखनी चाहिए। इसमें बच्चे की दवाई तो बिल्कुल ना रखें। इससे उसका स्वास्थ्य और बिगड़ सकता है।
  • किचन में कभी भी बेकार पड़ी सामग्री नहीं रखनी चाहिए। किचन में जो सामान उपयोग में नहीं है, उसे निकाल देना चाहिए।
  • किचन के एक प्लेटफॉर्म में कभी भी वॉशबेसिन और कुकिंग रेंज नहीं होना चाहिए।
  • आग और पानी दोनों विरोधी तत्व हैं, इसलिए यह जोड़ों और परिवार के सदस्यों के बीच झगड़े और दरार पैदा कर सकते हैं।
  • वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन में कभी भी जूते के रैक को नहीं रखना चाहिए। अगर किसी वजह से किचन में चप्पल पहनना ही पड़े, तो वहां के लिए अलग चप्पल खरीदें। बाहर की चप्पलों को कभी भी किचन में स्थान ना ले जाएं।
  • अगर किचन में ओवरहेड टैंकर है तो वास्तु के अनुसार उसका मुंह उत्तर या ईशान कोण में नहीं होना चाहिए। आप इसे किचन के बाहर पश्चिम दिशा में रख सकते हैं।

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वास्तु के अनुसार किचन में किस दिशा में पकाएं खाना

वास्तु में गैस, स्टोव की सही दिशा के साथ-साथ खाना पकाने वाले की भी सही दिशा का महत्व बताया गया है। जो भी व्यक्ति खाना पका रहा है, उसे वास्तु के इन सिद्धांतों का अनुसरण अवश्य करना चाहिए। यह उनके जीवन में प्रतिकूल स्थिति को बेहतर बनाने में सहयोगपूर्ण हो सकता है।

  • खाना बनाते समय पूर्व दिशा की ओर मुंह करना चाहिए।
  • किचन के सामान जैसे गैस स्टोव और उपकरणों को इस तरह रखा जाना चाहिए ताकि खाना बनाते समय पूर्व की ओर मुंह हो।
  • खाना पकाने की एक वैकल्पिक दिशा पश्चिम है। यदि चूल्हे का स्थान सिंक के पास है, तो वास्तु उपाय के रूप में बीच में एक बोन चाइना फूलदान रखा जा सकता है। इससे आपस में अग्नि और जल का आपस में टकराव नहीं होगा। जिससे घर की स्थिति सामान्य बनी रहेगी।

किचन के वास्तु दोष दूर करने के उपाय

कई बार ना चाहते हुए वास्तु के अनुसार हम लोगों से कुछ काम ऐसे हो जाते हैं, जिन्हें हमें नहीं करना चाहिए, जिससे वास्तु दोष उत्पन्न हो जाता है। वास्तु सिद्धांतों की मानें तो वास्तु दोष का दूर किया जाना बहुत जरूरी है। इसके लिए यहां विशेषज्ञों द्वारा दी गई कुछ सलाहों को आजमा सकते हैं-

  • वास्तु के अनुसार किचन स्थान उत्तर-पूर्व या उत्तर दिशा में है, चूल्हे के ऊपर रखा गया बृहस्पति क्रिस्टल पिरामिड वास्तु दोष को कम करने में मदद करता है। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होगी।
  • अगर आपने चूल्हा वास्तु शास्त्र के अनुसार नहीं रखा है, तो चूल्हे के सामने की दीवार पर तीन जस्ता पिरामिड का एक सेट चिपका दें।
  • जिस किचन में घर के मुख्य दरवाजे के सामने वास्तु दोष हो, उसके लिए छत पर मुख्य दरवाजे और किचन के दरवाजे के बीच 50 मिमी का क्रिस्टल लटका सकते हैं।
  • यदि किचन में बिजली के उपकरण दक्षिण-पूर्व के अलावा अन्य दिशाओं में रखे जाते हैं, तो वास्तु के अनुसार बिजली के उपकरणों के पास एक मंगल क्रिस्टल पिरामिड चिपकाया जा सकता है। इससे वास्तुदोष कम हो जाएगा।
  • यदि किचन और शौचालय की एक साझा दीवार है, तो एक जस्ता धातु 'नौ पिरामिड' को दीवार के दोनों किनारों पर चिपका लें। इससे नकारात्मक ऊर्जा कम हो जाएगी।
  • वास्तु दोषों को ठीक करने के लिए, आप बिना पिसे हुए समुद्री नमक के छोटे हिस्से भी अपने किचन में रख सकते हैं। यह घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा सोख लेती है। लेकिन ध्यान रखें कि जिस कटोरी में आप नमक रख रहे हैं, वह नया हो। साथ ही कटोरे का नमक नियमित बदलते रहना जरूरी है।
  • खाना पकाने वाले व्यक्ति के पीछे किचन का दरवाजा नहीं होना चाहिए। दरवाजा दक्षिणावर्त दिशा में या तो पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में खुलना चाहिए। यदि यह संभव नहीं है, तो चूल्हे के सामने की दीवार पर तीन जिंक ज्यूपिटर क्रिस्टल पिरामिड लगा सकते हैं।

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