
कई बार हम घर बनवाते या खरीदते समय सभी कमरों के वास्तु का विशेष ध्यान रखते हैं। ऐसा इसलिए करते हैं ताकि हमारे घर में किसी तरह की नकारात्मक ऊर्जा प्रविष्ट न कर सके और घर में सकारात्मकता का आगमन हो, जिससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहे। जरूरत पड़ने पर हम कई बार वास्तु विशेषज्ञों से परामार्श भी करते हैं। लेकिन ज्यादातर लोग एक सामान्य गलती करते हैं, घर के बाथरूम के वास्तु की जांच न करवाना। इस वजह से आपको जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
जबकि बाथरूम का वास्तु संगत होना बहुत जरूरी है। भले इस स्थान में हम ज्यादा समय नहीं बिताते हैं, लेकिन कई लोग कुछ क्षण शांतिपूर्ण व्यतीत करने के लिए बाथरूम में बैठना पसंद करते हैं। इस दृष्टि से देखा जाए, तो बाथरूम का वास्तु परक होना घर के सभी सदस्यों के खुशहाल जीवन के लिए बहुत जरूरी है। इसलिए आप जब भी घर बनवाएं या खरीदें तो आपको घर के बाथरूम को वास्तु नियमों के अनुसार माप लेना चाहिए ताकि वास्तु दोष से बचे रह सकें।
आपको एक महत्वपूर्ण बात बताते चलें कि अगर घर का बाथरूम वास्तु अनुसार नहीं होता है, तो जातक के घर में नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न हो जाती है, जिसके कारण घर के सभी सदस्यों को परेशानी का अनुभव करना पड़ता है। अपने घर के सभी सदस्यों को परेशानी से मुक्त रखने के लिए जरूरी है कि वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करना।
वास्तुशास्त्र के अनुसार बाथरूम और शौचालय आपके घर की उत्तर या उत्तर-पश्चिम दिशा में होना चाहिए। बाथरूम को दक्षिण या दक्षिण पूर्व और दक्षिण-पश्चिम दिशा में नहीं बनाना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि इस दिशाओं में बाथरूम होने से घर के लोगों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। शौचालय का निर्माण करते समय उसमें टॉयलेट सीट जमीन से एक से दो फीट ऊंची रखनी चाहिए।
अधिकांश लोग वास्तु के अनुरूप बना घर खरीदना काफी पसंद करते हैं क्योंकि वास्तु अनुसार बना घर समृद्धि और खुशहाली में इजाफा करते हैं, घर के सभी सदस्यों को नकारात्मक ऊर्जा से दूर रखते हैं। साथ ही घर में सदैव सकारात्मकता वास करती है, जिससे घर में सब कुशल मंगल होता है। मौजूदा समय में वास्तु संगत घर की काफी डिमांड बढ़ी है। इस तरह के घर को काफी प्राथमिकता भी दी जा रही है। इसमें वास्तु अनुसार बना बाथरूम भी अछूता नहीं है। आज के समय में लोग न सिर्फ घर के लिविंग रूम की बल्कि किचन और बाथरूम के वास्तु की भी पूरी जांच परख करते है। अत: घर के बाथरूम को भी बाकी कमरों की तरह वास्तु अनुसार बनाना चाहिए।
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वास्तु शास्त्र के अनुसार आपको घर के उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में शौचालय नहीं बनाना चाहिए। इस दिशा में बाथरूम बनाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है। यदि किसी कारणवश आपके घर में उत्तर-पूर्व दिशा में बाथरूम बन गया है, तो इससे घर में वास्तु दोष पैदा हो जाता है। आप वास्तुदोष से मुक्त हो सकते हैं, इसके लिए आपको निम्न उपाय आजमाने होंगे।
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वास्तु शास्त्र के अनुसार दक्षिण दिशा में शौचालय होना जातक के लिए हानिकारक साबित होता है। अगर आपके घर में दक्षिण दिशा में बाथरूम है, तो वहां लाल, गुलाबी, नारंगी, बैंगनी जैसे हल्के रंगों का उपयोग करना चाहिए। अगर आपके घर का बाथरूम बड़ा है, तो आपको तटस्थ रंगों का प्रयोग करना चाहिए। इस तरह वास्तु अनुसार बाथरूम और शौचालय की जगह के लिए सही रंग चुनकर आप घर में उत्पन्न ऊर्जा को संतुलित कर सकते हैं।
अगर आपका बाथरूम दक्षिण-पश्चिम दिशा में है, तो आपको वास्तु के इन उपायों का पालन अवश्य करना चाहिए:
वास्तु अनुसार दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बाथरूम बनाने से जातक के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। आपको इस दिशा में बने शौचालयों वाले घर नहीं लेने चाहिए। अगर किसी कारणवश आपके घर का बाथरूम इसी दिशा की ओर है, तो आपको ऐसे उपाय अपनाने चाहिए जिससे वास्तुदोष को दूर किया जा सके। यहां हम आपको उन्हीं उपायों के बारे में बता रहे हैं-
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वास्तु में दक्षिण-पूर्व दिशा आग की दिशा मानी जाती है, जो बाथरूम निर्माण में सहायक नहीं है, क्योंकि पानी और आग का एक ही दिशा में होना जातक के जीवन के लिए घातक होते हैं। यदि आपका बाथरूम, इसी दिशा में है, तो वास्तुदोष से छुटकारा पाना बहुत जरूरी है। आइए जानते हैं कुछ वास्तु दोष दूर करने के उपाय-
वास्तु के अनुसार आपको अपने घर में शौचालय की सीट का निर्माण इस तरह से करना चाहिए कि इसका उपयोग करने वाले का मुख उत्तर या दक्षिण दिशा की ओर हो। साथ ही इस दिशा में टॉयलेट सीट होने से परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। वास्तु के अनुसार शौचालय में एक खिड़की अवश्य होनी चाहिए, जो उचित ऊर्जा प्रवाह सुनिश्चित करने में मदद करे।
बाथरूम में शीशे की खासा उपयोगिता होती है। इसलिए मौजूदा समय में एक से एक बेहतरीन शीशे बाजार में मौजूद हैं। आमतौर पर ज्यादातर लोग अपने बाथरूम में किसी भी दिशा में शीशा लगा लेते हैं। जबकि ऐसा नहीं किया जाना चाहिए। शीशा किस दीवार पर लगेगा और किस दिशा में लगेगा, ये बातें बहुत महत्वपूर्ण है। अगर वास्तु के अनुकूल शीशा न लगाया जाए, तो इसका जातक के परिवार, उनके दांपत्य जीवन पर पड़ सकता है। मौजूद है बाथरूम में शीशा लगाने के लिए वास्तु टिप्स -
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बाथरूम को साफ-सुथरा और गंदगी मुक्त रखना चाहिए। आमतौर पर महिलाएं अपने बाथरूम की ऊपरी तौर पर खूब सफाई करती हैं। लेकिन बाथरूम के कैबिनेट्स में कई ऐसे सामान रखे होते हैं, जिसकी सफाई कई-कई महीनों तक नहीं होती है। इसमें बाथरूम में इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट और इलेक्ट्रॉनिक एप्लायंस जैसे गीजर आदि शामिल हैं। इनकी भी समय-समय पर सफाई की जानी बहुत जरूरी है। साथ ही इन इक्विपमेंट को किस दिशा में रखना है, यह जानना भी बहुत जरूरी है।
वास्तु के अनुसार आपके बाथरूम के बाथ टब का आकार गोल या चौकोर (round or square) होना चाहिए। इसमें नुकीले किनारे नहीं होने चाहिए। साथ ही आपको इसे उत्तर, पूर्व, पश्चिम या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना चाहिए। वास्तु के अनुसार बाथरूम मैट व्हाइट या नीले रंग के होने चाहिए और उन्हें बाथटब के पास रखना चाहिए। काले या लाल जैसे डार्क कलर्स के उपयोग से बचना चाहिए। बाथटब को बाथरूम के दक्षिण दिशा की ओर रखना चाहिए। जो लोग अपने बाथरूम में सुगंधित मोमबत्तियों से स्पा जैसा माहौल बनाना चाहते हैं, वे इन मोमबत्तियों को बाथरूम के उत्तर-पूर्व दिशा में रख सकते हैं।
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वास्तु के अनुसार बाथरूम में एक खिड़की या उचित वेंटिलेशन की जगह होनी चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जाएं बाहर निकलती हैं और बाथरूम में प्राकृतिक रोशनी बनी रहती है। बाथरूम में खिड़कियां पूर्व, उत्तर या पश्चिम की ओर खुलनी चाहिए। इसके अलावा, बाथरूम की खिड़कियां बाहर की ओर खुलनी चाहिए।
वास्तु अनुसार बाथरूम के लिए डार्क कलर्स जैसे काला, डार्क ब्लू या लाल जैसे रंगों के उपयोग से बचना चाहिए। इन रंगों के टाइल्स भी नहीं लेने चाहिए और न ही बाथरूम को इन रंगों से पेंट करना चाहिए। दरअसल, इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा तो प्रवेश करती ही है, स्वच्छता की दृष्टि से भी ये रंग सही नहीं होते हैं। साथ ही गाढ़े रंग की वजह से बाथरूम कॉम्पैक्ट, छोटा और अधिक तंग लगने लगता है। इसके विपरीत बाथरूम, टॉयलेट में हल्के रंग जैसे कि बेज और क्रीम रंगों का उपयोग करना चाहिए। हल्के रंगों को शंति का प्रतीक माना जाता है इसलिए आपको बाथरूम में हल्के रंगो का चुनाव करना चाहिए।
वास्तु सिद्धांतों के अनुसार आपका बेडरूम, बाथरूम के पास नहीं होना चाहिए। साथ ही बाथरूम की दीवार आपके बेडरूम, रसोई घर और पूजा कक्ष जैसे पवित्र स्थानों से जुड़ी नहीं होनी चाहिए। अगर आपका घर छोटा है, जिस वजह से आप इस तरह की परेशानी से बच नहीं सकते हैं, तो बेडरूम में रखे अपने बेड की दिशा बदल लीजिए। बेडरूम में अपना बिस्तर बाथरूम की दीवार से दूर रखें। वास्तु शास्त्र के अनुसार नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए यह सबसे अच्छा तरीका माना जाता है।
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वास्तु के अनुसार घर के बाथरूम में ड्रेन उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व में होनी चाहिए और बाथरूम का ढलान एक ही दिशा में होना चाहिए।
वास्तु कहता है कि बाथरूम का फर्श कभी भी बेडरूम और अन्य कमरों की ऊंचाई के बराबर नहीं होना चाहिए। इससे अलग बाथरूम का फर्श जमीनी स्तर से कम से कम एक फुट ऊंचा होना चाहिए। इसे ऊंचा करने के लिए आप अपने घर के बाथरूम के फर्श पर टाइलों का उपयोग कर सकते हैं। लेकिन काले या लाल रंग की टाइलों के प्रयोग से बचें। वास्तु के अनुसार बाथरूम और शौचालय के फर्श पर नीला, सफेद या पेस्टल रंग का उपयोग सही माना जाता है।
वास्तु सिद्धांतों के अनुसार आपको घर के दक्षिण-पश्चिम कोने में ओवरहेड टैंक रखना चाहिए। इससे आपको वित्तीय कल्याण हो सकता है। वास्तु में कहा गया है कि टंकी को कभी भी ईशान कोण या दक्षिण-पूर्व कोने में नहीं रखना चाहिए।
वास्तु के अनुसार आपको अपने बाथरूम और शौचालय को उत्तर या उत्तर पश्चिम दिशा में बनाना चाहिए। साथ ही बाथरूम को दक्षिण, दक्षिण पूर्व या दक्षिण पश्चिम दिशा में नहीं बनवाना चाहिए, क्योंकि वास्तु में बाथरूम के लिए यह दिशा उचित नहीं मानी जाती है।
वास्तु अनुसार शौचालय को पूजा कक्ष के ऊपर या नीचे और बेडरूम के पास नहीं होना चाहिए। आपको इसे उत्तर-दक्षिण दिशा में बनवाना चाहिए। साथ ही कमोड को पश्चिम, दक्षिण या उत्तर-पश्चिम दिशा में रखना चाहिए।
अपने घर के उत्तर-पूर्व, घर के बीचों-बीच और दक्षिण-पश्चिम कोने में शौचालय बनाने से बचना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर-पूर्व एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिशा मानी जाती है, जो पूजा घर के लिए शुभ होती है। वास्तु के अनुसार बाथरूम के साथ टॉयलेट नहीं होना चाहिए। वास्तु में इसे नकारात्मक ऊर्जा का क्रेंद माना जाता है इसलिए इस दिशा में बाथरूम नहीं बनाना चाहिए। साथ ही इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि बाथरूम किचन एरिया या पूजा कक्ष के पास न बनवाएं।
वास्तु के अनुासर घर के उत्तर दिशा में कभी भी शौचालय का निर्माण नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह भगवान कुबेर की दिशा मानी जाती है। साथ ही उत्तर दिशा में शौचालय का निर्माण करने से घर के सभी सदस्यों को नकारत्मक ऊर्जा प्रभावित कर सकती है। खासकर घर में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर इसका बुरा सर पड़ सकता है।
वास्तु में शौचालय के दक्षिण की ओर सेप्टिक टैंक नहीं बनवाना चाहिए। इसका सबसे अच्छा स्थान घर के पश्चिम की ओर या घर के उत्तर-पश्चिम की ओर माना जाता है। साथ ही सेप्टिक टैंक घर के फर्श के स्तर से ऊंचा होना चाहिए।
अटैच्ड टॉयलेट-बाथरूम दक्षिण-पूर्व या दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर नहीं बनवाना चाहिए। इसका निर्माण दक्षिण दिशा में करना बेहतर होता है।
बाथरूम में दक्षिण-पश्चिम या दक्षिण-पूर्व में नल नहीं लगवाना चाहिए। साथ ही इस दिशा में पानी जमा न होने दें। नल और पानी के लिए पूर्व, उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा उपयुक्त मानी जाती है।
शौचालय का निर्माण करवाते समय आपको वास्तु नियमों का ध्यान रखना चाहिए। अगर आप बाथरूम या टॉयलेट सीट को वास्तु नियमों के अनुसार नहीं लगवा रहे हैं, तो इससे वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है। बाथरूम में वॉशबेसिन, नल, खिड़की, दरवाजे आदि की दिशा वास्तु अनुसार होनी चाहिए।
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| दिशा | प्रभाव |
|---|---|
| उत्तर दिशा | इस दिशा में बाथरूम और शौचालय बनाने से जातक के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। व्यापार और धन में कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ता है। साथ ही जीवन में आने वाले नए अवसरों में भी बाधा उत्पन्न होती है। |
| उत्तर- पूर्वी दिशा | परिवार के सभी सदस्यों को स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों का अनुभव करना पड़ता है। |
| पूर्व दिशा | इस दिशा में शौचालय और बाथरूम बनाने से जातक को स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही स्वास्थ्य से जुड़ी ये परेशानियां व्यक्ति के पाचन तंत्र और लीवर पर प्रभाव डालती हैं। |
| दक्षिण पूर्व दिशा | जातक को वित्तीय के साथ-साथ, वैवाहिक जीवन और बच्चों से जुड़ी परेशानियों का अनुभव करना पड़ता है। |
| दक्षिण दिशा | व्यक्ति के बिजनेस में घाटा हो सकता है और कानूनी काम में परेशानी का सामना करना पड़ता है। |
| दक्षिण पश्चिम दिशा | इस दिशा में टॉयलेट या बाथरूम होने से जातक के रिश्ते, स्वास्थ्य और करियर में कई तरह की परेशानियां उत्पन्न होती हैं। |
| पश्चिम दिशा | व्यक्ति को धन संपत्ति से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। |
| उत्तर पश्चिम दिशा | इस दिशा में शौचालय बनाने से व्यक्ति को संपत्ति बेचने में दिक्कत आ सकती है। साथ ही व्यक्ति को लोगों का सहयोग भी प्राप्त नहीं होता। |
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वास्तु के अनुसार नल या शॉवर बंद करने के बाद भी अगर पानी टपकता है, तो इसे अशुभ माना जाता है, क्योंकि इससे जातक के जीवन पर बुरा प्रभाव डालती है। साथ ही पानी की भी काफी बर्बादी होती, जिसे वास्तु के अनुसार सही नहीं माना जाता है। इसलिए आपको टपकते नलों को तुरंत ठीक करवाना चाहिए, क्योंकि इससे अनावश्यक खर्च और धन की हानि होने की आशंका बढ़ती है।
ज्यादातर लोगों के घरों में कार्यालय नहीं होता है। लेकिन कोविड के बाद से कई कंपनियों ने स्थाई रूप से वर्क फ्रॉम होम कल्चर को अपनाया है। यही कारा है कि अब कई लोगों के घरों में वर्कस्टेशन होने लगे हैं। इसे आप घर का कार्यालय भी कह सकते हैं। घर में कार्यालय बनाने हेतु भी कुछ नियमों का सख्ताई से पालन करना चाहिए। खासकर घर के कार्यालय की बात करें, तो वहां हर चीज सटीक जगह पर रखी होनी चाहिए ऐसा न करने पर वहां काम करने वाले व्यक्ति का काम बाधित हो सकता है, पैसों का आवागम रुक सकता है, नए आइडियाज भी प्रभावित हो सकते हैं। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए जब भी आप अपने घर के कार्यालय को बनवाएं, तो वहां के टॉयलेट रूम और उसकी दिशा का भी विशेष ध्यान रखें।
वास्तु के अनुसार घर के कार्यालय में शौचालय के लिए सबसे अच्छा स्थान उत्तर-पश्चिम या पश्चिम दिशा को माना जाता है। वास्तु शास्त्र में कार्यालय के केंद्र (ब्रह्मस्थान) या कमरे के उत्तर-पूर्व दिशा में शौचालय नहीं बनाना चाहिए। साथ ही उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम कोनों में भी शौचालय बनाने से बचना चाहिए।
वास्तु के अनुसार बाथरूम में अंधेरा नहीं होना चाहिए बल्कि इसमें पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए। अगर बाथरूम में खिड़कियां नहीं हैं, तो प्राकृतिक धूप का अनुकरण करने और स्वस्थ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ओवरहेड लाइटिंग फिक्स्चर में बल्ब का उपयोग कर सकते है। इसी प्रकार छोटे साइज के बाथरूम में भी सामान्य प्रकाश की व्यवस्था जरूर होनी चाहिए। इसके लिए एक सेंट्रल सीलिंग लाइट पर्याप्त रहेगी। बड़े बाथरूम के लिए, जिसे अटैच्ड टॉयलेट होता है, इसके सभी कोनों में पर्याप्त रोशनी के लिए ओवरहेड फिक्स्चर का इस्तेमाल करना चाहिए।
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वास्तु शास्त्र के अनुसार आपको बाथरूम में फैमिली फोटो, बुद्ध की मूर्तियां, कछुआ, झरने, नदियों, मछलियों और हाथी की तस्वीर या मूर्तियां रखने से बचना चाहिए। आप बाथरूम में फूलों, पेड़ों, घास के मैदानों आदि की तस्वीरें लगा सकते हैं।
वास्तु शास्त्र के अनुसार बाथरूम को कभी भी सीढ़ी के नीचे वाले खाली स्थान में नहीं बनवाना चाहिए। दरअसल इस स्थान को हमेशा स्टोर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जहां घर के बेकार और पुराने सामान को रखा जा सके। इस दृष्टि से यह स्थान नकारात्मक ऊर्जा को उत्पन्न करती है। ऐसे में यदि आप अपने बाथरूम को सीढ़ी के नीचे बनवाएंगे, तो इससे बाथरूम से उत्सर्जित होने वाली ऊर्जाएं आपके घर को बुरी तरह प्रभावित कर सकती हैं। इससे वास्तु दोष भी उत्पन्न हो सकता है, जो घर के सभी सदस्यों की सफलता, स्वास्थ्य और समृद्धि की बाधक बन सकती है।
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