गुरु महादशा क्या होती है? - प्रभाव, लक्षण और उपाय

16 वर्षों का यह शुभ काल भरता है ज्ञान, धर्म और जीवन में समृद्धि

वैदिक ज्योतिष में ग्रह और ग्रहों की दशाओं को विशेष महत्व दिया जाता है। सभी गहों में बृहस्पति (गुरु) की महादशा को महत्वपूर्ण माना गया है। देव गुरु बृहस्पति आकाश तत्व के स्वामी और देवताओं के परामर्शदाता माने जाते हैं। इसलिए जब किसी जातक की कुंडली में गुरु की महादशा चलती है तो उसके जीवन में कई बड़े परिवर्तन होने लगते हैं। गुरु की महादशा के दौरान जीवन की दशा और दिशा में पूरी तरह से बदलाव होने लगता है। अगर आप जानना चाहते हैं कि,गुरु की महादशा क्या है, यह कितने वर्ष की होती है, गुरु महादशा के लक्षण क्या है, जीवन पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है और गुरु की महादशा में अन्य ग्रहों की अंतर्दशा का फल कैसा होता है तो यहां विस्तार से पढ़ते रहें।

गुरु की महादशा क्या होती है?

गुरु की महादशा विंशोत्तरी दशा प्रणाली का अहम हिस्सा है। विंशोत्तरी दशा पद्धति में 120 वर्ष के मानव जीवनकाल को ग्रहों की अवधियों में बांटा गया है, जिसमें प्रत्येक ग्रह एक निश्चित अवधि तक व्यक्ति के जीवन पर शासन करता है। गुरु की महादशा की अवधि 16 वर्षों की होती है। गुरु की महादशा राहु की महादशा के बाद और शनि की महादशा से पहले शुरू होती है। यह ऐसा कालखंड होता है जिसमें गुरु ग्रह की ऊर्जा का प्रभाव जातक के जीवन पर पड़ता है। ज्योतिष में गुरु को ज्ञान और विस्तार का कारक माना गया है। महादशा के दौरान गुरु जिस भाव में होता है या जिसकी दशा आती है, वह उस क्षेत्र में विस्तार प्रदान करता है। गुरु महादशा के दौरान व्यक्ति के भीतर सात्विकता और धर्म के प्रति झुकाव बढ़ता है। हालांकि गुरु महादशा का प्रभाव कैसा होगा, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि, कुंडली में गुरु की स्थिति कैसी है।

गुरु की महादशा के मुख्य लक्षण

गुरु ज्ञान, धर्म, सुख,संतान, भाग्य और धन आदि का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए जब गुरु की महादशा लगती है तो जातक का झुकाव धार्मिक कार्यों की ओर बढ़ने लगता है। शुभ गुरु की महादशा के लक्षण में ज्ञान और शिक्षा का विस्तार होता है, धन-समृद्धि बढ़ती है, पारिवारि और संतान सुख मिलता है। वहीं आर्थिक हानि, पारिवारिक विवाद और भ्रम या अहंकार का बढ़ना अशुभ या पीड़ित गुरु महादशा के लक्षण हैं।

गुरु की महादशा का प्रभाव

गुरु की महादशा का प्रभाव हरेक व्यक्ति के जीवन पर अलग-अलग पड़ता है। कुंडली में गुरु की स्थिति, युति और दृष्टि पर निर्भर करता है। गुरु जब केंद्र (1,4,7,10) या त्रिकोण (1,5,9) भाव में स्थित हो तो गुरु महादशा में भी जातक को शुभ परिणाम मिलते हैं। वहीं गुरु यदि छठे, आठवें, बारहवें या नीच का होकर शत्रु ग्रहों के दृष्ट हो तो धन हानि होती है और परेशानियां बढ़ती हैं। जानें गुरु की महादशा के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों के बारे में-

 शुभ गुरु महादशा के प्रभाव  

  • गुरु शुभ हो तो धन-संपत्ति में वृद्धि होती है और निवेश का भी लाभ मिलता है।
  • विद्या, बुद्धि और आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति होती है। शिक्षा क्षेत्र में सफलता मिलती है।
  • मजबूत गुरु पारिवारिक और वैवाहिक जीवन का सुख प्रदान करता है। संतान सुख के भी  योग बनते हैं।
  • जिनकी कुंडली में गुरु मजबूत होते हैं वह व्यक्ति पूजा-पाठ, व्रत, दान-पुण्य जैसे कार्यों में अधिक रुचि लेता है।

 अशुभ गुरु महादशा के प्रभाव 

  • आर्थिक हानि बढ़ती है। फिजूलखर्ची, कर्ज और आर्थिक अस्थिरता हो सकती है।
  • गुरु महादशा के अशुभ प्रभाव से शिक्षा क्षेत्र में रुकावट आती है। साथ ही नौकरी-बिजनेस में भी तरक्की रुक जाती है।
  • कमजोर गुरु बीमारियों को भी बढ़ता है। खासकर मोटापा, मधुमेह और लीवर संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
  • वैवाहिक जीवन में अनबन और संतान की उन्नति में बाधा आती है। धर्म और अध्यात्म के प्रति व्यक्ति की रुचि कम हो जाती है। 

गुरु महादशा अंतर्दशा अवधि

गुरु महादशा की अवधि 16 वर्ष की होती है, जिसे 9 अंतर्दशाओं में विभाजित किया गया है। इनमें गुरु और अंतर्दशाओं के ग्रहों का मिला-जुला प्रभाव रहता है। आइए जानते हैं गुरु की महादशा में अंतर्दशा ग्रह, अवधि और इसके मुख्य प्रभाव-

अंतर्दशा ग्रह

अवधि (16 वर्ष)

प्रभाव

गुरु- गुरु

2 वर्ष 1 महीना

धर्म में रुचि बढ़ती है, नए कार्य की योजना बनती है और पारिवार सुख मिलता है।

गुरु- शनि

2 वर्ष 6 महीना

व्यक्ति खूब मेहनत करता है, लेकिन सफलता में देरी हो सकती है।

गुरु- बुध

2 वर्ष 3 महीना

लेखन, व्यापार और वकालत क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह अवधि अच्छी होती है।

गुरु- केतु

11 महीना

यह अवधि जातक के लिए कष्टकारी रहती है।

गुरु- शुक्र

2 वर्ष 8 महीना

विवाह के योग बनते हैं। प्रेम और सुख बढ़ता है।

गुरु- सूर्य

9 महीना

सरकारी नौकरी, पदोन्नति और पिता से सहयोग मिलता है।

गुरु- चंद्रमा

1 वर्ष 4 महीना

मानसिक शांति बढ़ती है और धन का आगमन होता है।

गुरु- मंगल

11 महीना

भूमि-भवन का लाभ होता है। लेकिन भाइयों संग विवाद की संभावना रहती है।

गुरु- राहु

2 वर्ष 4 महीना

सेहत प्रभावित होता है और आर्थिक नुकसान की संभावना रहती है।

चंद्रमा की महादशा में अन्य ग्रहों की अंतर्दशा और उनके फल

1. गुरु की महादशा में गुरु की अंतर्दशा

गुरु की महादशा में गुरु की अंतर्दशा चलना आध्यात्मिक खोज को बढ़ता है। इस समय व्यक्ति यदि मेहनत करे तो समाज में नाम और प्रसिद्धि हासिल करने में सक्षम हो सकता है। धार्मिक यात्राओं के योग बनते हैं और पुण्य कार्य करने का अवसर मिलता है। लेकिन गुरु पीड़ित हो तो यह दशा जीवनसाथी से अलगाव का कारण भी बन सकती है। धन हानि और समाज में बदनामी भी हो सकती है।

2. गुरु की महादशा में शनि की अंतर्दशा

गुरु महादशा में शनि की अंतर्दशा धर्म-कर्माधिपति योग जैसा फल देता है। दशा की अवधि में यदि कोई ग्रह मूलत्रिकोण या शुभ ग्रह के प्रभाव में हो तो कार्यक्षेत्र में खूब उन्नति होती है और भूमि-भवन का सुख मिलता है। लेकिन गुरु या शनि के नीच, अस्त, शत्रुक्षेत्री या किसी त्रिक भाव में होने से अवगुण बढ़ते हैं। व्यक्ति मेहनत तो करता है लेकिन फिर भी सफलता पाने में देरी होती है। इस अवधि में प्रतिकूल प्रभावों के कारण कुछ सेहत संबंधी परेशानी भी हो सकती है।

3. गुरु की महादशा में बुध की अंतर्दशा

गुरु और बुध दोनों ही ज्ञान और बुद्धि के कारक हैं। इसलिए जब गुरु की महादशा में बुध की अंतर्दशा चलती है तो व्यक्ति के ज्ञान का स्तर बढ़ता है और बौद्धिक क्षमता में विकास होता है। व्यापारिक क्षेत्र में भी सफलता मिलती है। लेकिन ग्रह प्रतिकूल हों तो परिश्रम और प्रयास असफल भी हो सकते हैं और त्वचा संबंधी परेशानी बढ़ती है।

4. गुरु की महादशा में केतु की अंतर्दशा

आमतौर पर यह अवधि थोड़ी कष्टकारी मानी जाती है। क्योंकि केतु वैराग्य लाता है, जिससे व्यक्ति का मन ज्ञान और काम से हटकर एकांत में लग जाता है। करियर से जुड़े मामलों में भी केतु भ्रम पैदा करता है। हालांकि ग्रह अनुकूल हों तो आध्यात्मिक प्रवृत्ति बढ़ती है और धार्मिक यात्रा के योग बनते हैं। 

5. गुरु की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा

गुरु की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा सामान्यत: शुभ फल देती है। गुरु और शुक्र दोनों धन-संपत्ति के प्रतीक हैं। इसलिए कुंडली में अगर दोनों ग्रह शुभ हों तो सफलता और समृद्धि बढ़ती है। व्यक्ति को वस्त्र, वाहन, आभूषण और भौतिक सुख-सुविधाएं मिलती हैं। खासकर विवाह के लिए यह अवधि अच्छी मानी जाती है।

6. गुरु की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा

गुरु और सूर्य दोनों ही सर्वोच्च और शक्तिशाली ग्रह हैं। गुरु की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा होती है तो व्यावसायिक कामों में सफलता मिलती है, पदोन्नति के अवसर प्राप्त होते हैं और धन में वृद्धि होती है। लेकिन दोनों या दोनों में कोई ग्रह अशुभ हो तो शरीर में दर्द, बुखार, सिरदर्द, मानसिक अशांति और तंत्रिका संबंधी विकार होते हैं।

7. गुरु की महादशा में चंद्रमा की अंतर्दशा

यह दशा जातक को जीवनसाथी और संतान सुख दिलाती है। गुरु की महादशा में चंद्रमा की अंतर्दशा से गजकेसरी योग बनता है। इसके प्रभाव से आय में वृद्धि होती है। इस अवधि में आर्थिक तरक्की भी होती है। मानसिक शांति बनी रहती है, माता के साथ संबंध बेहतर होते हैं और काम में सफलता मिलती है। लेकिन किसी ग्रह के कमजोर, नीच, अस्त या षडाष्टक योग होने पर मन में उदासीनता, अपमान, स्थान परिवर्तन और कष्ट होता है।

8. गुरु की महादशा में मंगल की अंतर्दशा

गुरु ज्ञान और मंगल ऊर्जा का कारक है। कुंडली में गुरु की महादशा में जब मंगल की अंतर्दशा चलती है तो व्यक्ति को भूमि स्रोतों से लाभ होता है। पारिवारिक और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति रहती है और भाइयों के साथ संबंध मधुर होते हैं। हालांकि मंगल का प्रभाव होने के कारण जातक का स्वभाव दबंग और अहंकारी होता है, जिससे कुछ मामलों में विवाद की संभावना रहती है। 

9. गुरु की महादशा में राहु की अंतर्दशा

गुरु की महादशा में राहु की अंतर्दशा बहुत सारी उलझन और परेशानी लेकर आती है। इस समय व्यक्ति का स्वभाव थोड़ा उग्र हो जाता है, जिससे पारिवारिक रिश्ते खराब होते हैं। खर्चो में वृद्धि और करियर-व्यापार में भी नुकसान होता है। इसलिए इस दशा में धैर्य बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

गुरु की महादशा में क्या करें और क्या न करें

गुरु की महादशा में क्या करें

  • कुंडली में गुरु की महादशा हो तो व्यक्ति को गुरुवार का व्रत रखना चाहिए या इस दिन नमक का त्याग करें।
  • बड़े-बुजुर्गों जैसे दादा, पिता, गुरुजन और ब्राह्मणों का सम्मान करें, इससे गुरु ग्रह की कृपा बरसती है।
  • पीले रंग की चीजों का दान करना, सोना धारण करना या पीले रंगों का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए।

गुरु की महादशा में क्या न करें

  • गुरु सत्य के कारक है। इसलिए कुंडली में जब गुरु की महादशा चल रही हो तो झूठ बोलने से बचना चाहिए। 
  • गुरु का अर्थ ही होता है ऊंचा या बड़ा। बड़ों का अपमान न करें, इससे गुरु कमजोर होता है।
  • अनैतिक आचरण न अपनाएं। मांस-मंदिरा का सेवन करने और पराई स्त्री पर गलत दृष्टि रखने से बचें।
  • पीले वस्त्र पहनने से गुरु शुभ होता है। लेकिन कुंडली में गुरु मारक हो तो पीला रंग पहनने से बचें।

गुरु की महादशा को शांत और मजबूत करने के उपाय

  • सुबह स्नान के बाद माथे और नाभि पर केसर का तिलक लगाना चाहिए। इससे गुरु महादशा के दौरान भी शुभ फल मिलते हैं।
  • गुरुवार के दिन पीपल वृक्ष की पूजा करें, वृक्ष की जड़ में शक्कर मिला हुआ जल चढ़ाएं। लेकिन वृक्ष को स्पर्श करने से बचें।
  • बड़े-बुजर्गों और गुरुजनों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लें। इससे गुरु ग्रह मजबूत होता है।
  • प्रतिदिन या गुरुवार को 'ऊँ ब्रिं बृहस्पति नम:' मंत्र का 108 बार जाप करें। यह मंत्र भगवान विष्णु को समर्पित है और सकारात्मक फल देता है।
  • गुरु की महादशा में सोने की अंगूठी या चैन पहननी चाहिए। इसके साथ ही पीला पुखराज पहन सकते हैं। लेकिन कोई भी रत्न बिना ज्योतिषीय सलाह के धारण न करें। आप एस्ट्रोटॉक पर ज्योतिष से फ्री चैट या कॉल के जरिए उपाय या रत्न संबंध जानकारी ले सकते हैं।

अपनी गुरु महादशा कैसे देखें ?

हर व्यक्ति के मन में यह सवाल रहता है कि, इस समय उसके जीवन में किस ग्रह का प्रभाव है। वैदिक ज्योतिष में इसे महादशा और अंतर्दशा के रूप में समझा जाता है। कुंडली में कौन सी महादशा चल रही है, यह कैसे जानें? एस्ट्रोटॉक के ऑनलाइन दशा कैलकुलेटर की मदद से आप विंशोत्तरी दशा की गणना कर सकते हैं। यहां आप अपना नाम, लिंग, जन्म तारीख, जन्म का समय और जन्म स्थान जैसी सामान्य जानकारियां दर्ज कर यह जान सकते हैं कि आपकी कुंडली में गुरु महादशा चल रही है या नहीं। इससे आप न सिर्फ यह जानेंगे कि आपकी कुंडली में इस समय कौन की दशा चल रही है, बल्कि यह भी जानेंगे कि, इसका आपके आने वाले जीवन पर कैसा प्रभाव पड़ेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q: गुरु की महादशा अच्छी है बुरी?

A: गुरु की महादशा अच्छी या बुरी दोनों हो सकती है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि कुंडली में गुरु अनुकूल है या प्रतिकूल।

Q: गुरु की महादशा में किन चीजों से बचना चाहिए?

A: गुरु की महादशा में झूछ बोलने, बुजुर्गों का अपमान करने, अनैतिक आचरण अपनाने और फिजूलखर्ची से बचना चाहिए।

Q: गुरु की महादशा कब आर्थिक नुकसान कराती है?

A: कुंडली में गुरु यदि छठे, आठवें या बारहवें भाव का स्वामी होकर अशुभ स्थिति में हो तो पैसों का नुकसान करा सकता है।

Q: क्या गुरु की महादशा में हर व्यक्ति पुखराज पहन सकता है?

A: नहीं, पुखराज तभी पहनें जब गुरु कुंडली में योगकारक हो। बिना ज्योतिषीय परामर्श के पुखराज नहीं पहनना चाहिए।